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  1. कभी सोचा है 1 अप्रैल से ही क्यों शुरू होता है वित्त वर्ष? इतिहास और खेती से जुड़ी है यह व्यवस्था

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कभी सोचा है 1 अप्रैल से ही क्यों शुरू होता है वित्त वर्ष? इतिहास और खेती से जुड़ी है यह व्यवस्था

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड April 01, 2026, 14:48 IST

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सारांश

भारत में मानसून जून से सितंबर तक रहता है, बुवाई जून-जुलाई में होती है और फसल की कटाई अक्टूबर से मार्च के बीच होती है। यानी मार्च के अंत तक सरकार को यह साफ पता चल जाता है कि फसल कैसी रही, किसानों की आय कितनी होगी और राजस्व कितना आ सकता है।

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सरकार हर साल 1 फरवरी को बजट पेश करती है, ताकि 1 अप्रैल से नई योजनाएं और खर्च शुरू हो सकें।

New Financial Year: भारत में 1 जनवरी से नया साल शुरू होता है, लेकिन जब वित्त वर्ष की बात आती है तो यह 1 अप्रैल से शुरू होता है और 31 मार्च को खत्म होता है। सरकार, कंपनियों और टैक्स सिस्टम के हिसाब से नया साल 1 अप्रैल ही है। दुनिया के कई ऐसे देश हैं जहां वित्त वर्ष की शुरुआत 1 जनवरी से होती है। यहां हम समझेंगे कि क्या कारण है कि भारत में 1 अप्रैल से 31 मार्च तक वित्त वर्ष होता है।
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ब्रिटिश काल से है यह व्यवस्था

इसका सबसे बड़ा कारण इतिहास और खेती से जुड़ा है। भारत में यह सिस्टम ब्रिटिश काल से चला आ रहा है। उस समय भारत की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती पर निर्भर थी और सरकार की कमाई का बड़ा हिस्सा जमीन से मिलने वाले राजस्व से आता था। इसलिए फाइनेंशियल प्लानिंग को फसल के चक्र के हिसाब से बनाया गया। यह सिस्टम ब्रिटेन से भी प्रभावित है। पहले ब्रिटेन में भी अप्रैल से वित्त वर्ष शुरू होता था और वही सिस्टम भारत में लागू किया गया, जो बाद में स्थायी बन गया।

खेती भी एक अहम वजह

भारत में मानसून जून से सितंबर तक रहता है, बुवाई जून-जुलाई में होती है और फसल की कटाई अक्टूबर से मार्च के बीच होती है। यानी मार्च के अंत तक सरकार को यह साफ पता चल जाता है कि फसल कैसी रही, किसानों की आय कितनी होगी और राजस्व कितना आ सकता है। इसलिए 1 अप्रैल से नया वित्त वर्ष शुरू करना ज्यादा सही माना गया, ताकि नई प्लानिंग सही आंकड़ों के आधार पर हो सके।

अप्रैल के आसपास ही नया हिंदू साल होता है शुरू

हिंदू कैलेंडर के हिसाब से भी यह समय खास है, क्योंकि अप्रैल के आसपास ही नया हिंदू साल (जैसे बैसाखी) शुरू होता है, इसलिए यह समय नए साल की शुरुआत के लिए सांस्कृतिक रूप से भी जुड़ा हुआ है।

आजादी के बाद भी भारत ने इस सिस्टम को नहीं बदला, क्योंकि यह देश की जरूरतों के हिसाब से सही बैठता है। खासकर, बजट इसी आधार पर बनाया जाता है। सरकार हर साल 1 फरवरी को बजट पेश करती है, ताकि 1 अप्रैल से नई योजनाएं और खर्च शुरू हो सकें।

1 जनवरी से वित्त वर्ष वाली व्यवस्था में क्या है दिक्कत?

कई लोग कहते हैं कि भारत को 1 जनवरी से फाइनेंशियल ईयर शुरू करना चाहिए, ताकि दुनिया के साथ तालमेल आसान हो। लेकिन ऐसा करना आसान नहीं है। इससे टैक्स सिस्टम, बैंकिंग, कंपनियों के अकाउंट, ऑडिट और सरकारी कामकाज में बड़े बदलाव करने पड़ेंगे, जो काफी जटिल है।

सबसे जरूरी बात यह है कि मौजूदा अप्रैल-मार्च सिस्टम अभी भी भारत के लिए सही काम कर रहा है। फाइनेंशियल ईयर हमेशा कैलेंडर के हिसाब से नहीं, बल्कि देश की जरूरत और सिस्टम की सुविधा के हिसाब से तय किया जाता है।

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