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Larsen & Toubro का शेयर 2 दिन में 12% तक लुढ़का, मिडिल -ईस्ट में तनाव ने बढ़ाई बिकवाली

Shubham Singh Thakur

4 min read | अपडेटेड March 04, 2026, 12:46 IST

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सारांश

इस गिरावट से कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹70,000 करोड़ घटकर ₹5.19 लाख करोड़ रह गया। L&T पर दबाव इसलिए बढ़ा क्योंकि मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव फिर तेज हो गया है।

L&T शेयर

Larsen & Toubro का शेयर 2 दिन में 12% तक लुढ़का

Larsen & Toubro (L&T) के शेयरों में आज 4 मार्च को लगातार दूसरे दिन तेज गिरावट देखने को मिली। इस समय यह शेयर करीब 6 फीसदी टूटकर 3827.80 रुपये प्रति शेयर के भाव पर ट्रेड कर रहा है। पिछले दो कारोबारी दिनों में यह शेयर करीब 11.73% तक गिर चुका है। इस गिरावट से कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹70,000 करोड़ घटकर ₹5.19 लाख करोड़ रह गया। L&T पर दबाव इसलिए बढ़ा क्योंकि मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव फिर तेज हो गया है।

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United States और Israel के ईरान पर हमले के बाद Iran ने खाड़ी क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई की। L&T का खाड़ी और मिडिल ईस्ट में बड़ा बिजनेस एक्सपोजर है, इसलिए निवेशक जोखिम को लेकर सतर्क हो गए। ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक Macquarie ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि तीसरी तिमाही के अंत तक L&T के ऑर्डर बुक का करीब 37% हिस्सा सीधे मिडिल ईस्ट से आया था। इसके अलावा, मौजूदा वित्त वर्ष के पहले 9 महीनों में कंपनी के कुल ऑर्डर इनटेक का लगभग 33% भी इसी क्षेत्र से रहा है।

क्या है एक्सर्ट्स की राय

Macquarie के मुताबिक, L&T के खाड़ी क्षेत्र के कई प्रोजेक्ट्स फिक्स्ड-प्राइस कॉन्ट्रैक्ट्स पर आधारित हैं। ऐसे में अगर क्षेत्र में तनाव बढ़ता है और कमोडिटी कीमतें ऊपर जाती हैं, तो लागत बढ़ने का खतरा रहता है, जिससे एग्जीक्यूशन मार्जिन पर दबाव आ सकता है। हालांकि, इस समय सटीक असर का आकलन करना मुश्किल बताया गया है।

ब्रोकरेज CLSA का कहना है कि अगर मार्च महीने भर के लिए Strait of Hormuz बंद हो जाता है, तो L&T के कंसोलिडेटेड EPS पर करीब 1.8% का नकारात्मक असर पड़ सकता है। यह दिखाता है कि कंपनी की कमाई मिडिल ईस्ट की स्थिति के प्रति कितनी संवेदनशील है।

हालांकि, CLSA का यह भी मानना है कि मौजूदा स्तर पर L&T सबसे सस्ता लार्ज-कैप इंडस्ट्रियल स्टॉक है। ब्रोकरेज के मुताबिक, शेयर में कमजोरी स्ट्रक्चरल खराबी की वजह से नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट से जुड़े साइक्लिकल जोखिमों के कारण है।

Q3FY26 में ऑर्डर इनफ्लो 18% बढ़ा

CLSA ने यह भी कहा कि L&T ने पहले भी संकटों से उबरने के लिए अपनी भौगोलिक रणनीति बदली है। कभी भारतीय सरकारी कैपेक्स, फिर मिडिल ईस्ट, उसके बाद यूरोप और अब भारत के प्राइवेट सेक्टर कैपेक्स पर फोकस करके कंपनी आगे बढ़ी है। इसी रणनीति की वजह से Q3FY26 में ऑर्डर इनफ्लो 18% सालाना बढ़ा, जबकि मिडिल ईस्ट से नए ऑर्डर इस दौरान 70% घट गए थे।

फिलहाल L&T का कंसोलिडेटेड ऑर्डर बैकलॉग करीब 81 अरब डॉलर का है, जो सालाना आधार पर 30% ज्यादा है। इससे कंपनी को आगे के समय के लिए अच्छी विजिबिलिटी मिलती है। CLSA को उम्मीद है कि आने वाले समय में घरेलू प्रोजेक्ट्स का एग्जीक्यूशन बेहतर होगा, खासकर जब ज्यादा बारिश का असर कम होगा।

L&T के Q3 नतीजे

Q3 नतीजों की बात करें तो जनवरी में L&T ने बताया कि दिसंबर 2025 को खत्म तिमाही में उसका कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 4.29% घटकर ₹3,926 करोड़ रहा। हालांकि, इस तिमाही के कुल PAT में ₹1,191 करोड़ का एकमुश्त प्रावधान शामिल है, जो नए लेबर कोड लागू होने से जुड़े कर्मचारी लाभों के लिए किया गया था और इसे एक्सेप्शनल आइटम के तहत दिखाया गया।

कंपनी की ऑपरेशंस से रेवेन्यू इस तिमाही में ₹71,450 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के ₹64,668 करोड़ से 10.49% ज्यादा है। यह बढ़ोतरी प्रोजेक्ट्स और मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस में बेहतर एग्जीक्यूशन की वजह से हुई। अंतरराष्ट्रीय रेवेन्यू ₹38,775 करोड़ रहा, जो कुल रेवेन्यू का करीब 54% है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
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लेखकों के बारे में

Shubham Singh Thakur
Shubham Singh Thakur is a business journalist with a focus on stock market and personal finance. An alumnus of the Indian Institute of Mass Communication (IIMC), he is passionate about making financial topics accessible and relevant for everyday readers.

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