मार्केट न्यूज़
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3 min read | अपडेटेड January 19, 2026, 15:24 IST
सारांश
भारतीय रेलवे वित्त निगम (IRFC) ने सोमवार को अपनी तीसरी तिमाही के नतीजों का एलान किया है। कंपनी ने अब तक का सबसे अधिक 1,802 करोड़ रुपये का तिमाही शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है। खास बात यह है कि कंपनी ने पूरे साल के लिए तय 60,000 करोड़ रुपये के सैंक्शन लक्ष्य को महज नौ महीनों में ही हासिल कर लिया है।
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आईआरएफसी के मुनाफे में सालाना आधार पर 10.5 प्रतिशत की बढोतरी हुई है।
भारतीय रेलवे की वित्तीय रीढ़ कही जाने वाली कंपनी इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) ने सोमवार को अपने तीसरी तिमाही के नतीजों के साथ बाजार को चौंका दिया है। कंपनी ने जानकारी दी है कि उसने पूरे वित्त वर्ष के लिए तय किया गया 60,000 करोड़ रुपये का सैंक्शन टारगेट वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में ही पूरा कर लिया है। मुनाफे के मोर्चे पर भी कंपनी ने एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। अक्टूबर से दिसंबर की अवधि में कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 10.5 प्रतिशत बढकर 1,802 करोड़ रुपये रहा है, जो कंपनी के इतिहास में अब तक का सबसे अधिक तिमाही मुनाफा है।
तिमाही के दौरान कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल के 6,763 करोड़ रुपये के मुकाबले 1.5 प्रतिशत घटकर 6,661 करोड़ रुपये रहा है। रेवेन्यू में इस मामूली कमी का कारण रेल मंत्रालय द्वारा एक प्रोजेक्ट लीज एग्रीमेंट के लिए मोरेटोरियम (भुगतान पर रोक) की अवधि को एक साल के लिए बढाना है। इस वजह से उस अवधि के दौरान रेवेन्यू की गणना पर असर पडा है। हालांकि, कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज कुमार दुबे ने भरोसा जताया है कि इसका असर अस्थायी है और आने वाले समय में कंपनी की वित्तीय स्थिति और मजबूत होगी।
आईआरएफसी के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि इसकी संपत्तियों में हुई बढोतरी है। रेलवे की ओर से कोई नया बड़ा बिजनेस न मिलने के बावजूद कंपनी की 'एसेट अंडर मैनेजमेंट' (एयूएम) बढकर 4.75 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। सबसे सुखद बात यह है कि कंपनी ने अपना 'जीरो एनपीए' का दर्जा बरकरार रखा है, जो इसकी बेहतरीन कर्ज वसूली और प्रबंधन प्रणाली को दर्शाता है। कंपनी के सीएमडी के अनुसार, इस साल के लिए तय 30,000 करोड़ रुपये के डिस्बर्समेंट (कर्ज वितरण) लक्ष्य का तीन-चौथाई हिस्सा दिसंबर अंत तक वितरित किया जा चुका है।
आने वाले समय के लिए आईआरएफसी ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करने के संकेत दिए हैं। कंपनी अब केवल रेलवे तक सीमित न रहकर मेट्रो रेल, रिन्यूएबल एनर्जी (अक्षय ऊर्जा), लॉजिस्टिक्स और पोर्ट जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार करने की योजना बना रही है। इसके लिए कंपनी बहुपक्षीय एजेंसियों के साथ को-फाइनेंसिंग और रेल से जुडे प्रोजेक्ट्स की रीफाइनेंसिंग के विकल्पों पर भी विचार कर रही है। मोरेटोरियम अवधि खत्म होने के बाद नए प्रोजेक्ट समझौतों का सकारात्मक असर अगले वित्त वर्ष से कंपनी की बैलेंस शीट पर दिखने लगेगा।
आज नतीजों के एलान के बाद आईआरएफसी के शेयरों में शुरुआती गिरावट के बाद रिकवरी देखी गई। फिलहाल यह शेयर 121.11 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है। यह अपने लिस्टिंग के बाद के उच्चतम स्तर 229 रुपये से करीब 50 प्रतिशत नीचे आ चुका है। सरकारी हिस्सेदारी 86 प्रतिशत होने के कारण इस शेयर में 'लो फ्री फ्लोट' की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि सेबी के नियमों के अनुसार प्रमोटर की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। ऐसे में आने वाले समय में सरकार द्वारा कुछ हिस्सेदारी बेचे जाने की संभावना भी बाजार में चर्चा का विषय बनी रहती है।
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