return to news
  1. Stock Market: शेयर बाजार में बिकवाली आज भी जारी, इन 4 फैक्टर्स ने बिगाड़ा मार्केट का मूड

मार्केट न्यूज़

Stock Market: शेयर बाजार में बिकवाली आज भी जारी, इन 4 फैक्टर्स ने बिगाड़ा मार्केट का मूड

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड January 23, 2026, 12:42 IST

Twitter Page
Linkedin Page
Whatsapp Page

सारांश

Stock Market: विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने बाजार की धारणा को कमजोर बनाए रखा है। गुरुवार को FIIs ने करीब 2549.80 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। यह जनवरी में अब तक लगातार 13वां दिन था जब FII शुद्ध रूप से बिकवाल रहे। इस महीने सिर्फ 2 जनवरी को ही FII शुद्ध खरीदार थे।

Stock Market

Stock Market: एक्सपर्ट्स का कहना है कि FII का रुख भारत की कॉरपोरेट कमाई पर निर्भर करेगा।

Stock Market: भारतीय शेयर बाजार में आज 23 जनवरी को एक बार फिर बिकवाली हो रही है। आज के कारोबार में BSE Sensex में करीब 360 अंकों की गिरावट देखी गई और यह 81,947.52 के स्तर तक लुढ़क गया। दूसरी तरफ Nifty 50 भी 77.65 अंकों की गिरावट के साथ 25,213.15 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली का दबाव बाजार पर अब भी बना हुआ है। यहां हमने बाजार में गिरावट के 4 बड़े कारण बताए हैं।
Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

FIIs की लगातार बिकवाली

विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने बाजार की धारणा को कमजोर बनाए रखा है। गुरुवार को FIIs ने करीब 2549.80 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। यह जनवरी में अब तक लगातार 13वां दिन था जब FII शुद्ध रूप से बिकवाल रहे। इस महीने सिर्फ 2 जनवरी को ही FII शुद्ध खरीदार थे।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि FII का रुख भारत की कॉरपोरेट कमाई पर निर्भर करेगा। उनका कहना है कि जब तक कंपनियों की कमाई में तेज और टिकाऊ बढ़ोतरी नहीं दिखती, तब तक FII की खरीदारी लौटना मुश्किल है।

कमजोर तिमाही नतीजे

बाजार पर दबाव बढ़ाने में बड़ी कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों का भी योगदान रहा। ICICI Bank और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसी दिग्गज कंपनियों के नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगाया और बाजार की धारणा नकारात्मक हुई।

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी बाजार की बढ़त को सीमित कर दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 0.8% बढ़कर 64.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल व्यापार घाटा बढ़ा सकता है और महंगाई का दबाव भी बना सकता है, जिसका असर शेयर बाजार पर नकारात्मक पड़ता है।

जियो पॉलिटिकल टेंशन

डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड पर रुख में नरमी देखने को मिली है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका और यूरोप के रिश्तों में एक दरार डाल दी है। यूरोप पर तत्काल खतरा तो टल गया, लेकिन भविष्य को लेकर अनिश्चितता अब भी बनी हुई है। रॉयटर्स के मुताबिक ट्रंप की पहले की धमकियों ने यूरोप का अमेरिका के साथ पारंपरिक रिश्तों पर भरोसा हिला दिया है। यूरोपीय संघ के नेताओं और अधिकारियों ने भी माना है कि दोनों पक्षों के संबंधों पर काफी दबाव पड़ा है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
SIP
टाइमिंग पर भारी पड़ती है निरंतरता
promotion image

लेखकों के बारे में

Shubham Singh Thakur
Shubham Singh Thakur is a business journalist with a focus on stock market and personal finance. An alumnus of the Indian Institute of Mass Communication (IIMC), he is passionate about making financial topics accessible and relevant for everyday readers.

अगला लेख