मार्केट न्यूज़

3 min read | अपडेटेड March 04, 2026, 12:05 IST
सारांश
ईरान-इजराइल युद्ध की वजह से कतर एनर्जी ने एलएनजी और अन्य मटेरियल्स का प्रोडक्शन रोक दिया है। कंपनी ने 'फोर्स मेजर' क्लॉज लागू कर दिया है, जिससे भारत की पेट्रोनेट एलएनजी, गेल और बीपीसीएल जैसी कंपनियों को गैस सप्लाई बाधित होगी। इस खबर से आज ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों में भारी गिरावट देखी जा रही है।

कतर से होने वाली एलएनजी सप्लाई रुकने की खबर ने भारतीय बाजार को डरा दिया है।
ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव ने अब दुनिया भर के एनर्जी मार्केट में खलबली मचा दी है। इस युद्ध का सीधा और बड़ा असर भारत की गैस सप्लाई पर पड़ता दिख रहा है। दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी प्रोड्यूसर्स में से एक, कतर एनर्जी ने युद्ध की वजह से न केवल एलएनजी बल्कि अन्य मटेरियल्स का उत्पादन भी रोकने का ऐलान कर दिया है। कतर एनर्जी ने पेट्रोनेट एलएनजी जैसी कंपनियों को सप्लाई देने के मामले में 'फोर्स मेजर' (Force Majeure) क्लॉज लागू कर दिया है। इसका मतलब है कि युद्ध जैसे हालातों की वजह से कंपनी अब अपनी सप्लाई की जिम्मेदारी पूरी नहीं कर पाएगी।
कतर एनर्जी के इस फैसले का असर भारत की कई दिग्गज कंपनियों पर होने वाला है। पेट्रोनेट एलएनजी ने भी आगे अपने ग्राहकों जैसे गेल (GAIL), इंडियन ऑयल (IOC) और बीपीसीएल (BPCL) को 'फोर्स मेजर' नोटिस जारी कर दिया है। जानकारों के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में भारत अपनी कुल एलएनजी जरूरत का लगभग 40 से 50 पर्सेंट हिस्सा अकेले कतर से इम्पोर्ट करता रहा है। ग्लोबल मार्केट में गैस की कीमतों में आए उछाल के बीच कतर से होने वाली इस सप्लाई की भरपाई करना भारत के लिए बहुत मुश्किल चुनौती साबित हो सकता है।
इस खबर के बाहर आते ही आज शेयर बाजार में ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों में जोरदार गिरावट देखी जा रही है। आज दोपहर 12 बजे तक के आंकड़ों की बात करें तो निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स करीब 2.39 पर्सेंट की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा है। सबसे ज्यादा मार पेट्रोनेट एलएनजी पर पड़ी है, जिसका शेयर 9.12 पर्सेंट तक टूट गया है। इसके अलावा गेल के शेयरों में 5.70 पर्सेंट और बीपीसीएल में 3.67 पर्सेंट की कमजोरी दर्ज की गई है। आईजीएल और एमजीएल जैसी गैस कंपनियों के शेयर भी 5 से 8 पर्सेंट के बीच गोता लगा रहे हैं।
दिग्गज ब्रोकरेज फर्म सिटी (Citi) के मुताबिक, पेट्रोनेट एलएनजी के लिए यह स्थिति काफी गंभीर है क्योंकि कतर से आने वाली एलएनजी कंपनी के कुल वॉल्यूम का लगभग 50 पर्सेंट हिस्सा है। सप्लाई रुकने से कंपनी के बिजनेस वॉल्यूम पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। वहीं गेल के लिए अच्छी बात यह है कि उसका पोर्टफोलियो काफी विविधता भरा है। हालांकि गेल के गैस ट्रांसमिशन वॉल्यूम पर असर पड़ सकता है, लेकिन गैस ट्रेडिंग मार्जिन में बढ़ोतरी और एलपीजी व पेट्रोकेमिकल बिजनेस से होने वाले संभावित मुनाफे से इस नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सकती है।
बाजार में आज केवल गैस कंपनियां ही नहीं, बल्कि पूरा सेक्टर दबाव में है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में 1 पर्सेंट और ओएनजीसी में 0.53 पर्सेंट की गिरावट है। गुजरात गैस और एटीजीएल जैसी कंपनियां भी 2 पर्सेंट से ज्यादा नीचे हैं। दूसरी तरफ, सेक्टरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी मेटल 3.13 पर्सेंट और निफ्टी ऑटो 2.83 पर्सेंट की गिरावट के साथ सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। बाजार के जानकारों का कहना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता, तब तक एनर्जी सेक्टर और शेयर बाजार में ऐसी ही अस्थिरता बनी रह सकती है।
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