मार्केट न्यूज़

5 min read | अपडेटेड March 06, 2026, 15:46 IST
सारांश
भारतीय शेयर बाजार के लिए शुक्रवार का दिन बेहद खराब रहा और बाजार बंद होते समय सेंसेक्स 1097 अंकों की भारी गिरावट के साथ 78,918 पर रहा। निफ्टी भी 315 अंक गिरकर 24,450 के स्तर पर बंद हुआ। बैंकिंग और रियल्टी शेयरों में आई जबरदस्त बिकवाली ने निवेशकों का भरोसा तोड़ दिया।

शेयर बाजार में भारी गिरावट के बाद लाल निशान में कारोबार बंद हुआ।
भारतीय शेयर बाजार के लिए शुक्रवार का दिन किसी काले सपने से कम नहीं रहा। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन बाजार में ऐसी बिकवाली आई कि चारों तरफ हाहाकार मच गया। 6 मार्च को बाजार बंद होते समय सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही अपने बड़े सपोर्ट लेवल को तोड़कर काफी नीचे जा गिरे। आज सुबह से ही बाजार में दबाव नजर आ रहा था, लेकिन दोपहर के बाद बिकवाली इतनी तेज हुई कि रिकवरी की कोई भी गुंजाइश नहीं बची। बाजार में आई इस गिरावट की वजह से निवेशकों को आज लाखों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
आज के कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 1097 अंक यानी 1.37 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 78,918.90 के स्तर पर बंद हुआ। सेंसेक्स आज सुबह 79,658.99 पर खुला था और पूरे दिन के दौरान इसमें गिरावट का सिलसिला जारी रहा। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 इंडेक्स भी 315.45 अंक यानी 1.27 प्रतिशत टूटकर 24,450.45 पर आ गया। निफ्टी ने आज 24,765 के पिछले बंद स्तर के मुकाबले काफी नीचे कारोबार खत्म किया।
बाजार को नीचे गिराने में आज सबसे बड़ी भूमिका बैंकिंग सेक्टर की रही। निफ्टी बैंक आज 1,272.60 अंक यानी 2.15 प्रतिशत की बड़ी गिरावट के साथ 57,783.25 पर बंद हुआ। बैंकिंग शेयरों में आई इस गिरावट ने पूरे बाजार के मूड को खराब कर दिया। आंकड़ों पर नजर डालें तो निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 2.27 प्रतिशत और निफ्टी पीएसयू बैंक में 2.01 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई। इसके अलावा निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स भी 2.13 प्रतिशत नीचे फिसल गया।
बाजार के अन्य सेक्टर्स की बात करें तो रियल्टी और ऑटो में भी आज बिकवाली का जबरदस्त दबाव दिखा। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स आज 2.08 प्रतिशत की गिरावट के साथ 742 के लेवल पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी ऑटो इंडेक्स में भी 1.06 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। मेटल और मीडिया जैसे सेक्टर्स भी आज बिकवाली से नहीं बच पाए और वे भी लाल निशान में ही रहे। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन को लेकर बनी चिंताओं ने इन सेक्टर्स के ऑपरेशनल परफॉर्मेंस पर असर डाला है, जिसका असर आज इनके शेयर प्राइस में साफ देखने को मिला।
इतनी बड़ी गिरावट के बीच केवल आईटी सेक्टर ही ऐसा था जो थोड़ा संभला हुआ नजर आया। निफ्टी आईटी इंडेक्स आज 0.04 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 30,138.40 पर बंद हुआ। हालांकि यह बढ़त बहुत कम थी, लेकिन चौतरफा बिकवाली के माहौल में आईटी सेक्टर का हरे निशान में रहना बड़ी बात है। इसके अलावा निफ्टी फार्मा और एफएमसीजी जैसे सेक्टर्स भी गिरावट का शिकार हुए, लेकिन उनकी गिरावट बैंकिंग के मुकाबले कम रही। आज के खराब प्रदर्शन के बाद अब निवेशकों की नजरें सोमवार के बाजार पर टिकी होंगी कि क्या वहां कोई सुधार देखने को मिलता है।
मिडिल ईस्ट से आ रही डरावनी खबरों ने आज बाजार का मूड पूरी तरह बिगाड़ दिया। अमेरिका और ईरान के बीच जो तनाव चल रहा था, उसने अब एक भयानक जंग का रूप ले लिया है। ताजा खबरों के अनुसार, एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के एक जंगी जहाज पर हमला कर उसे डुबो दिया है, जिसमें 80 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके अलावा नाटो की तरफ से ईरान की एक मिसाइल को मार गिराने की खबर ने भी आग में घी डालने का काम किया। इस युद्ध की आहट से पूरी दुनिया के निवेशक सहमे हुए हैं और वे शेयर बाजार से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित जगहों पर लगा रहे हैं।
युद्ध की इसी चिंता के बीच सोने और चांदी की कीमतों में लगी आग ने भी बाजार को तगड़ा झटका दिया है। जब भी दुनिया में जंग के हालात बनते हैं, तो लोग शेयर बाजार के बजाय सोने में निवेश करना ज्यादा सुरक्षित समझते हैं। आज एमसीएक्स पर सोने के दाम 1.62 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए, वहीं चांदी ने भी 2.74 लाख का स्तर पार कर लिया। सोने की इस जबरदस्त चमक की वजह से शेयर बाजार की लिक्विडिटी यानी नकदी कम हो गई, क्योंकि निवेशकों ने अपना पैसा इक्विटी मार्केट से निकालकर बुलियन मार्केट की तरफ मोड़ दिया।
गिरावट की तीसरी बड़ी वजह भारत की दिग्गज कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी से जुड़ी है। कंपनी को कतर एनर्जी की तरफ से फोर्स मेजर का नोटिस मिला है, जिसका मतलब है कि अब गैस की सप्लाई रुक सकती है। पेट्रोनेट ने भी यही नोटिस आगे गेल और इंडियन ऑयल जैसी कंपनियों को भेज दिया है। गैस सप्लाई में आने वाली इस रुकावट ने एनर्जी और तेल कंपनियों के शेयरों पर दबाव बना दिया। निवेशकों को डर है कि अगर सप्लाई लंबे समय तक रुकी रही, तो इन कंपनियों के बिजनेस और रेवेन्यू पर बुरा असर पड़ेगा। इसी डर की वजह से इन स्टॉक्स में जबरदस्त बिकवाली देखी गई।
लेखकों के बारे में

अगला लेख