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क्यों कोल इंडिया के शेयर हुए 'लाल'? उपभोक्ताओं की जेब का बोझ कम करने के लिए कंपनी ने उठाया यह कदम

Upstox

3 min read | अपडेटेड April 13, 2026, 09:49 IST

सारांश

कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, अगर बढ़ती लागत को सीधे उपभोक्ताओं पर डाला गया, तो इसका व्यापक और क्रमिक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया संकट से पहले अगस्त, 2025 से जनवरी, 2026 तक अमोनियम नाइट्रेट की कीमतें स्थिर थीं, लेकिन इसके बाद इनमें तेजी आई, जिससे विस्फोटकों की लागत बढ़ गई।

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क्यों कोल इंडिया के शेयरों में दिख रही गिरावट?

पब्लिक सेक्टर की कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) उपभोक्ताओं को कोयले की ऊंची कीमतों से बचाने के लिए बढ़ती कच्चे माल की लागत खुद वहन कर रही है। विस्फोटक और औद्योगिक डीजल जैसे प्रमुख कच्चे माल के खर्च में पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद तेज बढ़ोतरी हुई है। कंपनी ने कहा कि इस अतिरिक्त लागत को उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा रहा है, क्योंकि ऐसा करने से कोयले पर निर्भर विभिन्न सेक्टरों पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है। इसका असर कोल इंडिया के शेयरों पर भी देखने को मिल रहा है। आज कोल इंडिया के शेयर लाल में ट्रेड हो रहे हैं। कोल इंडिया के शेयरों में आज .5% के आस-पास गिरावट देखने को मिली, जिसके बाद शेयर करीब 2.5 रुपये गिरकर 431-432 रुपये प्रति शेयर पर ट्रेड हो रहे हैं।

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विस्फोटक की लागत में 26% तक की तेजी

कंपनी अपनी खदानों में काम कर रहे ठेकेदारों को बढ़ी हुई डीजल कीमतों का मुआवजा भी दे रही है। खुले खनन में इस्तेमाल होने वाले विस्फोटकों के प्रमुख घटक अमोनियम नाइट्रेट की कीमत 1 अप्रैल तक 44 प्रतिशत बढ़कर 72,750 रुपये प्रति टन हो गई है। इसके कारण विस्फोटकों की औसत लागत मार्च के अंत तक लगभग 26% बढ़कर करीब 49,800 रुपये प्रति टन हो गई। कंपनी की अनुषंगी इकाइयां हर साल करीब नौ लाख टन विस्फोटकों का उपयोग करती हैं और इस पूरी अतिरिक्त लागत को कोल इंडिया खुद वहन कर रही है।

डीजल की कीमत भी करीब 54% बढ़कर 142 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जो मिड मार्च में लगभग 92 रुपये प्रति लीटर थी। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में कंपनी ने करीब 4.19 लाख किलोलीटर डीजल का इस्तेमाल किया। लागत में बढ़ोतरी के बावजूद कोयले को किफायती बनाए रखने के लिए कंपनी ने कई कदम उठाए हैं। इनमें कुछ ई-नीलामी में आरक्षित मूल्य कम करना, नीलामी की संख्या बढ़ाना और बाजार में अधिक मात्रा उपलब्ध कराना शामिल है। इन उपायों का उद्देश्य उद्योगों और उपभोक्ताओं को बढ़ती ऊर्जा लागत के प्रभाव से बचाना है, ताकि कोयले की कीमतें स्थिर बनी रहें।

पश्चिम एशिया संकट से पहले स्थिर थीं अमोनियम नाइट्रेड की कीमतें

अधिकारियों के अनुसार, अगर बढ़ती लागत को सीधे उपभोक्ताओं पर डाला गया, तो इसका व्यापक और क्रमिक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया संकट से पहले अगस्त, 2025 से जनवरी, 2026 तक अमोनियम नाइट्रेट की कीमतें स्थिर थीं, लेकिन इसके बाद इनमें तेजी आई, जिससे विस्फोटकों की लागत बढ़ गई।

पीटीआई इनपुट के साथ
(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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