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  1. PM E‑DRIVE Scheme: इलेक्ट्रिक बस और ट्रक कंपनियों को राहत, 31 अगस्त तक ट्रैक्शन मोटर आयात की मिली अनुमति

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PM E‑DRIVE Scheme: इलेक्ट्रिक बस और ट्रक कंपनियों को राहत, 31 अगस्त तक ट्रैक्शन मोटर आयात की मिली अनुमति

Upstox

2 min read | अपडेटेड March 16, 2026, 18:11 IST

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सारांश

13 मार्च को भारी उद्योग मंत्रालय ने इस बारे में अलग-अलग नोटिफिकेशन जारी किए। इनमें कहा गया कि ई-ट्रक (N2/N3 कैटेगरी) और ई-बस (M2/M3 कैटेगरी) में इस्तेमाल होने वाली ट्रैक्शन मोटर के आयात पर जो रोक लगने वाली थी, उसकी समयसीमा आगे बढ़ा दी गई है।

E-Bus

E-Bus: ट्रैक्शन मोटर वह मोटर होती है जो इलेक्ट्रिक वाहन को चलाने के लिए मुख्य ताकत देती है।

सरकार ने ₹10,900 करोड़ की PM E‑DRIVE Scheme के तहत इलेक्ट्रिक बस और ट्रक बनाने वाली कंपनियों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने नियमों में ढील देते हुए इन कंपनियों को 31 अगस्त तक विदेश से ट्रैक्शन मोटर (Traction motor) आयात करने की अनुमति दी है। ट्रैक्शन मोटर वह मोटर होती है जो इलेक्ट्रिक वाहन को चलाने के लिए मुख्य ताकत देती है। इसमें आमतौर पर रेयर अर्थ मैग्नेट का इस्तेमाल होता है, जो अभी भारत में पर्याप्त मात्रा में नहीं बनते।

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13 मार्च को भारी उद्योग मंत्रालय ने इस बारे में अलग-अलग नोटिफिकेशन जारी किए। इनमें कहा गया कि ई-ट्रक (N2/N3 कैटेगरी) और ई-बस (M2/M3 कैटेगरी) में इस्तेमाल होने वाली ट्रैक्शन मोटर के आयात पर जो रोक लगने वाली थी, उसकी समयसीमा आगे बढ़ा दी गई है। इसका मतलब यह है कि कंपनियां अभी कुछ समय तक इन मोटरों को विदेश से मंगाकर अपने वाहन बना सकेंगी। इससे कंपनियों को उस समस्या से राहत मिलेगी जो उन्हें इन पार्ट्स की कमी के कारण हो रही थी।

दरअसल, सरकार की Phased Manufacturing Programme (PMP) के तहत नियम था कि इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली ट्रैक्शन मोटर का निर्माण भारत में ही होना चाहिए। इस नियम के मुताबिक मोटर के कई अहम काम जैसे मैग्नेट लगाना, रोटर असेंबली फिट करना, स्टेटर असेंबली फिट करना, शाफ्ट लगाना, बेयरिंग लगाना, एनक्लोजर लगाना, कनेक्टर और केबल फिट करना जैसे सभी प्रमुख काम भारत में ही किए जाने जरूरी थे।

लेकिन अब इस नियम को बदल दिया गया है। पहले इसकी समयसीमा मार्च 2026 तक बढ़ाई गई थी, लेकिन अब सरकार ने इसे और आगे बढ़ाकर 1 सितंबर 2026 से लागू करने का फैसला किया है। यानी तब तक कंपनियों को पूरी तरह भारत में ट्रैक्शन मोटर बनाना जरूरी नहीं होगा।

सरकार का मकसद लंबे समय में चीन पर निर्भरता कम करना है, क्योंकि रेयर अर्थ मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और ग्रीन एनर्जी जैसे कई अहम सेक्टर के लिए जरूरी होते हैं। लेकिन फिलहाल इनकी सप्लाई चेन को स्थिर बनाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

इसी वजह से सरकार ने Scheme to Promote Manufacturing of Sintered Rare Earth Permanent Magnet नाम की एक नई योजना भी शुरू की है। इस योजना के लिए ₹7280 करोड़ का बजट रखा गया है, ताकि भारत में ही रेयर अर्थ मैग्नेट का उत्पादन बढ़ाया जा सके और भविष्य में आयात पर निर्भरता कम हो सके।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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