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  1. इस महीने अब तक विदेशी निवेशकों ने निकाले ₹11,800 करोड़, समझिए आखिर क्यों भारत से मुंह मोड़ रहे हैं FIIs?

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इस महीने अब तक विदेशी निवेशकों ने निकाले ₹11,800 करोड़, समझिए आखिर क्यों भारत से मुंह मोड़ रहे हैं FIIs?

Upstox

3 min read | अपडेटेड January 11, 2026, 11:21 IST

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सारांश

नए साल की शुरुआत में भी विदेशी निवेशकों का भारतीय शेयर बाजार से मोहभंग जारी है। जनवरी के पहले दो हफ्तों में ही करोड़ों रुपये की बिकवाली हो चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ संबंधी धमकियों और वैश्विक तनाव के कारण निवेशक सहमे हुए हैं, जिसका असर बाजार पर साफ दिख रहा है।

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भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली से निवेशकों के बीच हलचल तेज।

भारतीय शेयर बाजार के लिए साल 2026 की शुरुआत भी बिकवाली के साये में हुई है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने जनवरी के शुरुआती सात सेशन में से पांच में बाजार से जमकर पैसा निकाला है। आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में हुई 166,286 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक निकासी के बाद इस साल के पहले कुछ दिनों में ही निवेशकों ने 11,789 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं। इस बिकवाली का सबसे बड़ा असर निफ्टी 50 इंडेक्स पर पड़ा है, जो जनवरी में अब तक 1.71% नीचे गिर चुका है। बाजार के जानकारों का मानना है कि विदेशी निवेशकों का यह रुख आने वाले दिनों में भारतीय बाजार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

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क्या है कारण?

विदेशी निवेशकों की इस बेरुखी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई व्यापारिक नीतियां हैं। ट्रंप ने हाल ही में भारत को चेतावनी दी है कि अगर उसने रूस से तेल खरीदना बंद नहीं किया, तो भारतीय उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाया जाएगा। अमेरिका में एक ऐसा बिल पेश किया गया है जिसमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक का टैक्स लगाने का प्रावधान है। वर्तमान में अमेरिका ने भारत पर 25% का बेस टैरिफ और 25% का अतिरिक्त टैरिफ पहले ही लगा दिया है। अमेरिका का मानना है कि रूस से तेल खरीदकर भारत परोक्ष रूप से युद्ध में मदद कर रहा है। इन व्यापारिक अड़चनों की वजह से भारत और अमेरिका के बीच होने वाले व्यापारिक समझौते लटक गए हैं, जिससे निवेशकों में घबराहट है।

डॉलर की मजबूती भी बढ़ा रही टेंशन

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर की मजबूती और रुपये में उतार-चढ़ाव भी विदेशी निवेशकों को भारत से दूर कर रहा है। साल 2025 में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 5% तक कमजोर हुआ था। जब रुपया गिरता है, तो विदेशी निवेशकों का वास्तविक मुनाफा कम हो जाता है। इसके अलावा वेनेजुएला में अमेरिका की हालिया सैन्य कार्यवाही ने भी वैश्विक स्तर पर जोखिम बढ़ा दिया है। ऐसी स्थिति में निवेशक उभरते हुए बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित माने जाने वाले अमेरिकी ट्रेजरी बांड में लगा रहे हैं। जब तक वैश्विक स्तर पर शांति और मुद्रा में स्थिरता नहीं आती, तब तक विदेशी निवेशकों की वापसी मुश्किल नजर आ रही है।

वापस आने की है कोई गुंजाइश?

बाजार के लिए राहत की बात यह है कि घरेलू आर्थिक स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अक्टूबर से दिसंबर तिमाही के नतीजे बेहतर रहते हैं, तो विदेशी निवेशक दोबारा भारत का रुख कर सकते हैं। अनुमान है कि इस तिमाही में कंपनियों की कमाई 16% की दर से बढ़ सकती है, जो पिछले दो सालों में सबसे अच्छी होगी। साथ ही अगर आगामी बजट 2026 में सरकार कोई सकारात्मक घोषणा करती है या अमेरिका के साथ व्यापारिक बातचीत में कोई सुधार होता है, तो बाजार में फिर से तेजी लौट सकती है। फिलहाल निवेशकों की नजरें भारतीय रिजर्व बैंक के कदमों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर टिकी हुई हैं।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
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टाइमिंग पर भारी पड़ती है निरंतरता
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लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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