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  1. डिफॉल्टरों, NPA की लिस्ट और इंस्पेक्शन रिपोर्ट पब्लिक करने के पक्ष में RBI, बैंकों ने किया विरोध

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डिफॉल्टरों, NPA की लिस्ट और इंस्पेक्शन रिपोर्ट पब्लिक करने के पक्ष में RBI, बैंकों ने किया विरोध

Upstox

2 min read | अपडेटेड January 12, 2026, 08:47 IST

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सारांश

बैंक यह तर्क दे रहे हैं कि नियामक जानकारी के खुलासे से उनके व्यावसायिक हितों को नुकसान होगा। बैंक ऑफ बड़ौदा ने आरबीआई के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें बैंक पर 4.34 करोड़ रुपये जुर्माने से जुड़े डॉक्यूमेंट्स के खुलासे की अनुमति दी गई थी।

भारतीय रिजर्व बैंक

आरबीआई एनपीए, निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक करने के पक्ष में, बैंकों ने किया विरोध

बैंक ऑफ बड़ौदा, आरबीएल बैंक, यस बैंक और भारतीय स्टेट बैंक ने केंद्रीय सूचना आयोग (Central Information Commission, CIC) से संपर्क कर डिफॉल्टरों और एनपीए की लिस्ट, जुर्माने और इन्स्पेक्शन रिपोर्ट जैसी सूचनाओं को पब्लिक करने पर आपत्ति जताई है। दूसरी ओर आरबीआई ने कहा कि आरटीआई अधिनियम के तहत इन रिकॉर्ड्स का खुलासा किया जा सकता है। आरटीआई आवेदनकर्ताओं धीरज मिश्रा, वथिराज, गिरीश मित्तल और राधा रामन तिवारी ने आरबीआई में अलग-अलग आवेदन देकर इस बारे में जानकारी मांगी थी। उन्होंने यस बैंक के टॉप 100 एनपीए और जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों, एसबीआई और आरबीएल की इन्स्पेक्शन रिपोर्ट और बैंक ऑफ बड़ौदा पर वैधानिक निरीक्षण के बाद लगे 4.34 करोड़ रुपये के मौद्रिक जुर्माने से संबंधित डॉक्यूमेंट्स समेत अन्य जानकारियां मांगी थीं।

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बैंकों ने CIC से की है अपील

इन बैंकों ने सीआईसी के पास अपील की, क्योंकि बैंकिंग नियामक आरबीआई ने पाया कि आरटीआई आवेदनकर्ताओं द्वारा मांगी गई जानकारी आरटीआई अधिनियम के तहत पब्लिक की जा सकती है। सूचना आयुक्त खुशवंत सिंह सेठी ने बैंकों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर फैसला लेने के लिए इस मामले को सीआईसी की बड़ी पीठ के पास भेज दिया। अंतिम फैसले तक सूचना देने पर रोक लगा दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले का नतीजा बैंकिंग में पारदर्शिता, जमाकर्ताओं के अधिकार और नियामक जवाबदेही पर लंबी अवधि में बड़ा असर डाल सकता है, खासकर जब एनपीए, जुर्माने और निरीक्षण में कमी पर सार्वजनिक निगरानी बढ़ी हुई है।

बैंक क्यों नहीं चाहते कि ये जानकारियां सार्वजनिक हो जाएं?

बैंक यह तर्क दे रहे हैं कि नियामक जानकारी के खुलासे से उनके व्यावसायिक हितों को नुकसान होगा। बैंक ऑफ बड़ौदा ने आरबीआई के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें बैंक पर 4.34 करोड़ रुपये जुर्माने से जुड़े डॉक्यूमेंट्स के खुलासे की अनुमति दी गई थी। आरबीएल बैंक, यस बैंक और एसबीआई ने भी इसी तरह के मामले में जानकारी देने पर आपत्ति जताई। आरबीआई ने साफ किया है कि आरटीआई अधिनियम, 2005 सभी पुराने कानूनों से ऊपर है और इसका उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। आरबीआई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने डिफॉल्टरों की लिस्ट और निरीक्षण रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मंजूरी दी है।

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