return to news
  1. फर्टिलाइजर सेक्टर पर युद्ध की मार, कतर से गैस सप्लाई रुकने से उत्पादन में कटौती, स्टॉक्स में दिखा एक्शन

मार्केट न्यूज़

फर्टिलाइजर सेक्टर पर युद्ध की मार, कतर से गैस सप्लाई रुकने से उत्पादन में कटौती, स्टॉक्स में दिखा एक्शन

विकास तिवारी

3 min read | अपडेटेड March 05, 2026, 11:03 IST

Twitter Page
Linkedin Page
Whatsapp Page

सारांश

ईरान-इजराइल युद्ध के चलते कतर से होने वाली एलएनजी (LNG) सप्लाई बाधित हो गई है। इसका सीधा असर भारत के फर्टिलाइजर सेक्टर पर पड़ रहा है क्योंकि खाद बनाने के लिए गैस मुख्य कच्चा माल है। सप्लाई रुकने से कई कंपनियों ने उत्पादन घटा दिया है, जिससे आज चंबल और आरसीएफ जैसे शेयरों में गिरावट दिख सकती है।

fertiliser-stocks-fall-qatar-

भारत अपनी जरूरत का करीब 40% एलएनजी कतर से मंगवाता है।

मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजराइल युद्ध का असर अब भारत के खेतों और खाद कारखानों तक पहुंच गया है। कतर से होने वाली लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई रुकने की वजह से देश के फर्टिलाइजर सेक्टर में हड़कंप मच गया है। आज यानी 5 मार्च को शेयर बाजार में चंबल फर्टिलाइजर्स, आरसीएफ और जीएनएफसी जैसी कंपनियों के शेयरों पर भारी दबाव देखने को मिल सकता है। असल में खाद बनाने की प्रक्रिया में एलएनजी सबसे जरूरी कच्चा माल है, जिसकी कमी होने पर इन कंपनियों के लिए उत्पादन जारी रखना नामुमकिन होता जा रहा है।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

कतर से सप्लाई रुकने का बड़ा झटका

भारत अपनी एलएनजी जरूरतों के लिए बहुत हद तक कतर पर निर्भर है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत के कुल एलएनजी इम्पोर्ट का लगभग 40 परसेंट हिस्सा अकेले कतर से आता है। मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध की वजह से कतर ने सप्लाई रोक दी है, जिसका सीधा असर भारतीय खाद उत्पादकों पर पड़ा है। गैस की कमी और इसकी कीमतों में भारी उछाल की वजह से फर्टिलाइजर कंपनियों को अपने ऑपरेशनल रेट कम करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। अगर यह रुकावट लंबे समय तक चलती है, तो कई कंपनियों को अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर ताला भी लगाना पड़ सकता है।

उत्पादन में कटौती और कंपनियों का हाल

ब्लूमबर्ग की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में खाद बनाने वाली कई कंपनियों ने पहले ही अपने उत्पादन में कटौती करना शुरू कर दिया है। कतर से सप्लाई सस्पेंड होने के बाद कुछ यूरिया प्लांट्स ने अपनी क्षमता से कम काम करना शुरू किया है। वर्तमान मार्केट डेटा के अनुसार, नेशनल फर्टिलाइजर (1.83%) और गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर्स (1.52%) जैसे कुछ शेयर कल मामूली बढ़त पर थे, लेकिन आज कतर से जुड़ी खबर के बाद इनमें बिकवाली हावी हो सकती है। चंबल फर्टिलाइजर्स (-0.78%) और राष्ट्रीय केमिकल्स (-0.92%) जैसे शेयरों में पहले से ही कमजोरी के संकेत मिल रहे हैं।

मार्केट इंडेक्स और सेक्टर पर दबाव

कल की मार्केट क्लोजिंग के वक्त भी लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में बंद हुए थे। निफ्टी मेटल में करीब 4 परसेंट और निफ्टी ऑटो में 2.44 परसेंट की भारी गिरावट दर्ज की गई थी। निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स भी 2.39 परसेंट टूटकर बंद हुआ था। ऐसे माहौल में फर्टिलाइजर सेक्टर से जुड़ी यह बुरी खबर निवेशकों का भरोसा और भी कम कर सकती है। पेट्रोनेट एलएनजी के शेयर में कल आई 9.12 परसेंट की गिरावट इस बात का सबूत है कि गैस सप्लाई से जुड़ी खबरें मार्केट को किस कदर प्रभावित कर रही हैं।

फ्यूचर और इकोनॉमी पर असर

ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में सप्लाई बाधित होने से खाद की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे आने वाले समय में खेती की लागत में इजाफा होगा। अगर यूरिया और अमोनिया का उत्पादन ठप होता है, तो इसका सीधा असर भारत की फूड सिक्योरिटी और ग्रामीण इकोनॉमी पर पड़ेगा। जानकारों का मानना है कि फर्टिलाइजर कंपनियों को अब एलएनजी के लिए वैकल्पिक रास्तों की तलाश करनी होगी, लेकिन ग्लोबल स्तर पर गैस के बढ़ते दाम इसमें बड़ी रुकावट बन सकते हैं। निवेशकों को फिलहाल इन शेयरों में किसी भी बड़े निवेश से पहले सप्लाई की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार करना चाहिए।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
SIP
टाइमिंग पर भारी पड़ती है निरंतरता
promotion image

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

अगला लेख