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  1. लिथियम और रेयर अर्थ पर सरकार का फोकस, भारत 2030 तक बढ़ाएगा उत्पादन, घटेगी आयात पर निर्भरता

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लिथियम और रेयर अर्थ पर सरकार का फोकस, भारत 2030 तक बढ़ाएगा उत्पादन, घटेगी आयात पर निर्भरता

Upstox

2 min read | अपडेटेड March 25, 2026, 17:51 IST

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सारांश

लिथियम और रेयर अर्थ खनिज बहुत जरूरी हैं क्योंकि इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस, एयरोस्पेस और स्पेस सेक्टर में होता है। ये भारत की क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन और नई तकनीकों जैसे AI के लिए भी अहम हैं।

Rare Earth and Lithium Exploration

Rare Earth and Lithium Exploration: सरकार ने नई नीतियों के जरिए इन क्षेत्रों को प्राइवेट सेक्टर के लिए खोलना भी शुरू किया है।

केंद्र सरकार अब देश में लिथियम और रेयर अर्थ (दुर्लभ खनिज) की खोज और उत्पादन को तेजी से बढ़ा रही है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कि भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक रेयर अर्थ मैग्नेट का उत्पादन 5,000 टन तक पहुंचाया जाए। अभी देश की जरूरत करीब 4,000 टन है, जो 2030 तक बढ़कर 8,000 टन तक पहुंच सकती है।

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क्यों अहम हैं लिथियम और रेयर अर्थ खनिज

लिथियम और रेयर अर्थ खनिज बहुत जरूरी हैं क्योंकि इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस, एयरोस्पेस और स्पेस सेक्टर में होता है। ये भारत की क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन और नई तकनीकों जैसे AI के लिए भी अहम हैं।

सरकार ने उठाए ये कदम

सरकार ने इस दिशा में कुछ बड़े कदम उठाए हैं। विशाखापत्तनम में समेरियम-कोबाल्ट मैग्नेट प्लांट शुरू किया गया है, जिसकी शुरुआती क्षमता 500 टन सालाना है। इसे आगे बढ़ाकर 2000 टन और फिर 2030 तक 5000 टन किया जाएगा। इसके अलावा, नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन मैग्नेट पर एक पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू किया गया है।

सरकार अलग-अलग मंत्रालयों के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि इन खनिजों की खोज और विकास तेज किया जा सके। राजस्थान के डेगाना, और जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में लिथियम की खोज के लिए सर्वे और तैयारी शुरू हो चुकी है।

प्राइवेट सेक्टर के लिए भी अवसर

सरकार ने नई नीतियों के जरिए इन क्षेत्रों को प्राइवेट सेक्टर के लिए खोलना भी शुरू किया है, ताकि निवेश बढ़े और उत्पादन तेजी से हो सके। इसके साथ ही तमिलनाडु, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और केरल में रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं, जिससे प्रोसेसिंग और इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा।

मंत्री ने यह भी बताया कि ये खनिज समुद्र किनारे की रेत और चट्टानों दोनों में मिलते हैं, लेकिन इन्हें निकालना आसान नहीं होता। खासकर राजस्थान, गुजरात और झारखंड जैसे इलाकों में खनिज खोजने का काम ज्यादा जटिल है।

आत्मनिर्भर बनने पर जोर

सरकार का फोकस यह है कि भारत इन खनिजों में आत्मनिर्भर बने, आयात पर निर्भरता कम करे और भविष्य के लिए मजबूत सप्लाई चेन तैयार करे, ताकि देश की इंडस्ट्री और टेक्नोलॉजी सेक्टर को मजबूती मिल सके।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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