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  1. ISRO के साथ लखनऊ की कंपनी की बड़ी डील, अंतरिक्ष मिशन के लिए बनाएगी 'खास लोहा'

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ISRO के साथ लखनऊ की कंपनी की बड़ी डील, अंतरिक्ष मिशन के लिए बनाएगी 'खास लोहा'

Upstox

3 min read | अपडेटेड January 07, 2026, 16:18 IST

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सारांश

लखनऊ स्थित पीटीसी इंडस्ट्रीज को इसरो के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) से एक महत्वपूर्ण आर्डर प्राप्त हुआ है। कंपनी अंतरिक्ष अभियानों के लिए एयरोस्पेस-ग्रेड टाइटेनियम एलॉय इंगोट्स की सप्लाई करेगी। यह आर्डर 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत रणनीतिक क्षेत्रों में स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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एयरोस्पेस सेक्टर में पीटीसी इंडस्ट्रीज का धमाका

लखनऊ की कंपनी पीटीसी इंडस्ट्रीज के लिए बुधवार का दिन एक बड़ी उपलब्धि लेकर आया है। कंपनी को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो के महत्वपूर्ण केंद्र विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र से एक बड़ा ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर अंतरिक्ष अभियानों में उपयोग होने वाली विशेष धातु की सप्लाई से जुड़ा है। इस खबर के सार्वजनिक होते ही औद्योगिक और रक्षा गलियारों में कंपनी की तकनीकी क्षमता की चर्चा तेज हो गई है। पीटीसी इंडस्ट्रीज ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया है कि उन्हें एयरोस्पेस-ग्रेड टाइटेनियम एलॉय इंगोट्स तैयार करने का काम सौंपा गया है। यह पूरा कॉन्ट्रैक्ट अगले एक साल की समय सीमा के भीतर पूरा किया जाना है।

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तकनीकी रूप से बेहद जटिल है यह ऑर्डर

इस ऑर्डर की बारीकियों पर गौर करें तो पीटीसी इंडस्ट्रीज को लगभग 40 टन ग्रेड 1 टाइटेनियम स्पंज को टाइटेनियम एलॉय इंगोट्स में तब्दील करना होगा। इसके लिए कंपनी 'डबल वैक्यूम आर्क रीमेल्टिंग' नामक एक बहुत ही जटिल और उन्नत प्रक्रिया का उपयोग करेगी। अंतरिक्ष और एयरोस्पेस क्षेत्र में इस तकनीक का महत्व बहुत अधिक है क्योंकि यह धातु में उच्च स्तर की एकरूपता और शुद्धता सुनिश्चित करती है। अंतरिक्ष यानों और रॉकेट के पुर्जे बनाने में इस्तेमाल होने वाली धातुओं को बहुत अधिक दबाव और तापमान का सामना करना पड़ता है, इसलिए उनका पूरी तरह दोषमुक्त होना अनिवार्य है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि ग्रेड 1 टाइटेनियम स्पंज का उपयोग करने से धातु में अशुद्धियां बहुत कम रहती हैं, जो किसी भी सफल अंतरिक्ष मिशन की प्राथमिक शर्त होती है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम

पीटीसी इंडस्ट्रीज ने इस ऑर्डर को अपनी धातुकर्म क्षमताओं और कड़ी गुणवत्ता नियंत्रण मानकों पर इसरो की एक बड़ी मुहर बताया है। कंपनी का कहना है कि यह ऑर्डर भारत सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के उद्देश्यों को पूरा करने में सहायक होगा। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और जटिल सामग्रियों के लिए भारत को लंबे समय तक विदेशों और आयात पर निर्भर रहना पड़ता था। अब पीटीसी इंडस्ट्रीज जैसी घरेलू कंपनियां देश के भीतर ही इन उच्च स्तरीय धातुओं का निर्माण कर रही हैं। इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी बल्कि रक्षा और अंतरिक्ष जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भारत की आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी। हालांकि सुरक्षा और गोपनीयता की शर्तों के कारण इस ऑर्डर की कुल वित्तीय राशि का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन कंपनी का दावा है कि यह उनके कारोबार के लिए बहुत लाभकारी सिद्ध होगा।

कैसा है कंपनी के शेयर का हाल?

अगर हम पीटीसी इंडस्ट्रीज के हालिया वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 191 करोड़ रुपये रहा है। पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले इसमें लगभग 11.8 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। हालांकि, कंपनी के ऑपरेशनल रेवेन्यू में 11.7 प्रतिशत की बढ़त हुई है और यह 5,458 करोड़ रुपये के लेवल पर पहुंच गया है। शेयर बाजार में बुधवार को कंपनी के शेयरों में हल्की सुस्ती देखी गई और यह 1.68 प्रतिशत की गिरावट के साथ 17,580 रुपये के आसपास कारोबार करता पाया गया। पिछले एक महीने में इस शेयर में करीब 7 प्रतिशत की कमी आई है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
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लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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