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Nifty Auto में कोरोना काल जैसी गिरावट, 5 दिन में 10% से ज्यादा टूटा, आखिर क्या है वजह?

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड March 13, 2026, 13:13 IST

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सारांश

Nifty Auto: ऑटो शेयरों में लगातार हो रही बिकवाली की एक बड़ी वजह पश्चिम एशिया में चल रही जंग है। ब्रोकरेज फर्म JPMorgan का कहना है कि एक तरफ कच्चे माल की कीमतें बढ़ रही हैं जिससे कंपनियों की लागत बढ़ेगी, और दूसरी तरफ सप्लाई चेन और उत्पादन में रुकावट का खतरा भी बढ़ रहा है।

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Nifty Auto

Nifty Auto: इसके पहले कोरोना काल यानी मार्च 2020 में इतनी बड़ी गिरावट देखी गई थी।

Nifty Auto: अमेरिका-इजरायल और ईरान वॉर के बीच यह हफ्ता ऑटो सेक्टर के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। पिछले 5 कारोबारी दिनों में Nifty Auto इंडेक्स 10 फीसदी से ज्यादा लुढ़क चुका है। आज 13 मार्च को यह इंडेक्स 3.23 फीसदी टूटकर 24,280.40 के स्तर पर आ गया है। हफ्ते की शुरुआत में निफ्टी ऑटो इंडेक्स करीब 27076 के स्तर पर था। इसके पहले कोरोना काल यानी मार्च 2020 में इतनी बड़ी गिरावट देखी गई थी।
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आज इन शेयरों में गिरावट

आज रिपोर्ट लिखे जाने के समय Nifty Auto इंडेक्स के सभी शेयर लाल निशान पर ट्रेड कर रहे थे। सबसे ज्यादा बिकवाली Bharat Forge और UNO Minda में रही और ये दोनों 5 फीसदी से ज्यादा टूट गए।

इसके अलावा Ashok Leyland, Samvardhana Motherson और TMPV में 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी गई। Eicher Motors, Hero Motocorp, Exide Industries और Tube Investments of India के शेयर भी 3 फीसदी से ज्यादा लुढ़क गए।

क्या है ऑटो स्टॉक्स में बिकवाली की वजह

ऑटो शेयरों में लगातार हो रही बिकवाली की एक बड़ी वजह पश्चिम एशिया में चल रही जंग है। ब्रोकरेज फर्म JPMorgan का कहना है कि एक तरफ कच्चे माल की कीमतें बढ़ रही हैं जिससे कंपनियों की लागत बढ़ेगी, और दूसरी तरफ सप्लाई चेन और उत्पादन में रुकावट का खतरा भी बढ़ रहा है।

जेपी मॉर्गन ने कुछ बड़े जोखिम भी गिनाए हैं। सबसे बड़ा खतरा गैस की कमी का है। अगर LNG और LPG की सप्लाई कम हो जाती है, तो कई ऑटो कंपनियों और उनके सप्लायरों के प्लांट में प्रोडक्शन रुक सकता है या धीमा पड़ सकता है। क्योंकि ऑटो इंडस्ट्री में मेटल कास्टिंग और फोर्जिंग जैसे कामों में हीट ट्रीटमेंट के लिए गैस का काफी इस्तेमाल होता है।

दूसरा खतरा CNG से जुड़ा है। अगर पेट्रोल पंपों पर CNG की उपलब्धता प्रभावित होती है, तो ग्राहकों की पसंद भी बदल सकती है। पिछले कुछ सालों में CNG गाड़ियों की मांग तेजी से बढ़ी है, इसलिए अगर CNG की सप्लाई में समस्या आती है तो बिक्री पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा ईंधन और कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से ऑटो कंपनियों का मुनाफा भी दबाव में आ सकता है।

अगर अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों में रुकावट आती है, तो ऑटो कंपनियों के एक्सपोर्ट पर असर पड़ सकता है। इससे विदेशों में भेजे जाने वाले वाहनों और ऑटो पार्ट्स की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

मार्च में अब तक रिटेल बिक्री मजबूत

हालांकि इन जोखिमों के बावजूद जेपी मॉर्गन का कहना है कि मार्च में अब तक रिटेल बिक्री मजबूत बनी हुई है। ब्रोकरेज को सेक्टर के अंदर कुछ कंपनियों में बेहतर ग्रोथ की संभावना दिखती है। इसलिए उसने Maruti Suzuki India, Mahindra & Mahindra और Hero MotoCorp को अपनी पसंदीदा कंपनियों में रखा है, क्योंकि इनमें ग्रोथ की संभावना और वैल्यूएशन दोनों बेहतर दिखते हैं।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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