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FY26 में EPF डिपॉजिट पर कितना मिलेगा ब्याज? 2 मार्च को हो जाएगा फैसला

Shubham Singh Thakur

2 min read | अपडेटेड February 19, 2026, 11:20 IST

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सारांश

EPFO: उम्मीद जताई जा रही है कि EPFO इस बार भी ब्याज दर को 8.25% पर ही बनाए रख सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह लगातार तीसरा साल होगा जब ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इसके पीछे राजनीतिक वजहें भी मानी जा रही हैं।

EPFO

EPFO इस समय करीब 25–26 लाख करोड़ रुपये का विशाल फंड मैनेज करता है।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) 2 मार्च को एक अहम बैठक करने जा रहा है। इस बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर्मचारियों के पीएफ (EPF) जमा पर मिलने वाली ब्याज दर तय की जाएगी। देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए यह फैसला बहुत अहम माना जा रहा है। यह फैसला EPFO की सबसे बड़ी निर्णय लेने वाली संस्था Central Board of Trustees (CBT) लेती है।

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इस बोर्ड में सरकार के प्रतिनिधि, नियोक्ता (एम्प्लॉयर) और ट्रेड यूनियन के सदस्य शामिल होते हैं। EPF पर ब्याज दर इस बात पर निर्भर करती है कि EPFO अपने निवेश से कितना रिटर्न कमा पाया है।

क्या है उम्मीदें?

उम्मीद जताई जा रही है कि EPFO इस बार भी ब्याज दर को 8.25% पर ही बनाए रख सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह लगातार तीसरा साल होगा जब ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इसके पीछे राजनीतिक वजहें भी मानी जा रही हैं, क्योंकि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव आने वाले हैं। ऐसे में सरकार कोई ऐसा फैसला नहीं लेना चाहती जिससे वेतनभोगी कर्मचारियों की नाराजगी बढ़े।

EPFO के पास 25–26 लाख करोड़ रुपये का फंड

रिपोर्ट्स के मुताबिक, EPFO इस समय करीब 25–26 लाख करोड़ रुपये का विशाल फंड मैनेज करता है। EPF को रिटायरमेंट प्लानिंग की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि इसमें टैक्स-फ्री, सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न मिलता है, जो अक्सर बैंक एफडी और छोटी बचत योजनाओं से बेहतर होता है।

पिछली बैठक में लिए गए थे ये बड़े फैसले

EPFO की पिछली बैठक अक्टूबर में हुई थी, जिसमें कई बड़े फैसले लिए गए थे। इनमें EPF से आंशिक निकासी के नियमों को आसान और ज्यादा लचीला बनाना शामिल था। Ministry of Labour and Employment के अनुसार, पहले मौजूद 13 जटिल नियमों को हटाकर अब एक ही सरल नियम बनाया गया है।

नई व्यवस्था के तहत आंशिक निकासी को तीन श्रेणियों में बांटा गया है, जिसमें जरूरी जरूरतें (बीमारी, शिक्षा, शादी), घर से जुड़ी जरूरतें और विशेष परिस्थितियां शामिल हैं।

निकासी की सीमा भी बढ़ाई गई है। शिक्षा के लिए अब 10 बार तक और शादी के लिए 5 बार तक पैसा निकाला जा सकता है। पहले शादी और शिक्षा मिलाकर कुल सिर्फ 3 बार ही निकासी की अनुमति थी। इसके अलावा, आंशिक निकासी के लिए जरूरी न्यूनतम सेवा अवधि को घटाकर सभी मामलों में सिर्फ 12 महीने कर दिया गया है।

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लेखकों के बारे में

Shubham Singh Thakur
Shubham Singh Thakur is a business journalist with a focus on stock market and personal finance. An alumnus of the Indian Institute of Mass Communication (IIMC), he is passionate about making financial topics accessible and relevant for everyday readers.

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