return to news
  1. निफ्टी 50 के नतीजों ने बढ़ाई चिंता, मुनाफे की रफ्तार पर लगी लगाम, समझें इसके मायने

मार्केट न्यूज़

निफ्टी 50 के नतीजों ने बढ़ाई चिंता, मुनाफे की रफ्तार पर लगी लगाम, समझें इसके मायने

Upstox

3 min read | अपडेटेड November 25, 2025, 11:33 IST

Twitter Page
Linkedin Page
Whatsapp Page

सारांश

सितंबर 2025 की तिमाही के नतीजे बताते हैं कि बड़ी कंपनियों पर आर्थिक दबाव ज्यादा है। निफ्टी 50 कंपनियों का शुद्ध मुनाफा जहां नाममात्र बढ़ा है, वहीं सभी लिस्टेड कंपनियों का कुल मुनाफा 10.8 फीसदी बढ़ा है। बिक्री के आंकड़ों में भी सुस्ती नजर आ रही है। यह रिपोर्ट बताती है कि अनिश्चित माहौल का असर दिग्गज कंपनियों पर ज्यादा हो रहा है।

nifty-50-companies-profit-growth-slows

निफ्टी 50 कंपनियों के तिमाही नतीजों में गिरावट से बाजार के जानकारों में चिंता। Image: Shutterstock

Nifty 50 Results: भारतीय शेयर बाजार और कॉर्पोरेट जगत के लिए सितंबर तिमाही के नतीजे काफी चौंकाने वाले रहे हैं। देश की आर्थिक स्थिति को दिखाने वाली बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन में भारी सुस्ती देखने को मिली है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, कॉर्पोरेट इंडिया की कमाई और विकास की गाड़ी थोड़ी धीमी पड़ती नजर आ रही है। इसका सबसे ज्यादा असर उन कंपनियों पर हुआ है जो बाजार की दिग्गज मानी जाती हैं और लार्ज कैप कैटेगरी में आती हैं। निफ्टी 50 इंडेक्स, जो देश की टॉप-50 कंपनियों का समूह है, उसके नतीजों ने निवेशकों और बाजार विश्लेषकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

मुनाफे की रफ्तार पर लगी लगाम

सितंबर 2025 की तिमाही के दौरान निफ्टी 50 कंपनियों के मुनाफे में जो बढ़ोतरी हुई है, वह बेहद मामूली है। आंकड़ों पर गौर करें तो इन कंपनियों का संयुक्त शुद्ध मुनाफा पिछले साल के मुकाबले केवल 1.2 फीसदी ही बढ़ा है। यह आंकड़ा इसलिए भी चिंताजनक है, क्योंकि यह पिछले 12 तिमाहियों यानी तीन साल में मुनाफे की सबसे धीमी रफ्तार है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इस मुनाफे में किसी भी तरह के असाधारण लाभ या हानि को शामिल नहीं किया गया है, यानी यह कंपनियों का शुद्ध कामकाज से हुआ मुनाफा है। यह सुस्ती बताती है कि बड़ी कंपनियों के लिए पिछला कुछ समय काफी चुनौतीपूर्ण रहा है।

छोटी और मझोली कंपनियों ने संभाला मोर्चा

जहां एक तरफ निफ्टी 50 की दिग्गज कंपनियां संघर्ष करती नजर आ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ व्यापक बाजार की तस्वीर थोड़ी अलग और सकारात्मक है। अगर शेयर बाजार में लिस्टेड सभी कंपनियों के प्रदर्शन को एक साथ देखा जाए, तो स्थिति बेहतर नजर आती है। बीएस की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में सभी लिस्टेड कंपनियों का संयुक्त शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 10.8 फीसदी बढ़ा है। यह पिछले छह तिमाहियों में सबसे तेज बढ़ोतरी है। इसका मतलब यह हुआ कि निफ्टी 50 से बाहर की कंपनियां, जो शायद मिडकैप या स्मॉलकैप कैटेगरी में आती हैं, उन्होंने दिग्गज कंपनियों के मुकाबले कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है।

बिक्री के आंकड़ों में भी सुस्ती

सिर्फ मुनाफे में ही नहीं, बल्कि बिक्री यानी सेल्स के मोर्चे पर भी बड़ी कंपनियों का प्रदर्शन औसत ही रहा है। निफ्टी 50 कंपनियों की संयुक्त शुद्ध बिक्री में सालाना आधार पर 6.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए इसमें सकल ब्याज आय को शामिल किया गया है। अगर बाजार की कुल बिक्री में हुई बढ़ोतरी से इसकी तुलना करें, तो यह आंकड़ा काफी मामूली लगता है। इससे पता चलता है कि बड़ी कंपनियों के उत्पादों या सेवाओं की मांग में वह तेजी नहीं है जिसकी उम्मीद की जा रही थी।

इस रिपोर्ट से एक और अहम बात निकलकर सामने आई है। वह यह कि आर्थिक अनिश्चितता के माहौल में बड़ी और फ्रंटलाइन कंपनियां ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। कॉर्पोरेट इंडिया के ग्रोथ साइकिल में आई यह सुस्ती दिखाती है कि लार्ज कैप कंपनियां आर्थिक उतार-चढाव के प्रति ज्यादा संवेदनशील हैं। छोटे खिलाड़ी शायद इस दौर में खुद को बेहतर तरीके से संभालने में कामयाब रहे हैं, लेकिन बाजार का नेतृत्व करने वाली कंपनियों के लिए यह समय संभलकर चलने का है। कुल मिलाकर, यह तिमाही बड़े खिलाड़ियों के लिए चेतावनी की घंटी है कि उन्हें अपनी रणनीतियों पर फिर से विचार करने की जरूरत है।

SIP
टाइमिंग पर भारी पड़ती है निरंतरता
promotion image

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

अगला लेख