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4 min read | अपडेटेड April 08, 2026, 13:39 IST
सारांश
अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर की खबर से कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है। इसका सीधा फायदा भारतीय तेल कंपनियों को मिला है। एचपीसीएल और बीपीसीएल जैसी कंपनियों के शेयरों में आज जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है, जिससे शेयर बाजार में रौनक लौट आई है।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स में दिखा जोरदार एक्शन।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच एक ऐसी खबर आई है जिसने दुनिया भर के बाजारों में नई जान फूंक दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ दो हफ्ते के दोतरफा सीजफायर यानी युद्धविराम का ऐलान किया है। इस समझौते की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली है। कच्चे तेल के दाम गिरने का सबसे बड़ा और सकारात्मक असर भारतीय शेयर बाजार के ऑयल एंड गैस सेक्टर पर पड़ा है। आज सुबह से ही तेल कंपनियों के शेयरों में जोरदार खरीदारी देखी जा रही है और निवेशकों का भरोसा फिर से लौटता हुआ नजर आ रहा है।
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच पिछले छह हफ्तों से चल रहे संघर्ष में यह पहली बार है जब शांति की कोई ठोस उम्मीद जगी है। ट्रंप के इस फैसले के बाद तेल की सप्लाई से जुड़ी चिंताएं कम हो गई हैं। जैसे ही यह खबर आई कि अगले दो हफ्ते तक कोई हमला नहीं होगा, वैसे ही क्रूड ऑयल की कीमतें धड़ाम से नीचे गिर गईं। भारत के लिए यह बहुत बड़ी राहत की बात है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल दूसरे देशों से खरीदता है। तेल की कीमतें गिरने से भारत का इंपोर्ट बिल कम होगा जिससे देश की अर्थव्यवस्था को बड़ी मजबूती मिलेगी।
कच्चे तेल के दाम गिरने से भारत को कई मोर्चों पर फायदा मिलता है। सबसे पहले तो इससे करेंट अकाउंट डेफिसिट यानी कैड को कम करने में मदद मिलती है। जब तेल सस्ता होता है तो ट्रांसपोर्टेशन और फ्यूल की लागत कम हो जाती है, जिसका सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। महंगाई कम होने से लोगों की खर्च करने की क्षमता बढ़ती है और इससे पूरी इकोनॉमी में ग्रोथ देखने को मिलती है। इसके अलावा, तेल की कम कीमतें सरकार के बजट को भी संतुलित करती हैं क्योंकि इससे सब्सिडी का बोझ कम हो जाता है। यही कारण है कि आज भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले मजबूती दिखाता हुआ नजर आ रहा है।
शेयर बाजार में आज सबसे ज्यादा चमक ऑयल मार्केटिंग कंपनियों यानी ओएमसी में देखी जा रही है। एनएसई के आंकड़ों के मुताबिक हिंदुस्तान पेट्रोलियम यानी एचपीसीएल के शेयर में करीब 7.72 पर्सेट की भारी तेजी आई है। वहीं भारत पेट्रोलियम यानी बीपीसीएल भी 6.29 पर्सेट से ज्यादा उछल गया है। इंडियन ऑयल के शेयरों में भी 5 पर्सेट से ज्यादा की बढ़त देखी गई है। इन कंपनियों को फायदा इसलिए होता है क्योंकि कच्चे तेल के दाम गिरने से इनका मार्केटिंग मार्जिन बढ़ जाता है। इसके अलावा, तेल सस्ता होने से इन कंपनियों की वर्किंग कैपिटल की जरूरतें कम हो जाती हैं और इन्वेंट्री लॉस का डर भी खत्म हो जाता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में भी आज 2.71 पर्सेट की अच्छी बढ़त दर्ज की गई है।
एक तरफ जहां तेल बेचने वाली कंपनियों को फायदा हो रहा है, वहीं तेल निकालने वाली यानी अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए यह खबर अच्छी नहीं रही। ओएनजीसी के शेयरों में आज 2.60 पर्सेट की गिरावट देखी गई है और ऑयल इंडिया का शेयर भी 3.71 पर्सेट तक टूट गया है। दरअसल, जब कच्चे तेल के दाम गिरते हैं तो इन कंपनियों को मिलने वाला रेवेन्यू और नेट प्रॉफिट कम हो जाता है क्योंकि इनके तेल की कीमत बाजार के हिसाब से घट जाती है। कम कीमतों का मतलब है कम मुनाफा, इसलिए निवेशक इन शेयरों से दूरी बना रहे हैं। गेल, पेट्रोनेट और महानगर गैस जैसी गैस कंपनियों के शेयर हालांकि आज अच्छी बढ़त के साथ ट्रेड कर रहे हैं।
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