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  1. क्या भारत में बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच क्या है लेटेस्ट अपडेट?

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क्या भारत में बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच क्या है लेटेस्ट अपडेट?

Upstox

3 min read | अपडेटेड March 10, 2026, 09:00 IST

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सारांश

Petrol-Diesel Rates: बढ़ती जियो पॉलिटिकल टेंशन के बीच एक सवाल जो लगातार खड़ा हो रहा है वह यह है कि क्या आने वाले कुछ दिनों में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा देखने को मिल सकता है? चलिए समझते हैं कि कच्चे तेल की कीमतों और भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर लेटेस्ट अपडेट क्या है?

पेट्रोल और डीजल के दाम

क्या जल्द भारत में दिख सकता है पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा?

ग्लोबल मार्केट में कच्चा तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध के बीच सोमवार को कच्चे तेल का दाम 120 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गया था, दिन खत्म होने तक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई और आज कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के अंदर ही ट्रेड हो रहा है। 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के बावजूद फिलहाल भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं की जाएगी। सरकारी सूत्रों ने सोमवार को यह बात कही थी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने पूरे देश में ईंधन की सुचारु आपूर्ति के लिए कोशिशें तेज कर दी हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष 11वें दिन पहुंच गया है, ग्लोबल बाजारों में भारी गिरावट आई और अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो युद्ध शुरू होने के समय की तुलना में लगभग 65% अधिक थी। हालांकि, बाद में इसमें गिरावट आई।

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अधिकारियों ने कहा कि सरकार ग्लोबल तेल बाजारों पर नजर रख रही है, लेकिन खुदरा ईंधन की कीमतों में तत्काल वृद्धि की कोई योजना नहीं है। उम्मीद है कि पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियां फिलहाल मौजूदा लागत दबाव को वहन करेंगी। हालांकि, देश में अगले छह से आठ सप्ताह की जरूरतों को पूरा करने के लिए कच्चा तेल और तैयार उत्पादों (ईंधन) दोनों का पर्याप्त भंडार है, पर सरकार ने खाना पकाने की गैस एलपीजी भराने का ऑर्डर देने की नीति में बदलाव किया है।

LPG सिलेंडर की जमाखोरी रोकने को लेकर सरकार सख्त

जमाखोरी को रोकने के लिए घरेलू एलपीजी सिलेंडर भराने के लिए बुकिंग की मिनिमम वेटिंग पीरियड 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। इसका मकसद सिलेंडर की जमाखोरी को रोकना और उनका समान वितरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि एक औसत परिवार एक साल में 14.2 किलोग्राम के सात से आठ एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करता है और आमतौर पर उन्हें छह सप्ताह से कम समय में उसे भराने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। जमाखोरी और बाजार में जानबूझकर कमी की स्थिति उत्पन्न होने से रोकने के लिए सिलेंडर भराने के लिए बुकिंग पीरियड बढ़ाया गया है। उन्होंने बताया कि पेट्रोलियम कंपनियों के पास एलपीजी का पर्याप्त भंडार है।

LPG को लेकर स्थिति क्यों पेट्रोल-डीजल से अलग?

सूत्रों के अनुसार, सरकार ग्लोबल ऊर्जा स्थिति पर नजर रख रही है और सप्लाई चेनों को स्थिर बनाए रखने के लिए कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि रूस जैसे वैकल्पिक स्रोतों से पर्याप्त कच्चा तेल उपलब्ध है। लेकिन एलपीजी आपूर्ति में किसी भी तरह की कमी की भरपाई करना अधिक समय लेने वाला है, क्योंकि अन्य वैकल्पिक स्रोत मुख्य रूप से अमेरिका और कनाडा में स्थित हैं। निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए, सरकार ने रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन को अधिकतम स्तर पर लाने और इसके किसी भी हिस्से का उपयोग पेट्रोरसायन बनाने के लिए नही करने का आदेश दिया है। एक सूत्र ने बताया कि पेट्रोल और डीजल की स्थिति काफी संतोषजनक है। उन्होंने कहा, ‘देश में हर पेट्रोल पंप चालू है, घरों की रसोई में पाइपलाइन से आने वाली प्राकृतिक गैस की आपूर्ति सुचारू रूप से चल रही है, और सभी सीएनजी स्टेशन खुले हैं। घबराने की कोई बात नहीं है।’

भाषा इनपुट के साथ

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