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Iran war से US-Russia ही नहीं, India को भी बड़ा फायदा, Robert Kiyosaki ने समझाया गणित

Shubham Singh Thakur

4 min read | अपडेटेड March 10, 2026, 13:15 IST

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सारांश

मशहूर किताब Rich Dad Poor Dad के लेखक Robert Kiyosaki का एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में है। उनका कहना है कि अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच कुछ देशों को फायदा हो रहा है। उनके अनुसार इस समय तीन देश सबसे ज्यादा फायदे में हैं, जिनमें रूस, अमेरिका के साथ भारत भी शामिल है।

Robert Kiyosaki

Robert Kiyosaki का कहना है कि अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच कुछ देशों को फायदा हो रहा है। (Image-AI Generated)

US-Iran War: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग ने दुनिया में तेल की सप्लाई पर बड़ा संकट पैदा कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज (Strait of Hormuz) लगभग बंद है, जहां से दुनिया के कुल तेल का लगभग 20-25 परसेंट हिस्सा गुजरता है। कई ऐसे देश हैं जहां अब कुछ हफ्तों या महीनों का ही तेल रिजर्व है। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध जल्द खत्म होने के संकेत दिए हैं, लेकिन दूसरी तरफ ईरान ने कड़ा बयान जारी कर कहा, "यह हम तय करेंगे कि युद्ध कब खत्म होगा, अमेरिका नहीं।"
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क्रूड ऑयल का भाव 09 मार्च को करीब 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था, लेकिन आज इसमें गिरावट है और यह 93.55 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। इन सबके बीच मशहूर किताब Rich Dad Poor Dad के लेखक Robert Kiyosaki का एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में है। उनका कहना है कि इस संकट के बीच कुछ देशों को फायदा हो रहा है। उनके अनुसार इस समय तीन देश सबसे ज्यादा फायदे में हैं, जिनमें रूस, अमेरिका के साथ भारत भी शामिल है। उन्होंने इसके पीछे के कारण भी समझाए।

रूस को कैसे हो रहा फायदा?

Robert Kiyosaki का कहना है कि युद्ध शुरू होने से पहले रूस का Urals Crude Oil अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी सस्ते दाम पर बिक रहा था। इसकी वजह पश्चिमी देशों के प्रतिबंध थे, जिससे रूस को अपना तेल वैश्विक बेंचमार्क से लगभग 10 से 13 डॉलर कम कीमत पर बेचना पड़ता था। इन प्रतिबंधों के कारण रूस की कमाई काफी गिर गई थी और तेल-गैस से होने वाली आय 2020 के बाद सबसे कम स्तर पर पहुंच गई थी।

लेकिन अब स्थिति बदल गई है। अब रूस वही तेल वैश्विक कीमत से 4 से 5 डॉलर ज्यादा पर बेच पा रहा है। यानी पहले जो तेल सस्ता बिक रहा था, अब वह महंगा बिक रहा है। कुल मिलाकर लगभग 18 डॉलर प्रति बैरल का बड़ा बदलाव आ गया है और यह लगभग अचानक हुआ है। रूसी सरकार के पूरे बजट का लगभग 20 से 30 फीसदी हिस्सा तेल से आता है।

बता दें कि रूस के पास ऐसे पाइपलाइन नेटवर्क हैं जो सीधे Strait of Hormuz से होकर नहीं गुजरते। इसलिए रूस को इस युद्ध में एक भी मिसाइल चलाने की जरूरत नहीं पड़ी, फिर भी उसे इससे आर्थिक फायदा हो रहा है।

अमेरिका को भी फायदा

Robert Kiyosaki ने पोस्ट में आगे बताया है कि अमेरिका की स्थिति थोड़ी जटिल है। एक तरफ अमेरिका की शेल ऑयल कंपनियां और LNG निर्यात करने वाली कंपनियां बहुत ज्यादा मुनाफा कमा रही हैं। तेल की कीमत लगभग 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी है। लेकिन दूसरी तरफ अमेरिका के आम लोगों को इसका नुकसान झेलना पड़ रहा है। वहां पेट्रोल की कीमत 4 डॉलर प्रति गैलन से भी ज्यादा हो गई है और लगातार बढ़ रही है। इस वजह से अमेरिका एक ही समय में जीतने वाला भी है और हारने वाला भी।

भारत भी फायदे में

Robert Kiyosaki का कहना है कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयात करने वाला देश है और अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल बाहर से खरीदता है। इसमें से लगभग आधा तेल खाड़ी देशों से आता है। सामान्य स्थिति में तेल की कीमत बढ़ना भारत के लिए समस्या बन सकता है। लेकिन लेखक के अनुसार इस बार भारत बहुत समझदारी से रणनीति अपना रहा है। भारत शतरंज खेल रहा है जबकि बाकी देश साधारण खेल खेल रहे हैं। भारत के पास लगभग 74 दिनों का तेल भंडार है, जिसकी पुष्टि भारत के तेल मंत्री ने की है।

इसके अलावा भारत रूस से काफी सस्ता कच्चा तेल खरीद रहा है। अमेरिका ने भी भारत को 30 दिनों की विशेष छूट दी है ताकि वह समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीद सके। इसका मतलब यह है कि भारत इस मौके का फायदा उठाकर सस्ता तेल खरीद रहा है। भारत की रणनीति यह है कि वह सस्ता रूसी कच्चा तेल खरीदे, उसे अपनी रिफाइनरियों में प्रोसेस करे और फिर उससे बने पेट्रोल-डीजल जैसे रिफाइंड प्रोडक्ट दुनिया के देशों को बेच दे। अभी दुनिया में ईंधन की भारी मांग है और तेल की कीमत लगभग 114 डॉलर के आसपास है।

भारत पहले से ही दुनिया के सबसे बड़े रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातकों में से एक है। इसलिए सस्ते रूसी तेल और महंगे रिफाइंड ईंधन के बीच जो कीमत का अंतर है, उससे भारत को इस समय काफी अच्छा मुनाफा मिल रहा है।

भारत ने इस पूरे युद्ध के दौरान अमेरिका, रूस, इजराइल और ईरान सभी के साथ अपने संबंध बनाए रखे हैं। कई बार अलग-अलग देश भारत के जरिए एक-दूसरे को संदेश भी भेजते हैं। इसे बैकचैनल डिप्लोमेसी कहा जाता है। यह एक बड़ी रणनीतिक ताकत होती है। लेखक का कहना है कि भारत इस समय बहुत मुश्किल स्थिति में संतुलन बनाकर चल रहा है।

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