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Retail inflation: फरवरी में खुदरा महंगाई में उछाल, खाने-पीने की चीजों के बढ़े दाम

Upstox

2 min read | अपडेटेड March 12, 2026, 17:26 IST

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सारांश

Retail inflation: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय यानी NSO द्वारा जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में खाद्य महंगाई बढ़कर 3.47 प्रतिशत हो गई जो जनवरी में 2.13 प्रतिशत थी।

India retail inflation

India retail inflation: ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर 3.37 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 3.02 फीसदी दर्ज की गई।

Retail inflation: महंगाई के मोर्चे पर आम आदमी के लिए बुरी खबर है। देश में खुदरा महंगाई फरवरी में बढ़कर 3.21 फीसदी हो गई है। इसके पहले जनवरी में यह 2.74 फीसदी के स्तर पर रही थी। आज गुरुवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। महंगाई के यह आंकड़े आधार वर्ष 2024 वाली नई सीरीज पर आधारित हैं।
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खाने-पीने की चीजें हुई महंगी

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय यानी NSO द्वारा जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में खाद्य महंगाई बढ़कर 3.47 प्रतिशत हो गई जो जनवरी में 2.13 प्रतिशत थी।

इस दौरान चांदी, सोना, हीरा और प्लैटिनम के आभूषण, नारियल-खोपरा, टमाटर और फूलगोभी की कीमतों में सबसे अधिक तेजी रही। दूसरी ओर लहसुन, प्याज, आलू, अरहर और लीची की कीमतों में नरमी देखी गई।

ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर 3.37 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 3.02 फीसदी दर्ज की गई। महंगाई बढ़ी है, लेकिन यह अभी भी Reserve Bank of India (RBI) के लक्ष्य से नीचे है। RBI ने महंगाई का टारगेट 4% तय किया हुआ है और इसकी सहनशील सीमा 2% से 6% के बीच है। यानी मौजूदा महंगाई अभी भी केंद्रीय बैंक की तय सीमा के अंदर है।

मिडिल ईस्ट में युद्ध का असर

इसी बीच मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर भी आगे चलकर भारत की महंगाई पर पड़ सकता है। युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया और कीमतें चार साल के उच्च स्तर तक पहुंच गईं। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, इसलिए अगर तेल महंगा होता है तो इसका असर देश की महंगाई पर भी पड़ता है। इसी दबाव के बीच भारत में कंपनियों ने करीब एक साल बाद पहली बार कुकिंग गैस (LPG) की कीमतें बढ़ाई हैं। इससे घरेलू खर्च बढ़ सकता है और आगे महंगाई पर असर पड़ सकता है।

सरकार की एक रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर मिडिल ईस्ट का युद्ध लंबे समय तक चलता है, तो इससे भारतीय रुपया कमजोर हो सकता है और देश का करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) बढ़ सकता है। इसका मतलब है कि भारत का आयात-निर्यात संतुलन और ज्यादा बिगड़ सकता है।

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Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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