पर्सनल फाइनेंस
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3 min read | अपडेटेड February 23, 2026, 16:15 IST
सारांश
अगर आप 5 लाख का सोना बैंक लॉकर में रखने या उतनी ही रकम की एफडी (FD) कराने की सोच रहे हैं, तो सुरक्षा के लिहाज से दोनों में बड़ा अंतर है। एफडी पर सरकार की तरफ से 5 लाख तक की पक्की गारंटी मिलती है, जबकि लॉकर में नुकसान होने पर मुआवजा सिर्फ सालाना किराये का 100 गुना ही मिलता है।

बैंक लॉकर और एफडी के बीच सुरक्षा और मुआवजे के नियमों को समझना बहुत जरूरी है।
क्या आप भी इस उलझन में हैं कि 5 लाख रुपये की कीमत का सोना बैंक लॉकर में रखना ज्यादा सुरक्षित है या उसी रकम की बैंक में एफडी (Fixed Deposit) कराना बेहतर है? जब बात अपनी मेहनत की कमाई को बचाने की आती है, तो हम हमेशा उसी विकल्प को चुनना चाहते हैं जहां सबसे ज्यादा गारंटी मिले। लेकिन क्या आपको पता है कि बैंक लॉकर और एफडी, दोनों के लिए सुरक्षा के नियम बिल्कुल अलग हैं। अगर आप इन नियमों को समझे बिना फैसला लेते हैं, तो मुसीबत के समय आपको बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
अगर आप बैंक में एफडी कराते हैं, तो आपको एक कानूनी गारंटी मिलती है। भारत में बैंक डिपॉजिट पर डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के तहत इंश्योरेंस मिलता है। यह इंश्योरेंस हर डिपॉजिटर को एक बैंक में 5 लाख रुपये तक की सुरक्षा देता है। इस 5 लाख रुपये की सीमा में आपकी जमा की गई मूल रकम और उस पर मिलने वाला ब्याज, दोनों शामिल होते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर कल को बैंक फेल हो जाता है या डूब जाता है, तब भी कानूनन आपको अपने 5 लाख रुपये वापस मिलेंगे। आमतौर पर यह पैसा बैंक के बंद होने के 90 दिनों के भीतर वापस कर दिया जाता है। इस लिहाज से 5 लाख रुपये की एफडी पूरी तरह सुरक्षित मानी जाती है।
वहीं दूसरी तरफ, अगर आप अपने 5 लाख रुपये का सोना बैंक लॉकर में रखते हैं, तो वहाँ सुरक्षा का गणित पूरी तरह बदल जाता है। आरबीआई (RBI) के नियमों के मुताबिक, अगर आग लगने, चोरी होने या बैंक कर्मचारी द्वारा की गई धोखाधड़ी की वजह से आपके लॉकर के सामान को नुकसान पहुँचता है, तो बैंक की जिम्मेदारी सीमित होती है। बैंक आपको आपके सामान की पूरी कीमत नहीं चुकाता, बल्कि वह उस लॉकर के सालाना किराये का सिर्फ 100 गुना ही मुआवजा देता है। इसका मतलब है कि अगर आपके लॉकर का किराया कम है, तो आपको मिलने वाला मुआवजा भी आपके सोने की कीमत से बहुत कम हो सकता है।
इसे कुछ उदाहरणों से समझते हैं। मान लीजिए आपने एचडीएफसी (HDFC) बैंक के किसी सेमी-अर्बन ब्रांच में एक मीडियम साइज का लॉकर लिया है, जिसका सालाना किराया 3,300 रुपये है। अगर उस लॉकर से आपका 5 लाख का सोना गायब हो जाता है, तो बैंक की लायबिलिटी यानी जिम्मेदारी सिर्फ 3.3 लाख रुपये तक ही होगी। इसी तरह, आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक में अगर आप इसी तरह के लॉकर के लिए 5,500 रुपये किराया दे रहे हैं, तो वहाँ आपकी लायबिलिटी की सीमा 5.5 लाख रुपये तक होगी। वहीं, अगर एसबीआई (SBI) के किसी शहरी ब्रांच में मीडियम लॉकर का किराया 3,000 रुपये है, तो चोरी या आग लगने की स्थिति में बैंक आपको सिर्फ 3 लाख रुपये ही देगा। यानी आपके 5 लाख रुपये के सोने की पूरी भरपाई यहां भी नहीं हो पाएगी।
लॉकर के मामले में एक और बड़ी बात यह है कि बैंक प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़ या भूकंप के दौरान होने वाले नुकसान की कोई जिम्मेदारी नहीं लेते। इसके अलावा, अगर लॉकर में चोरी होती है, तो यह साबित करना भी आपकी अपनी जिम्मेदारी होती है कि उस लॉकर के भीतर वास्तव में क्या सामान रखा था। बैंक लॉकर केवल आपके कीमती सामान जैसे गहने, जरूरी दस्तावेज और कैश को रखने के लिए एक सुरक्षित जगह तो देते हैं, लेकिन वे एफडी की तरह पैसों की पूरी गारंटी नहीं देते।
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