पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड April 10, 2026, 16:46 IST
सारांश
भारत सरकार ने इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत पुराने फॉर्म 15G और 15H को हटाकर नया फॉर्म 121 पेश किया है। यह 'स्मार्ट' फॉर्म बैंक और पोस्ट ऑफिस में जमा पैसों पर टीडीएस कटने से बचाने के काम आता है।

फॉर्म 121 के जरिए बैंक और पोस्ट ऑफिस की ब्याज कमाई पर टीडीएस बचाया जा सकता है।
भारत सरकार ने अपनी टैक्स प्रणाली को और ज्यादा आधुनिक और आसान बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। इनकम टैक्स एक्ट 2025 के लागू होने के साथ ही पुराने कई फॉर्मों को अब पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। अगर आप बैंक डिपॉजिट, पोस्ट ऑफिस सेविंग्स या अन्य निवेशों से ब्याज के जरिए कमाई करते हैं, तो अब आपको टीडीएस कटने से बचाने के लिए एक नया तरीका अपनाना होगा। अब तक इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 15G और 15H की जगह अब नया 'फॉर्म 121' ले चुका है। यह एक सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म है जो यह साबित करता है कि आपकी कुल सालाना कमाई टैक्स लगने वाली सीमा से कम है, इसलिए आपके ब्याज पर टीडीएस नहीं काटा जाना चाहिए।
पुराने सिस्टम में अपनी उम्र के हिसाब से लोगों को अलग-अलग फॉर्म भरने पड़ते थे। सामान्य नागरिकों के लिए 15G और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 15H का नियम था। लेकिन अब सरकार ने इन दोनों की ताकत को मिलाकर एक ही 'फॉर्म 121' तैयार कर दिया है। यह बदलाव पे-एज-यू-अर्न के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका मतलब है कि टैक्स की प्रक्रिया अब और भी सीधी हो जाएगी। अब हर उम्र के व्यक्ति के लिए एक ही फॉर्म होगा, जिससे भ्रम की स्थिति खत्म होगी। यह नया सिस्टम आयकर नियम 2026 के नियम 211 के तहत काम करता है और पूरी तरह से डिजिटल तकनीक पर आधारित है।
फॉर्म 121 भरने के लिए सरकार ने कुछ पात्रता शर्तें भी तय की हैं। भारत में रहने वाला कोई भी निवासी व्यक्ति इसे भर सकता है। इसके अलावा 60 साल से ज्यादा उम्र वाले वरिष्ठ नागरिक और हिंदू अविभाजित परिवार यानी एचयूएफ भी इसके पात्र हैं। हालांकि, कंपनियों और पार्टनरशिप फर्मों को यह फॉर्म भरने की अनुमति नहीं दी गई है। इसके साथ ही जो लोग अनिवासी भारतीय यानी एनआरआई हैं, वे भी फॉर्म 121 का फायदा नहीं उठा सकते। यह फॉर्म सिर्फ उन्हीं लोगों के लिए है जिनकी कुल अनुमानित आय टैक्स छूट की सीमा के भीतर आती है।
फॉर्म 121 को जमा करने के लिए सही समय का चुनाव करना बहुत जरूरी है। जानकारों का कहना है कि इसे वित्त वर्ष की शुरुआत में ही जमा कर देना सबसे अच्छा रहता है। इसे ब्याज मिलने से पहले या खाते में पैसा क्रेडिट होने से पहले जमा करना अनिवार्य है, ताकि बैंक समय रहते टीडीएस काटना रोक सके। आजकल ज्यादातर बैंक अपने ग्राहकों को इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल ऐप के जरिए इसे ऑनलाइन जमा करने की सुविधा दे रहे हैं। इससे लोगों को बैंक के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ती और घर बैठे ही अपना टैक्स डिक्लेरेशन पूरा किया जा सकता है।
फॉर्म 121 भरने के लिए आपके पास कुछ बेसिक जानकारी होना बहुत जरूरी है। सबसे पहले आपके पास अपना पैन कार्ड होना चाहिए क्योंकि इसके बिना फॉर्म अधूरा है। इसके साथ ही आप जिस बैंक या संस्था में फॉर्म दे रहे हैं, उसका टैन (TAN) नंबर और अपने निवेश या फिक्स्ड डिपॉजिट की जानकारी भी पास रखें। वरिष्ठ नागरिकों को उम्र का सर्टिफिकेट भी देना पड़ सकता है। जैसे ही आप फॉर्म सबमिट करते हैं, बैंक आपकी डिटेल्स की जांच करता है और हर डिक्लेरेशन को एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी यूआईएन दिया जाता है। बैंक इस डेटा को हर महीने इनकम टैक्स विभाग को रिपोर्ट करता है जिससे सिस्टम में पारदर्शिता बनी रहती है।
यह नया फॉर्म पुराने फॉर्म्स के मुकाबले काफी एडवांस और स्मार्ट है। इसमें प्री-फिलिंग की सुविधा दी गई है, यानी आपके प्रोफाइल से आपका नाम, पता और पैन जैसी जानकारी खुद-ब-खुद भर जाती है। इसमें रीयल-टाइम वैलिडेशन की तकनीक भी जोड़ी गई है, जिससे अगर आप कोई जानकारी गलत भरते हैं, तो फॉर्म तुरंत एरर दिखा देता है। तारीख और अन्य विकल्पों के लिए इसमें ड्रॉप-डाउन मेन्यू दिया गया है, जिससे टाइप करने की मेहनत बचती है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें फिजिकल हस्ताक्षर की जगह स्मार्ट चेक बॉक्स के जरिए वेरिफिकेशन की सुविधा दी गई है, जो इसे पूरी तरह पेपरलेस और आधुनिक बनाता है।
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