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4 min read | अपडेटेड March 04, 2026, 14:08 IST
सारांश
Jindal Steel, NMDC और Hindustan Copper में भी 5 फीसदी तक की कमजोरी नजर आई। JSW Steel, Apl Apollo Tubes और Hindustan Zinc में भी 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी गई। रिपोर्ट लिखे जाने के समय इंडेक्स में शामिल 15 में से 14 शेयर लाल निशान पर ट्रेड कर रहे थे।
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टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू समेत कई शेयर लुढ़के, क्यों मेटल स्टॉक्स में दिखी गिरावट?
Nifty Metal: मेटल शेयरों में आज 04 मार्च को भारी बिकवाली देखने को मिल रही है। रिपोर्ट लिखे जाने के समय Nifty Metal इंडेक्स में 4.23 फीसदी की गिरावट है और यह 11,750.55 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। Tata Steel और JSW Steel जैसे शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट नजर आ रही है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान युद्ध की आशंकाओं ने ग्लोबल कमोडिटी मार्केट और निवेशकों के भरोसे को झकझोर दिया, जिससे मेटल सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर पड़ा।
Tata Steel और SAIL के शेयरों में आज 7 फीसदी से ज्यादा की गिरावट नजर आ रही है। इसके अलावा Jindal Steel, NMDC और Hindustan Copper में भी 5 फीसदी तक की कमजोरी नजर आई। JSW Steel, Apl Apollo Tubes और Hindustan Zinc में भी 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी गई। रिपोर्ट लिखे जाने के समय इंडेक्स में शामिल 15 में से 14 शेयर लाल निशान पर ट्रेड कर रहे थे। पूरे मेटल सेक्टर में दबाव बना दिख रहा है। कमजोर बाजार में निफ्टी मेटल इंडेक्स सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टोरल इंडेक्स बन गया।
दिलचस्प बात यह रही कि शेयरों में गिरावट के बावजूद ग्लोबल मार्केट में एल्युमिनियम की कीमतें तेज हो गईं। London Metal Exchange पर एल्युमिनियम के दाम इसलिए बढ़े क्योंकि कतर की कंपनी Qatalum ने गैस की कमी के चलते प्रोडक्शन रोक दिया और शिपमेंट पर फोर्स मेज्योर घोषित कर दिया। यह गैस संकट सीधे तौर पर ईरान संघर्ष से जुड़ा बताया गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक कतर की बड़ी एल्युमिनियम कंपनी Qatalum ने अपना प्रोडक्शन कंट्रोल्ड तरीके से बंद करना शुरू कर दिया है। कंपनी को गैस सप्लायर की ओर से संकेत मिला है कि गैस की सप्लाई रोकी जा सकती है, जिसके चलते यह फैसला लिया गया।
Qatalum ने ग्राहकों को फोर्स मेज्योर नोटिस भी जारी किया है। कंपनी का कहना है कि अगर हालात जल्दी नहीं सुधरे तो पूरा प्रोडक्शन दोबारा शुरू होने में 6 से 12 महीने या उससे ज्यादा समय लग सकता है। इसका सीधा असर ग्लोबल एल्युमिनियम सप्लाई पर पड़ेगा, क्योंकि इतनी बड़ी क्षमता का अचानक बंद होना बाजार में कमी पैदा करता है।
ट्रेडर्स के मुताबिक, युद्ध के चलते Strait of Hormuz से गुजरने वाली एल्युमिनियम सप्लाई चेन पर बड़ा खतरा पैदा हो गया है। बहरीन, कतर, सऊदी अरब और यूएई जैसे देश मिलकर दुनिया के 8% से ज्यादा एल्युमिनियम का उत्पादन करते हैं और हर साल 50 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा एल्युमिनियम इसी रास्ते से भेजा जाता है।
एल्युमिनियम के दाम बढ़ने और मेटल शेयरों के गिरने का यह विरोधाभास दिखाता है कि शेयर बाजार में फिलहाल “रिस्क-ऑफ” माहौल है। दोपहर तक Sensex 1,450 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty 50 में करीब 2% की गिरावट रही। पूरे बाजार में 3,000 से ज्यादा शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
भारत के एल्युमिनियम बाजार की बात करें तो भारत ग्लोबल एल्युमिनियम इंडस्ट्री का एक अहम खिलाड़ी है। देश में प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता और इंडस्ट्रियल ग्रोथ की वजह से एल्युमिनियम का उत्पादन और खपत तेजी से बढ़ी है। हल्का वजन, जंग न लगना और बार-बार रीसायकल होने की क्षमता के कारण एल्युमिनियम को अक्सर “भविष्य की धातु” कहा जाता है।
एल्युमिनियम का इस्तेमाल ऑटोमोबाइल, कंस्ट्रक्शन, पैकेजिंग और इलेक्ट्रिकल जैसे कई सेक्टरों में होता है। दुनिया भर में सस्टेनेबिलिटी और हल्के मटेरियल की मांग बढ़ने से एल्युमिनियम की खपत लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एल्युमिनियम उत्पादक होने के नाते भारत इस बढ़ती मांग को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।
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