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4 min read | अपडेटेड February 20, 2026, 13:45 IST
सारांश
Sarvam AI ने सिर्फ तीन सालों में बड़ी कामयाबी हासिल की है। कंपनी ने भारत की भाषाओं के लिए खास 11 AI प्लेटफॉर्म लॉन्च किए हैं। इसके फाउंडर्स आईआईटी के पूर्व छात्र हैं जिन्होंने माइक्रोसॉफ्ट और आधार जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम किया है। इनका मकसद भारत के हर नागरिक तक अपनी भाषा में AI सर्विस पहुँचाना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत AI इम्पैक्ट समिट 2026 में Sarvam AI के खास 'काजे' चश्मे पहनकर उसका अनुभव लेते हुए।
भारत की अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI क्रांति की शुरुआत हो चुकी है और इसके केंद्र में बेंगलुरु की स्टार्टअप कंपनी Sarvam AI खड़ी है। भारत मंडपम में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में उस वक्त सबकी नजरें इस कंपनी पर टिक गईं जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काले रंग के स्लीक AI चश्मे पहने। इन चश्मों का नाम 'Sarvam Kaze' है जिसे Sarvam AI ने खुद डेवलप किया है। महज तीन साल से भी कम पुरानी इस कंपनी ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय भाषाओं और घरेलू डेटा के दम पर भी वर्ल्ड क्लास टेक्नोलॉजी बनाई जा सकती है। यह सफर दो इंजीनियरों के एक छोटे से आइडिया से शुरू होकर आज देश के सबसे बड़े AI मंच तक पहुंच गया है।
Sarvam AI की शुरुआत साल 2023 में हुई थी। इसके पीछे प्रत्युष कुमार और विवेक राघवन का दिमाग काम कर रहा है। प्रत्युष ने आईआईटी बॉम्बे से पढ़ाई की और आईबीएम और माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च में रिसर्च साइंटिस्ट के तौर पर काम किया। वहीं विवेक राघवन ने आईआईटी दिल्ली से पढ़ाई करने के बाद आधार कार्ड यानी UIDAI के डिजाइन और स्केलिंग में चीफ प्रोडक्ट मैनेजर के तौर पर अहम भूमिका निभाई थी। इन दोनों ने मिलकर 'सॉवरेन AI' बनाने का सपना देखा। इनका मानना था कि भारत को ऐसे AI की जरूरत है जो यहां की भाषाओं, कल्चर और कॉन्टेक्स्ट को समझे, न कि सिर्फ पश्चिमी देशों के डेटा पर निर्भर रहे। आज इनकी कंपनी भारतीय डेटा सेट पर आधारित मॉडल्स तैयार कर रही है।
Sarvam AI ने भारतीय भाषाओं के लिए टेक्स्ट-टू-स्पीच और स्पीच-टू-टेक्स्ट के बेहतरीन मॉडल्स तैयार किए हैं। कंपनी का दावा है कि उनके मॉडल्स ने डॉक्यूमेंट समझने और भारतीय भाषाओं की प्रोसेसिंग में ChatGPT और Gemini जैसे ग्लोबल सिस्टम्स को भी पीछे छोड़ दिया है। समिट से पहले कंपनी ने 11 नए AI प्लेटफॉर्म्स और सॉल्यूशंस लॉन्च किए हैं। इनमें 'Sarvam Akshar' जैसे टूल्स शामिल हैं जो पेचीदा कागजों को डिजिटल बनाने में मदद करते हैं। वहीं 'Sarvam Studio' के जरिए कंटेंट क्रिएटर्स अपने काम को कई भाषाओं में उपलब्ध करा सकते हैं। एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि कंपनी ने उन गैप्स को भरा है जिसे बड़ी ग्लोबल कंपनियां अक्सर छोड़ देती हैं।
कंपनी की तेज रफ्तार को देखते हुए बड़े निवेशकों ने भी इस पर भरोसा जताया है। दिसंबर 2023 में कंपनी ने करीब 41 मिलियन डॉलर यानी लगभग 340 करोड़ रुपये की फन्डिंग जुटाई थी। इसके बाद माइक्रोसॉफ्ट के साथ मिलकर कंपनी ने वॉइस आधारित जेनरेटिव AI टूल्स बनाने पर काम शुरू किया। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने भी इसे 2024 की टेक्नोलॉजी पायनियर लिस्ट में शामिल किया था। इतना ही नहीं, यूआईडीएआई (UIDAI) के साथ मिलकर कंपनी ने एक ऐसा सिस्टम बनाया है जिससे आधार कार्ड यूजर्स बोलकर इंटरैक्शन कर सकते हैं और फीडबैक दे सकते हैं। कंपनी अब 'AI एलायंस' का भी हिस्सा है जिसमें मेटा और आईबीएम जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।
Sarvam AI का असली मकसद 'भारत से सबके लिए AI' तैयार करना है। कंपनी के फाउंडर प्रत्युष कुमार फोर्ब्स को दिए एक इंटरव्यू में कहते हैं कि भारत को अंग्रेजी से आगे बढ़कर सोचने की जरूरत है क्योंकि यहां हर क्षेत्र का अनुभव और भाषा अलग है। कंपनी 'Saaras V3' और 'Sarvam Arya' जैसे मॉडल्स के जरिए आम लोगों की डिजिटल लाइफ आसान बनाने की कोशिश कर रही है। भारत मंडपम में प्रधानमंत्री द्वारा उनके प्रोडक्ट का इस्तेमाल करना इस कंपनी के लिए एक बड़ा मील का पत्थर रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह भारतीय स्टार्टअप आने वाले समय में ग्लोबल मार्केट में अपनी जगह कैसे पक्की करता है और भारत के डिजिटल फ्यूचर को कैसे बदलता है।
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