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4 min read | अपडेटेड March 06, 2026, 11:04 IST
सारांश
एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत के लिए फिलहाल सप्लाई की चिंता कम हुई है, जिससे क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार तेजी पर ब्रेक लगने के उम्मीद जताई जा रही है।
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30 दिनों के लिए रूसी तेल खरीदने की अनुमति, IOC-BPCL और ONGC के शेयरों का क्या है हाल
अमेरिकी सरकार ने भारत को 30 दिनों के लिए रूस से तेल खरीदने की अस्थायी छूट दी है। इस खबर के बाद अब भारत की बड़ी ऑयल मार्केटिंग और रिफाइनिंग कंपनियां के शेयरों पर नजर बनी हुई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत के लिए फिलहाल सप्लाई की चिंता कम हुई है, जिससे क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार तेजी पर ब्रेक लगने के उम्मीद जताई जा रही है। रिपोर्ट लिखे जाने के समय Brent Crude (ब्रेंट क्रूड) में आज 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट थी और यह 84.53 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था।
आज इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के शेयरों में करीब 1 फीसदी की गिरावट नजर आ रही है। BPCL का शेयर भी करीब 2 फीसदी टूट गया है। इसके अलावा HPCL के शेयरों में भी कमजोरी नजर आ रही है। शेयर बाजार में गिरावट के बीच इन शेयरों पर दबाव नजर आ रहा है। हालांकि, आम तौर पर लंबे समय में तेल सस्ता होना OMC के लिए अच्छा माना जाता है।
तेल निकालने वाली कंपनियों की बात करें तो ONGC का शेयर करीब 1.36 फीसदी टूट गया है। दूसरी तरफ ऑयल इंडिया का शेयर मामूली बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा था। ये दोनों कंपनियां “अपस्ट्रीम” हैं, यानी ये कच्चा तेल खोजती और निकालती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होता है, तो इन्हें उसी तेल के बदले कम दाम मिलते हैं, जिससे कमाई और मुनाफा पर असर पड़ता है।
असल में यह छूट U.S. Department of the Treasury ने दी है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने कहा कि ट्रंप की ऊर्जा नीति के कारण अमेरिका में तेल और गैस का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि दुनिया में तेल की सप्लाई बनी रहे, इसलिए भारत की रिफाइनरियों को 30 दिनों तक रूसी तेल खरीदने की अस्थायी अनुमति दी जा रही है, ताकि वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बाधित न हो।
हालांकि अमेरिकी सरकार ने साफ किया है कि यह जानबूझकर बहुत कम समय के लिए दिया गया कदम है। इसका मकसद रूस को ज्यादा आर्थिक फायदा पहुंचाना नहीं है। दरअसल यह छूट सिर्फ उस तेल के लेनदेन के लिए है जो पहले से ही समुद्र में फंसा हुआ है और जिसे खरीदारों तक पहुंचना है। यानी यह कोई लंबी अवधि की अनुमति नहीं है, बल्कि सिर्फ अस्थायी व्यवस्था है ताकि सप्लाई चेन अचानक न टूटे।
बेसेंट ने यह भी कहा कि India अमेरिका का एक अहम साझेदार है और अमेरिका को उम्मीद है कि भारत भविष्य में अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह अस्थायी कदम उस दबाव को कम करने के लिए है जो Iran की वजह से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बन रहा है।
इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25% का दंडात्मक टैरिफ लगा दिया था, क्योंकि अमेरिका का आरोप था कि भारत द्वारा Russia से तेल खरीदना, रूस को आर्थिक मदद दे रहा है और इससे Russia–Ukraine War को जारी रखने में मदद मिल रही है। लेकिन पिछले महीने अमेरिका और भारत के बीच व्यापार को लेकर एक अंतरिम समझौते का ढांचा तैयार हुआ, जिसके बाद ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी कर भारत पर लगाए गए 25% टैरिफ हटा दिए। इसके साथ ही भारत ने भी संकेत दिया कि वह धीरे-धीरे रूस से ऊर्जा आयात कम करेगा और अमेरिका से ज्यादा ऊर्जा उत्पाद खरीदेगा।
इसी बीच वैश्विक तेल बाजार में भी तनाव बढ़ गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण Brent Crude की कीमत गुरुवार को 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। इस संकट का केंद्र Strait of Hormuz बना हुआ है, जो दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में से एक है। युद्ध के असर के बाद यहां ट्रेडिंग गतिविधि लगभग 90% तक गिर गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह संघर्ष कुछ और हफ्तों तक चलता रहा तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
भारत की ऊर्जा स्थिति को देखें तो शुरुआती अनुमानों के मुताबिक मार्च में भारत के पास लगभग 9–10 दिनों का विशेष रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और इसके अलावा कंपनियों के व्यावसायिक स्टॉक भी मौजूद थे। कुल मिलाकर भारत के पास लगभग 6 से 8 हफ्तों की तेल आपूर्ति का स्टॉक उपलब्ध माना जा रहा है, जिससे देश कुछ समय तक संभावित सप्लाई संकट को संभाल सकता है।
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