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IDFC First Bank फ्रॉड पर एमडी की सफाई, निवेशकों को पता होनी चाहिए ये अहम बातें

Upstox

4 min read | अपडेटेड February 23, 2026, 13:12 IST

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सारांश

IDFC First Bank के एमडी वी वैद्यनाथन ने 590 करोड़ रुपये के फ्रॉड पर सफाई देते हुए कहा है कि यह बैंक कर्मचारियों और बाहरी लोगों की मिलीभगत का नतीजा है। बैंक ने इसके लिए जरूरी कदम उठाए हैं और नेट प्रॉफिट पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, बाजार खुलते ही शेयरों में 15 पर्सेंट से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है।

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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के एमडी वी वैद्यनाथन ने 590 करोड़ रुपये के फ्रॉड पर सफाई दी है।

IDFC First Bank में सामने आए 590 करोड़ रुपये के फ्रॉड मामले ने सोमवार को बाजार में हड़कंप मचा दिया है। बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव वी वैद्यनाथन ने सोमवार को निवेशकों और एनालिस्ट्स के साथ एक खास कॉल के दौरान इस पूरे मामले पर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह धोखाधड़ी बैंक के कर्मचारियों और कुछ बाहरी लोगों के बीच हुई मिलीभगत का परिणाम है। बाजार खुलने से पहले की गई इस कॉल में उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि बैंक इस स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और इसके लिए जरूरी प्रोविजंस किए जा रहे हैं। हालांकि, इस खबर का असर बैंक के शेयरों पर साफ दिखा और बीएसई पर शेयर करीब 15.58 पर्सेंट गिरकर 7,054 रुपये के स्तर पर आ गए।

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धोखाधड़ी की असली वजह और मिलीभगत

वैद्यनाथन ने बताया कि यह पूरा मामला फिजिकल चेक के जरिए किए गए फर्जी ट्रांजेक्शन से जुड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई सिस्टम रिपोर्टिंग एरर यानी सॉफ्टवेयर की गलती नहीं है, बल्कि कर्मचारियों और बाहरी पार्टियों ने मिलकर जाली चेक का इस्तेमाल किया है। यह गड़बड़ी सिर्फ एक ही ब्रांच और एक ही क्लाइंट ग्रुप तक सीमित पाई गई है, जो हरियाणा सरकार से संबंधित है। बैंक ने अब तक कुल 590 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का आकलन किया है। इसमें से 490 करोड़ रुपये शुरुआती मिलान के दौरान मिले थे, जबकि बाकी 100 करोड़ रुपये की पहचान बैंक ने अपनी इंटरनल जांच के जरिए खुद की है। एमडी का मानना है कि यह आंकड़ा अब इससे ज्यादा बढ़ने की उम्मीद नहीं है।

नेट प्रॉफिट पर असर और रिकवरी का प्लान

निवेशकों की चिंता को दूर करते हुए वैद्यनाथन ने कहा कि इस फ्रॉड का बैंक के नेट प्रॉफिट पर कोई बहुत बड़ा असर होने की संभावना नहीं है। उन्होंने बताया कि बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन और कम क्रेडिट कॉस्ट इस नुकसान की भरपाई करने में मदद करेंगे। स्टैंडअलोन आधार पर बैंक को चौथे क्वार्टर में बहुत ठोस मुनाफे की उम्मीद थी। इसके अलावा, बैंक के पास 35 करोड़ रुपये का कर्मचारी बेईमानी इंश्योरेंस कवर भी है, जो इस वित्तीय नुकसान के प्रभाव को थोड़ा कम करेगा। बैंक ने रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर दी है और बैंकिंग सिस्टम में लीन-मार्किंग जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं।

हरियाणा सरकार का कड़ा रुख

इस घटना के बाद हरियाणा सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी बिजनेस के लिए अपनी लिस्ट से हटा दिया है। हालांकि, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने किसी भी तरह की गड़बड़ी में शामिल होने से इनकार किया है। वैद्यनाथन ने जानकारी दी कि बैंक ने रविवार को ही जाने-माने एडवाइजरी फर्म केपीएमजी (KPMG) को इंडिपेंडेंट फोरेंसिक ऑडिट के लिए नियुक्त किया है। यह जांच प्रक्रिया करीब 4 से 5 हफ्तों में पूरी होने की उम्मीद है। बैंक ने इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी है और रेगुलेटर्स के साथ-साथ ऑडिटर्स को भी पूरी जानकारी दे दी है।

बैंक के कामकाज पर इसके असर को समझाते हुए एमडी ने बताया कि हरियाणा सरकार का डिपॉजिट बैंक के कुल डिपॉजिट का मात्र 0.5 पर्सेंट है। वहीं, केंद्र और राज्य सरकारों का कुल डिपॉजिट बैंक के कुल डिपॉजिट बेस का करीब 8 से 10 पर्सेंट हिस्सा है। पिछले साल के आंकड़े देखे जाएं तो दिसंबर 2025 को खत्म हुए क्वार्टर में बैंक के डिपॉजिट में 24 पर्सेंट का उछाल आया था और नेट प्रॉफिट 48 पर्सेंट बढ़कर 503 करोड़ रुपये रहा था। बैंक की ग्रोथ प्रोफाइल अभी भी मजबूत बनी हुई है और वे किसी भी तनाव को शुरुआत में ही पहचानने की अपनी पॉलिसी पर काम कर रहे हैं।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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