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4 min read | अपडेटेड March 19, 2026, 17:46 IST
सारांश
मंत्रालय के इस आदेश का मकसद आपूर्ति में आने वाली रुकावटों पर तुरंत कदम उठाने, बिजली, उर्वरक और घरेलू एलपीजी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्राथमिकता देने और खरीद संबंधी बेहतर फैसले लेने के लिए एक केंद्रीकृत, वास्तविक समय पर उपलब्ध आंकड़ा रूपरेखा तैयार करना है।

ऊर्जा से जुड़ी जानकारी अब राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला, कंपनियों के लिए खुलासा करना होगा अनिवार्य
सरकार ने ऊर्जा से जुड़ी जानकारी को राष्ट्रीय सुरक्षा मामले के रूप में वर्गीकृत किया है। इससे तेल और गैस क्षेत्र से जुड़ी सभी इकाइयों के लिए विस्तृत परिचालन जानकारी देना अनिवार्य हो गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस (सूचना प्रदान करना) आदेश, 2026 के तहत सार्वजनिक और निजी दोनों सेक्टरों की रिफाइनरी कंपनियों, एलएनजी आयातकों, पाइपलाइन संचालकों, शहरी गैस वितरकों और पेट्रोरसायन कंपनियों को पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (Petroleum Planning & Analysis Cell, PPAC) को नियमित रूप से (कुछ मामलों में दैनिक आधार पर) विस्तृत जानकारी देनी होगी।
मंत्रालय की 18 मार्च को जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, इस आदेश में उत्पादन, आयात, भंडार स्तर और खपत के प्रतिरूप से संबंधित आंकड़े और जानकारी शामिल है। यह मौजूदा गोपनीयता प्रावधानों को निरस्त करता है। पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण गैस और एलपीजी आपूर्ति बाधित होने के बाद ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताओं में वृद्धि के बीच यह कदम उठाया गया है। भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 88%, प्राकृतिक गैस का 50% और एलपीजी का 60% आयात करता है। युद्ध शुरू होने से पहले, भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल का आधे से अधिक हिस्सा सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे देशों से होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आता था। एलपीजी का 85 से 95 % और गैस का 30% हिस्सा भी इसी रास्ते से आता था।
युद्ध के कारण यह होमुर्ज स्ट्रेट प्रभावी रूप से बंद हो गया है। इससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। हालांकि, कच्चे तेल की आपूर्ति में आई रुकावट की भरपाई रूस, पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका और लातिनी अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आंशिक रूप से की गई है। लेकिन खाड़ी देशों से आपूर्ति में कमी के कारण इंडस्ट्रियल और कमर्शियल यूजर्स को गैस और एलपीजी की सप्लाई सीमित हुई है।
मंत्रालय के इस आदेश का मकसद आपूर्ति में आने वाली रुकावटों पर तुरंत कदम उठाने, बिजली, उर्वरक और घरेलू एलपीजी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्राथमिकता देने और खरीद संबंधी बेहतर फैसले लेने के लिए एक केंद्रीकृत, वास्तविक समय पर उपलब्ध आंकड़ा रूपरेखा तैयार करना है। अधिकारियों ने कहा कि इस पहल से भारत की सप्लाई चेनों की निगरानी करने, बचे भंडार का प्रबंधन करने और वैश्विक झटकों के प्रति जोखिम को कम करने की क्षमता मजबूत होगी। नियामक ढांचे के सख्त होने के साथ ही कंपनियों को अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए ‘डेटा रिपोर्टिंग’ प्रणाली को अत्याधुनिक बनाना होगा।
अधिकारियों ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा न केवल स्रोत पर बल्कि सप्लाई चेन में वास्तविक समय की पारदर्शिता पर भी निर्भर करेगी। मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत शक्ति का उपयोग करते हुए आदेश जारी किया। यह अधिनियम केंद्र सरकार को किसी भी आवश्यक वस्तु का भंडार रखने, उत्पादन करने, आयात करने, निर्यात करने या व्यापार करने वाले किसी भी व्यक्ति से उत्पादन, सप्लाई, डिस्ट्रीब्यूशन, स्टॉक या उपयोग से संबंधित ऐसी जानकारी प्रस्तुत करने की मांग करने का अधिकार देता है। केंद्र सरकार ने कहा कि जनहित में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस सप्लाई चेन की प्रभावी निगरानी के लिए इस प्रकार की सूचनाओं के व्यवस्थित संग्रह, संकलन और विश्लेषण को लेकर एक केंद्रीकृत संस्थागत प्रणाली स्थापित करना आवश्यक है।
आदेश में कहा गया, ‘पेट्रोलियम उत्पादों या प्राकृतिक गैस के उत्पादन, प्रोसेसिंग, स्टोरेज, परिवहन, आयात, निर्यात, मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन या उपभोग में शामिल प्रत्येक इकाई को पीपीएसी को पेट्रोलियम उत्पादों या प्राकृतिक गैस के उत्पादन, आयात, निर्यात, भंडार, आवंटन, परिवहन, आपूर्ति, उपभोग और उपयोग से संबंधित जानकारी... आदि सूचना देनी होगी।’ यह आदेश कच्चे तेल उत्पादकों और आयातकों, तेल शोधन कंपनियों, तेल मार्केटिंग कंपनियों, पेट्रोलियम भंडारण और टर्मिनल संचालकों, प्राकृतिक गैस उत्पादकों, एलएनजी आयातकों और एलएनजी टर्मिनल संचालकों, प्राकृतिक गैस पाइपलाइन संचालकों, गैस विपणनकर्ताओं और सिटी गैस वितरण इकाइयों, प्राकृतिक गैस या पेट्रोलियम उत्पादों का उपयोग करने वाले पेट्रोरसायन संयंत्रों और पेट्रोलियम या प्राकृतिक गैस सप्लाई चेन का हिस्सा बनने वाली गतिविधियों में शामिल किसी भी पब्लिक सेक्टर या प्राइवेट सेक्टर की यूनिट पर लागू होगा।
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