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3 min read | अपडेटेड January 07, 2026, 13:33 IST
सारांश
जर्मन सिल्वर अपनी खास बनावट और टिकाऊपन के लिए पहचानी जाने वाली एक मिश्र धातु है। इन दिनों इसकी मांग बढ़ने के पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण हैं। आज हम दोनों पर बात करने वाले हैं।

जर्मन सिल्वर में चांदी का छोटा सा भी अंश नहीं होता है।
आज के दौर में जब धातु बाजार में कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, तब जर्मन सिल्वर जैसी धातुएं अपनी एक अलग पहचान बना रही हैं। बाजार में आजकल जर्मन सिल्वर की मूर्तियां, बर्तन और सजावटी सामानों की भरमार देखी जा रही है। इसकी चमक और सफेद रंग के कारण अक्सर लोग इसके नाम को लेकर भ्रमित हो जाते हैं। लेकिन यह समझना बहुत जरूरी है कि जर्मन सिल्वर का असली चांदी से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। यह एक स्वतंत्र मिश्र धातु है जिसका उपयोग इसकी अपनी खूबियों की वजह से किया जाता है। नाम में सिल्वर शब्द होने के बावजूद यह धातु अपनी रासायनिक बनावट में बिल्कुल अलग है।
जर्मन सिल्वर वास्तव में तीन प्रमुख धातुओं का एक वैज्ञानिक मिश्रण है। इसमें मुख्य रूप से तांबा, जस्ता और निकल का इस्तेमाल किया जाता है। आमतौर पर इसमें लगभग 60 प्रतिशत तांबा, 20 प्रतिशत जस्ता और 20 प्रतिशत निकल होता है। निकल की उपस्थिति ही इस धातु को वह विशेष सफेद और चमकदार रंग प्रदान करती है जिसकी वजह से इसे यह नाम मिला है। इसे दुनिया के कई हिस्सों में निकल सिल्वर के नाम से भी पुकारा जाता है। इसका इतिहास बहुत पुराना है और इसे पहली बार यूरोप में चांदी के एक मजबूत विकल्प के रूप में विकसित किया गया था ताकि दैनिक उपयोग की चीजें अधिक टिकाऊ बनाई जा सकें।
जर्मन सिल्वर के अचानक ट्रेंड में आने का सबसे बड़ा कारण इसकी मजबूती और दिखावट है। चांदी की कीमतें जिस तरह से रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छू रही हैं, उसे देखते हुए लोग ऐसी धातुओं की तलाश में हैं जो दिखने में सुंदर हों और लंबे समय तक चलें। दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में चांदी का भाव अब 2.50 लाख रुपये प्रति किलो के लेवल को पार कर चुका है। ऐसे समय में उपहार देने और घर की सजावट के लिए लोग जर्मन सिल्वर की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह बहुत कठोर होती है और इसमें आसानी से खरोंच नहीं पड़ती। यही वजह है कि त्योहारों और शादियों के समय में इसकी मांग में भारी उछाल देखा जा रहा है।
यहां यह बात पूरी तरह साफ कर देना जरूरी है कि जर्मन सिल्वर में चांदी की मात्रा 0 प्रतिशत होती है। बहुत से लोग इसके नाम से प्रभावित होकर इसे निवेश के तौर पर देखते हैं, लेकिन यह निवेश का माध्यम नहीं है। असली चांदी की अपनी एक रिसेल वैल्यू होती है और उसे जरूरत पड़ने पर बाजार में बेचकर नकद प्राप्त किया जा सकता है। इसके उलट, जर्मन सिल्वर केवल उपयोग और सजावट के लिए बनाई गई धातु है। इसे दोबारा बेचने पर चांदी जैसा मुनाफा या पुरानी कीमत वापस मिलना मुमकिन नहीं है। इसलिए ग्राहकों को इसे खरीदते समय केवल इसकी उपयोगिता और सुंदरता पर ध्यान देना चाहिए, न कि इसे भविष्य के निवेश के तौर पर देखना चाहिए।
जर्मन सिल्वर का उपयोग वर्तमान में बहुत बढ़ गया है। विशेष रूप से पूजा की थाली, दीपक, भगवान की मूर्तियां और अन्य हस्तशिल्प वस्तुओं में इसका बहुत अधिक प्रयोग हो रहा है। इसकी चमक लंबे समय तक बनी रहती है और यह जल्दी काली नहीं पड़ती। साथ ही, इसकी देखभाल करना भी काफी आसान होता है। इसे सामान्य साबुन और पानी से साफ करके इसकी चमक को वापस पाया जा सकता है।
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