मार्केट न्यूज़

4 min read | अपडेटेड February 13, 2026, 13:52 IST
सारांश
वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के नतीजों में नए जमाने की टेक कंपनियों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। जहां इटरनल (जोमैटो), पेटीएम और लेंसकार्ट ने मुनाफे में जबरदस्त सुधार दिखाया है, वहीं स्विगी अभी भी घाटे से उबरने के लिए संघर्ष कर रही है। इन कंपनियों के रेवेन्यू में शानदार बढ़त देखी गई है।
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भारतीय बाजार में अब पुराने बिजनेस के साथ-साथ नई कंपनियों का दबदबा बढ़ रहा है।
भारतीय कॉर्पोरेट जगत में अब पुराने और दिग्गज बिजनेस के साथ-साथ नए जमाने की कंपनियों की धमक भी साफ सुनाई दे रही है। वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही के नतीजे अब लगभग पूरे हो चुके हैं और इस बार निवेशकों की पैनी नजर उन कंपनियों पर थी जिन्होंने हाल के वर्षों में डिजिटल दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। रिलायंस और HDFC बैंक जैसे बड़े नामों के बीच अब इटरनल, स्विगी, पेटीएम और लेंसकार्ट जैसी कंपनियों के आंकड़े बाजार की दिशा तय कर रहे हैं। इस तिमाही में ज्यादातर नई कंपनियों ने मुनाफे के मोर्चे पर शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन स्विगी का बढ़ता घाटा अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
देश के सबसे बड़े फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट की मालिक कंपनी इटरनल ने इस तिमाही में कमाल कर दिया है। कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 190 पर्सेंट बढ़कर 16,692 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। कंपनी के नेट प्रॉफिट में भी 73 पर्सेंट की शानदार बढ़त देखी गई है और यह 102 करोड़ रुपये रहा है। इस ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह क्विक कॉमर्स बिजनेस मॉडल में किया गया बदलाव है। कंपनी का क्विक कॉमर्स और हाइपरप्योर बिजनेस अब एबिटा (EBITDA) पॉजिटिव हो गया है, जो फ्यूचर के लिए एक बहुत अच्छा संकेत है। कंपनी का लक्ष्य अब क्विक कॉमर्स सेगमेंट को फूड डिलीवरी से भी बड़ा बनाने का है।
जहां एक तरफ इटरनल मुनाफे की नई ऊंचाइयां छू रही है, वहीं उसकी सबसे बड़ी कंपटीटर स्विगी के लिए यह तिमाही कुछ खास नहीं रही। स्विगी ने इस तिमाही में 721 करोड़ रुपये का नेट घाटा दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 221 करोड़ रुपये था। हालांकि कंपनी का रेवेन्यू 50 पर्सेंट बढ़कर 6,431 करोड़ रुपये रहा और उसके क्विक कॉमर्स सेगमेंट में भी 103 पर्सेंट की बढ़त देखी गई, लेकिन बढ़ते खर्चों ने मुनाफे पर पानी फेर दिया। कंपनी का ऑपरेशनल लॉस भी 59 करोड़ से बढ़कर 908 करोड़ रुपये हो गया है, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।
पेटीएम चलाने वाली कंपनी वन 97 कम्युनिकेशंस ने इस तिमाही में जबरदस्त वापसी की है। पिछले साल के 208 करोड़ रुपये के घाटे के मुकाबले कंपनी ने इस बार 225 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट कमाया है। कंपनी का रेवेन्यू भी 20 पर्सेंट बढ़कर 2,194 करोड़ रुपये हो गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि कंपनी अब ऑपरेशनल लेवल पर भी मजबूत हुई है और उसका एबिटा (EBITDA) लॉस अब मुनाफे में बदल गया है। पेटीएम ने साल की पहली तिमाही से ही जो सुधार की लहर शुरू की थी, उसे इस बार भी बरकरार रखा है।
चश्मा और आईवियर सेगमेंट की दिग्गज कंपनी लेंसकार्ट ने अपने फाइनेंशियल नतीजों से सबको हैरान कर दिया है। कंपनी के नेट प्रॉफिट में 70 गुना की भारी बढ़त देखी गई है और यह 131 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। रेवेन्यू में भी 38 पर्सेंट का उछाल आया है, जिसकी मुख्य वजह ग्राहकों की संख्या में हुई 40 पर्सेंट की बढ़ोतरी है। दूसरी ओर, फिनटेक फर्म मोबिक्विक ने भी 4 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट कमाया है, जबकि पिछले साल उसे 55 करोड़ का घाटा हुआ था। मोबिक्विक ने यूपीआई ट्रांजैक्शन के मामले में इंडस्ट्री से कहीं ज्यादा 220 पर्सेंट की ग्रोथ दिखाई है, जो उसकी बढ़ती पहुंच को दिखाता है।
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