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4 min read | अपडेटेड March 17, 2026, 09:26 IST
सारांश
ग्रीन अमोनिया का प्रोडक्शन जीवाश्म ईंधन की जगह रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों का इस्तेमाल करके किया जाता है। इससे यह कार्बन-मुक्त या कम कार्बन वाला विकल्प बन जाता है। प्राकृतिक गैस का उपयोग करके बनाए जाने वाले पारंपरिक अमोनिया के उलट, ग्रीन अमोनिया का उत्पादन ग्रीन हाइड्रोजन से हाइड्रोजन को हवा से नाइट्रोजन के साथ मिलाकर किया जाता है।
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रिलायंस ने सैमसंग सी एंड टी के साथ किया तीन अरब डॉलर का हरित अमोनिया आपूर्ति समझौता
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने दक्षिण कोरिया की सैमसंग सी एंड टी के साथ तीन अरब डॉलर की ग्रीन अमोनिया सप्लाई को लेकर डील की है। यह डील 15 सालों के लिए ग्रीन अमोनिया की सप्लाई के लिए है। आज शेयर मार्केट खुला तो रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर ग्रीन में नजर आए। हालांकि शेयरों में मामूली बढ़त ही देखने को मिली। इस डील को लेकर कंपनी ने सोमवार को जानकारी दी। यह करार ग्लोबल लेवल पर सबसे बड़े लॉन्ग-टर्म ग्रीन अमोनिया समझौतों में से एक है। यह भारत को पूरी तरह से स्वदेशी वैल्यू चेन के जरिए प्रोड्यूस्ड ग्रीन ईंधन के उभरते निर्यातक के रूप में स्थापित करता है, जिसमें महत्वपूर्ण स्वच्छ ऊर्जा उपकरणों का घरेलू विनिर्माण भी शामिल है। सप्लाई फाइनेंशियल ईयर 2028-29 की दूसरी छमाही में शुरू होगी।
रिलायंस ने बयान में कहा कि उसने दक्षिण कोरिया की औद्योगिक सामग्रियों के कारोबार और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के डेवलपमेंट से जुड़ी सैमसंग सी एंड टी कॉरपोरेशन के साथ 15 साल की अवधि के लिए ग्रीन अमोनिया की सप्लाई को लेकर एक पक्का दीर्घकालिक सप्लाई एंड परचेस एग्रीमेंट (SPA) किया है। इसकी सप्लाई वित्त वर्ष 2028-29 की दूसरी छमाही से शुरू होगी। रिलायंस ने कहा, ‘तीन अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य का यह SPA ग्लोबल लेवल पर ग्रीन अमोनिया की सप्लाई के लिए सबसे बड़े पक्के दीर्घकालिक समझौतों में से एक है।’
ग्रीन अमोनिया का प्रोडक्शन जीवाश्म ईंधन की जगह रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों का इस्तेमाल करके किया जाता है। इससे यह कार्बन-मुक्त या कम कार्बन वाला विकल्प बन जाता है। प्राकृतिक गैस का उपयोग करके बनाए जाने वाले पारंपरिक अमोनिया के उलट, ग्रीन अमोनिया का उत्पादन ग्रीन हाइड्रोजन (रिन्यूएबल पावर का उपयोग करके इलेक्ट्रोलाइसिस विधि से प्राप्त) से हाइड्रोजन को हवा से नाइट्रोजन के साथ मिलाकर किया जाता है।
इसका उपयोग उर्वरक, औद्योगिक रसायन, बिजली उत्पादन और परिवहन के लिए ईंधन के रूप में किया जा सकता है। रिलायंस रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन समेत एक पूर्ण एकीकृत नया एनर्जी मंच डेवलप कर रही है। इसे सोलर मॉड्यूल, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और इलेक्ट्रोलाइजर सिस्टम का कंपनी के भीतर विनिर्माण से समर्थन प्राप्त है। यह पहल भारत के राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता के लिए सरकार के प्रयासों के अनुरूप है।
सैमसंग सी एंड टी के साथ यह समझौता, रिलायंस के न्यू एनर्जी प्लैटफॉर्म के विस्तार में सहयोग देने वाली दीर्घकालिक आपूर्ति साझेदारियों की सीरीज में पहला कदम है।
रिलायंस के कार्यकारी निदेशक अनंत अंबानी ने कहा कि सैमसंग सी एंड टी के साथ साझेदारी से लागत-प्रतिस्पर्धी और भरोसेमंद हरित अमोनिया उपलब्ध होगा। साथ ही कंपनी के हरित हाइड्रोजन परिवेश और गीगाफैक्ट्रीज (बड़े आकार के कारखाने) के विस्तार में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘यह साझेदारी भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है। रिलायंस की न्यू एनर्जी पहल का उद्देश्य न केवल एनर्जी बदलाव को आगे बढ़ाना है, बल्कि भारत के रिन्यूएबल रिसोर्सेज को देश के मैनुफैक्चरिंग लीडरशिप, वर्ल्ड क्लास टैलेंट और इनोवेशन के साथ एकीकृत करके वैल्यू ऐडेड ग्रीन फ्यूल और रसायनों का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने के लिए एक मजबूत इंडस्ट्रियल प्लैटफॉर्म का निर्माण करना भी है।’
अंबानी ने कहा, ‘इस दृष्टिकोण के मूल में एनर्जी बदलाव की महत्वपूर्ण टेक्नॉलिजीज... सोलर एनर्जी, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम और इलेक्ट्रोलाइजर... को एक मजबूत मेक-इन-इंडिया ढांचे के तहत स्वदेशी बनाने की हमारी प्रतिबद्धता है।’ उन्होंने कहा, ‘इस तरह की साझेदारियां हमारे ग्रीन हाइड्रोजन परिवेश और गीगाफैक्ट्री को विकसित करने में मदद करेंगी। साथ ही भारत की हरित हाइड्रोजन और इसके व्युत्पन्न उत्पादों के लिए ग्लोबल केंद्र बनने की महत्वाकांक्षा में योगदान देंगी।’
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