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S&P Global Ratings: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गुड न्यूज, FY26 में 6.5% की दर से बढ़ने का अनुमान

Upstox

3 min read | अपडेटेड November 24, 2025, 12:56 IST

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सारांश

एसएंडपी ने कहा कि भारत पर प्रभावी अमेरिकी टैरिफ में बढ़ोतरी से देश में एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड मैनुफैक्चरिंग के विस्तार पर असर पड़ रहा है। ऐसे संकेत हैं कि अमेरिका भारतीय प्रोडक्ट्स पर टैरिफ कम कर सकता है।

एस एंड पी ग्लोबल रेटिंग्स

एस एंड पी ग्लोबल रेटिंग्स का भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रिडिक्शन कैसा?

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था के 6.5% और अगले फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में 6.7% की दर से बढ़ने का अनुमान व्यक्त किया है। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि टैक्स कटौती और मौद्रिक नीति में ढील से उपभोग आधारित वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। भारत का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) मौजूदा फाइनेंशियल ईयर की अप्रैल से जून पीरियड में पांच तिमाहियों में सबसे तेज 7.8% की दर से बढ़ने का अनुमान है। दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के जीडीपी वृद्धि अनुमानों के आधिकारिक आंकड़े 28 नवंबर को जारी होने वाले हैं। एसएंडपी ने अपनी ‘इकोनॉमिक आउटलुक एशिया-पैसिफिक रिपोर्ट’ में कहा, ‘हमारा अनुमान है कि भारत की जीडीपी फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (मार्च 2026 को खत्म) में 6.5% और फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में 6.7 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी, जिसमें जोखिम दोनों ओर संतुलित होंगे। अमेरिकी शुल्क के प्रभाव के बावजूद मजबूत खपत से प्रेरित घरेलू वृद्धि मजबूत बना हुई है।’

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जीडीपी दर को सपोर्ट करने वाले कारक कौन से हैं?

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.8% रहने का अनुमान लगाया है, जो बीते फाइनेंशियल ईयर 2024-25 की 6.5% की वृद्धि दर से बेहतर है। एसएंडपी ने कहा, ‘माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की कम दरें मध्यम वर्ग के उपभोग को बढ़ावा देंगी और इस साल शुरू की गई इनकम टैक्स कटौती और ब्याज दरों में कटौती का पूरक बनेंगी। इन बदलावों से चालू फाइनेंशियल ईयर और अगले फाइनेंशियल ईयर में निवेश की तुलना में उपभोग वृद्धि का एक बड़ा चालक बन सकता है।’

इनकम टैक्स छूट से लोगों को मिला कितना फायदा?

सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के बजट में इनकम टैक्स छूट को सात लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दिया है, जिससे मध्यम वर्ग को एक लाख करोड़ रुपये की टैक्स राहत मिली है। इसके अलावा आरबीआई ने जून में प्रमुख नीतिगत दरों में 0.5% की कटौती करके उन्हें तीन साल के निचले स्तर 5.5% पर ला दिया था। वहीं, 22 सितंबर से करीब 375 वस्तुओं पर जीएसटी दरें घटा दी गईं जिससे दैनिक उपभोग की वस्तुएं सस्ती हुई हैं।

क्या भारतीय प्रोडक्ट्स से अमेरिका कम करेगा टैरिफ?

एसएंडपी ने कहा कि भारत पर प्रभावी अमेरिकी टैरिफ में बढ़ोतरी से देश में एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड मैनुफैक्चरिंग के विस्तार पर असर पड़ रहा है। ऐसे संकेत हैं कि अमेरिका भारतीय प्रोडक्ट्स पर टैरिफ कम कर सकता है। रेटिंग एजेंसी ने कहा, ‘व्यापार नीति के प्रति अमेरिका के नए दृष्टिकोण के कारण सरकारें और कंपनियां छूट के लिए बातचीत करने में समय और पैसा खर्च कर रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप उत्पादकता बढ़ाने के प्रयासों से ध्यान हट रहा है।’

भाषा इनपुट के साथ
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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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