मार्केट न्यूज़
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3 min read | अपडेटेड February 15, 2026, 17:49 IST
सारांश
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने फरवरी की शुरुआत में भारतीय बाजार में जबरदस्त वापसी की है। लगातार तीन महीनों की भारी बिकवाली के बाद, फरवरी के पहले पखवाड़े में इन्होंने 19,675 करोड़ रुपये का निवेश किया। अमेरिका-भारत व्यापार समझौते और बेहतर ग्लोबल संकेतों ने विदेशी निवेशकों का भरोसा फिर से भारत पर बढ़ाया है।

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी से निवेशकों का उत्साह बढ़ा।
भारतीय शेयर बाजार के लिए फरवरी का महीना एक नई उम्मीद लेकर आया है। पिछले काफी समय से बाजार से दूरी बनाए रखने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI ने अब अपना मूड बदल लिया है। फरवरी के पहले दो हफ्तों में ही इन विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब 19,675 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश किया है। यह बदलाव इसलिए भी खास है क्योंकि पिछले तीन महीनों से ये निवेशक लगातार बाजार में बिकवाली कर रहे थे और अपना पैसा बाहर निकाल रहे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और भारत के बीच हुए नए व्यापार समझौते और ग्लोबल लेवल पर कम होती आर्थिक चिंताओं ने विदेशी निवेशकों को फिर से भारत की ओर खींचने का काम किया है।
विदेशी निवेशकों की यह वापसी एक बड़े अंतराल के बाद हुई है। अगर हम पिछले आंकड़ों पर नजर डालें, तो पता चलता है कि जनवरी के महीने में एफपीआई ने बाजार से 35,962 करोड़ रुपये निकाले थे। उससे पहले दिसंबर में 22,611 करोड़ रुपये और नवंबर में 3,765 करोड़ रुपये की बिकवाली की गई थी। पूरे साल 2025 की बात करें, तो विदेशी निवेशकों ने कुल 1.66 लाख करोड़ रुपये की नेट बिकवाली की थी, जो विदेशी फंड के लिए सबसे खराब दौर में से एक था। उस समय करेंसी में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी टैरिफ जैसी चिंताओं ने निवेशकों को डरा कर रखा था, लेकिन अब हालात सुधरते दिख रहे हैं।
मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के रिसर्च मैनेजर हिमांशु श्रीवास्तव के मुताबिक, ग्लोबल मार्केट में सुधार और अमेरिका में महंगाई के आंकड़े कम होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। इससे बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी डॉलर में स्थिरता आई है, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों में निवेश का जोखिम कम हुआ है। इसके अलावा घरेलू मोर्चे पर स्थिर महंगाई और कंपनियों के अच्छे नतीजों ने भी विदेशी निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि भारत की ग्रोथ की कहानी अभी लंबी चलने वाली है। एंजेल वन के एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि बजट 2026 में दिए गए वित्तीय प्रोत्साहन और स्टेबल घरेलू ब्याज दरों ने इस निवेश को बढ़ावा दिया है।
हालांकि सब कुछ अच्छा दिखने के बावजूद, 13 फरवरी तक के आंकड़ों ने थोड़ी चिंता जरूर पैदा की है। फरवरी के 11 कारोबारी दिनों में से 7 दिन विदेशी निवेशक खरीदार रहे, लेकिन 13 फरवरी को उन्होंने अचानक 7,395 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। इस भारी बिकवाली की वजह से ही फरवरी महीने का नेट आंकड़ा अब 1,374 करोड़ रुपये की बिकवाली दिखा रहा है। इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण आईटी सेक्टर में आया एंथ्रोपिक शॉक माना जा रहा है। पिछले हफ्ते आईटी इंडेक्स में 8.2 परसेंट की बड़ी गिरावट देखी गई और माना जा रहा है कि विदेशी निवेशकों ने बड़ी मात्रा में आईटी कंपनियों के शेयर कैश मार्केट में बेचे हैं।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वीके विजयकुमार का कहना है कि विदेशी निवेशकों ने आईटी शेयरों में काफी आक्रामक तरीके से बिकवाली की है। इसकी वजह से निफ्टी में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। जानकारों का मानना है कि आईटी सेक्टर में हुई यह बिकवाली एक अस्थायी असर हो सकती है। अगर ग्लोबल माहौल और भारत-अमेरिका के व्यापारिक रिश्ते इसी तरह मजबूत बने रहते हैं, तो आने वाले समय में विदेशी निवेशक फिर से खरीदारी शुरू कर सकते हैं। फिलहाल निवेशकों को बाजार के उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों के हर दिन के रुख पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है ताकि वे सही समय पर निवेश का फैसला ले सकें।
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