पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड February 25, 2026, 14:52 IST
सारांश
FD में निवेश करते वक्त यह जानना जरूरी है कि वह कॉलेबल है या नॉन-कॉलेबल। कॉलेबल एफडी में समय से पहले पैसा निकाल सकते हैं, जबकि नॉन-कॉलेबल में पैसा लॉक हो जाता है पर ब्याज ज्यादा मिलता है। 2026 में कई बैंक इन पर शानदार रेट्स दे रहे हैं।

सुरक्षित निवेश के लिए एफडी काफी लोगों की पहली पसंद है।
भारत में अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने और उस पर गारंटीड रिटर्न पाने के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी को हमेशा से सबसे भरोसेमंद जरिया माना गया है। लेकिन जब आप बैंक में एफडी कराने जाते हैं, तो आपको दो तरह के विकल्पों का सामना करना पड़ सकता है- कॉलेबल और नॉन-कॉलेबल FD। अक्सर लोग सिर्फ ब्याज दर देखकर निवेश कर देते हैं, लेकिन इन दोनों के बीच का अंतर आपके वित्तीय फ्यूचर और जरूरत के समय पैसों की उपलब्धता को काफी प्रभावित करता है। साल 2026 में बदलती आर्थिक स्थितियों के बीच बैंकों ने इन दोनों कैटेगरी के लिए अलग-अलग नियम और ब्याज दरें तय की हैं ताकि वे अपने ऑपरेशन को बेहतर बना सकें।
आसान भाषा में समझें तो कॉलेबल एफडी वह स्कीम है जिसमें बैंक आपको समय से पहले पैसा निकालने की इजाजत देता है। अगर आपको मैच्योरिटी से पहले पैसों की जरूरत पड़ जाए, तो आप इस एफडी को बंद कर सकते हैं। हालांकि, इसके बदले बैंक आपसे कुछ पेनल्टी वसूलता है, जिससे आपका नेट प्रॉफिट थोड़ा कम हो सकता है। आम तौर पर रिटेल निवेशकों के लिए यही विकल्प सबसे ज्यादा लोकप्रिय है, क्योंकि यह मुश्किल समय में नगदी की सुविधा देता है। इसमें निवेश की न्यूनतम राशि भी काफी कम होती है, जिसे कोई भी आम नागरिक शुरू कर सकता है।
नॉन-कॉलेबल एफडी उन लोगों के लिए डिजाइन की गई है जो एक निश्चित समय के लिए पैसा लॉक करने को तैयार हैं और बदले में ज्यादा रेवेन्यू कमाना चाहते हैं। इस स्कीम की सबसे बड़ी शर्त यह है कि आप मैच्योरिटी से पहले पैसा नहीं निकाल सकते। कुछ खास परिस्थितियों जैसे जमाकर्ता की मौत या कोर्ट के आदेश के बिना इसमें से पैसा निकालना संभव नहीं होता। चूंकि बैंक को यह भरोसा होता है कि यह पैसा एक तय समय तक उनके पास रहेगा, इसलिए वे इस पर कॉलेबल एफडी के मुकाबले 0.10 पर्सेंट से लेकर 0.25 पर्सेंट तक ज्यादा ब्याज देते हैं। यह उन लोगों के लिए बेहतर है जिनका लक्ष्य लंबी अवधि के लिए फंड जुटाना है।
भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के मुताबिक, अब 1 करोड़ रुपये तक की सभी एफडी में समय से पहले पैसा निकालने की सुविधा देना बैंकों के लिए अनिवार्य है। इसका मतलब है कि 1 करोड़ रुपये से कम की राशि जमा करने वाले आम ग्राहकों के लिए एफडी आमतौर पर कॉलेबल ही होती है। नॉन-कॉलेबल एफडी का विकल्प ज्यादातर बड़ी रकम जमा करने वाले ग्राहकों या संस्थानों के लिए उपलब्ध होता है। साल 2026 के शुरुआती महीनों में बैंकों ने अपनी जरूरतों को देखते हुए जमा दरों को काफी स्थिर रखा है ताकि बाजार में कंसोलिडेटेड स्थिति बनी रहे।
फरवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की रेगुलर एफडी दरें 3.05 पर्सेंट से 6.45 पर्सेंट के बीच चल रही हैं। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह दरें 3.55 पर्सेंट से 7.05 पर्सेंट तक जाती हैं। वहीं प्राइवेट सेक्टर के दिग्गज एचडीएफसी बैंक में सामान्य नागरिकों को 2.75 पर्सेंट से 6.45 पर्सेंट और बुजुर्गों को 3.25 पर्सेंट से 6.95 पर्सेंट तक ब्याज मिल रहा है। आईसीआईसीआई बैंक भी इसी कैटेगरी में 2.75 पर्सेंट से 6.60 पर्सेंट तक ब्याज दे रहा है। बैंक ऑफ इंडिया जैसे कुछ बैंक नॉन-कॉलेबल स्कीम पर कॉलेबल के मुकाबले थोड़ा ज्यादा ब्याज ऑफर कर रहे हैं।
अगर आप अपनी बचत पर सबसे ज्यादा ब्याज चाहते हैं, तो स्मॉल फाइनेंस बैंक इस समय मार्केट में सबसे आकर्षक FD पेश कर रहे हैं। यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक जैसे संस्थान वरिष्ठ नागरिकों को 9.10 पर्सेंट और आम लोगों को 8.60 पर्सेंट तक का ब्याज ऑफर कर रहे हैं। जन स्मॉल फाइनेंस और सूर्योदय जैसे बैंक भी 7.75 पर्सेंट से 8.50 पर्सेंट के बीच रिटर्न दे रहे हैं। हालांकि, इनमें निवेश करने से पहले बैंक की विश्वसनीयता की जानकारी लेना जरूरी है।
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