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5 min read | अपडेटेड September 04, 2025, 08:25 IST
सारांश
GST Rate Cut: नई दरें 22 सितंबर से लागू होंगी। व्यक्तिगत उपयोग की लगभग सभी चीजों पर दरों में कटौती की गई है। दरअसल, सरकार घरेलू खर्च को बढ़ावा देने और अमेरिकी टैरिफ के आर्थिक प्रभाव को कम करने की कोशिश कर रही है।

जीएसटी रेट में कटौती कैसे-कैसे की गई है, कौन सी चीजें सस्ती हो जाएंगी?
जीएसटी काउंसिल ने बुधवार को आम सहमति से माल एवं सेवा कर (Goods and Services Tax, GST) में व्यापक सुधारों को मंजूरी दे दी। इस फैसले से रोटी, पराठा से लेकर हेयर ऑयल, आइसक्रीम और टीवी तक आम उपयोग की चीजें सस्ती हो जाएंगी। वहीं व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर टैक्स से पूरी तरह से राहत मिलेगी। जीएसटी में 5% और 18% के दो-स्तरीय टैक्स स्ट्रक्चर को मंजूरी दी गई है। नई दरें 22 सितंबर यानी नवरात्रि के पहले दिन से लागू होंगी। व्यक्तिगत उपयोग की लगभग सभी चीजों पर दरों में कटौती की गई है। दरअसल, सरकार घरेलू खर्च को बढ़ावा देने और अमेरिकी टैरिफ के आर्थिक प्रभाव को कम करने की कोशिश कर रही है। यह उसी दिशा में उठाया गया कदम है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिन भर चली जीएसटी काउंसिल मीटिंग में लिए गए फैसलों के बारे में जानकारी देते हुए कहा, ‘सभी फैसले सर्वसम्मति से किए गए और किसी भी राज्य से कोई असहमति नहीं थी।’ काउंसिल ने जीएसटी को मौजूदा चार स्लैब (5, 12, 18 और 28%) की जगह सिर्फ दो दरें (5 और 18%) रखने को मंजूरी दे दी। महंगी कारों, तंबाकू और सिगरेट जैसी कुछ चुनिंदा चीजों पर 40% के खास स्लैब का प्रस्ताव किया गया है। सीतारमण ने कहा कि पान मसाला, गुटखा, सिगरेट, जर्दा जैसे तंबाकू प्रोडक्ट्स और बीड़ी को छोड़कर बाकी सभी प्रोडक्ट्स के लिए नई दरें 22 सितंबर से प्रभावी हो जाएंगी।
दैनिक उपयोग की खाद्य वस्तुओं पर टैक्स रेट शून्य होगा। वहीं दूध (अत्यधिक तापमान वाले), छेना, पनीर, पिज्जा ब्रेड, खाखरा, सादी चपाती या रोटी पर कर की दर 5% से घटाकर शून्य कर दी गई है। पराठे पर भी जीरो टैक्स होगा जबकि अभी यह 18% है। आम उपयोग के खाद्य और पेय पदार्थों... मक्खन और घी से लेकर सूखे मेवे, कंडेंस्ड दूध, पनीर, अंजीर, खजूर, एवोकाडो, खट्टे फल, सॉसेज और मांस, चीनी से बनी कन्फेशनरी, जैम और फलों की जेली, नारियल पानी, नमकीन, 20 लीटर की बोतल में पैक पेयजल, फलों का गूदा या रस, दूध, आइसक्रीम, पेस्ट्री और बिस्कुट, कॉर्न फ्लेक्स और अनाज युक्त पेय पदार्थ और चीनी से बनी मिठाइयों पर कर की दर को मौजूदा के 12% या 18% से घटाकर 5% किया जाएगा। रबड़, मैप, पेंसिल, शार्पनर और अभ्यास पुस्तिकाओं पर 5% की जगह शून्य शुल्क लगेगा।
‘टूथ पाउडर’, दूध की बोतलें, रसोई के बर्तन, छाते, बर्तन, साइकिल, बांस के फर्नीचर और कंघी जैसी उपभोक्ता वस्तुओं पर कर की दर 12% से घटकर 5% कर दी गई है। शैम्पू, टैल्कम पाउडर, टूथपेस्ट, टूथब्रश, फेस पाउडर, साबुन और हेयर ऑयल पर कर की दरें 18% से घटाकर 5% कर दी गई हैं। सीतारमण ने कहा कि जीएसटी काउंसिल ने व्यक्तिगत जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के प्रीमियम भुगतान पर जीएसटी को हटाने का फैसला किया है। इससे लोगों के लिए बीमा पॉलिसी लेना सस्ता हो जाएगा। जीएसटी काउंसिल ने सीमेंट पर कर की दर को 28% से घटाकर 18% कर दिया है। इसके साथ 1,200 सीसी इंजन से कम और 4,000 मिमी से कम लंबाई वाले पेट्रोल, एलपीजी एवं सीएनजी वाहनों और 1,500 सीसी एवं 4,000 मिमी तक लंबाई वाले डीजल वाहनों पर कर की दर मौजूदा 28% से घटकर 18% हो जाएगी।
सीतारमण ने कहा कि 350 सीसी तक की मोटरसाइकिलें और एयर कंडीशनर, डिशवॉशर एवं टीवी जैसे उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स पर भी कर को 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है। 1,200 सीसी से ज्यादा और 4,000 मिमी से ज्यादा लंबी सभी गाड़ियों, 350 सीसी से ज्यादा क्षमता वाली मोटरसाइकिल और निजी उपयोग वाले विमानों और रेसिंग कारों पर 40% टैक्स लगेगा। अतिरिक्त चीनी वाले शीतल पेय पदार्थों पर 40% टैक्स लगेगा। वहीं, इलेक्ट्रिक वाहनों पर पहले की तरह 5% टैक्स लगता रहेगा।
राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि जीएसटी दरों में बदलाव से पड़ने वाला वित्तीय प्रभाव करीब 48,000 करोड़ रुपये का होगा, लेकिन राजकोषीय नजरिये से इसका कोई खास असर नहीं होगा। जीएसटी परिषद के इस फैसले से कुल प्रीमियम में कमी आएगी क्योंकि टैक्स अब काफी कम हो गया है। कर व्यवस्था को सरल बनाने का यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका को भारत के निर्यात पर 50% टैरिफ लगाया जा रहा है। यह किसी देश पर लगाया गया सबसे ज्यादा टैरिफ है। भारतीय अर्थव्यवस्था उपभोग पर बहुत अधिक निर्भर है। पिछले वित्त वर्ष में निजी उपभोग का बाजार मूल्य पर सकल घरेलू उत्पाद में 61.4% का योगदान रहा। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि जीएसटी सुधारों से इसके कार्यान्वयन के दूसरे साल तक अर्थव्यवस्था में 0.5% तक की अतिरिक्त वृद्धि होने की संभावना है। इससे अमेरिकी टैरिफ का पूरा प्रभाव बेअसर हो जाएगा।
सीतारमण ने कहा कि राज्यों को रेवेन्यू हानि की भरपाई को लिए गए ऋणों का पूरा भुगतान होने तक तंबाकू, गुटखा, तंबाकू उत्पादों और सिगरेट पर वर्तमान 28% टैक्स और क्षतिपूर्ति उपकर लागू रहेगा। रेस क्लब, पट्टा या किराये की सेवाओं और कसीनो/ जुआ/ घुड़दौड़/ लॉटरी/ ऑनलाइन मनी गेमिंग पर भी 40% टैक्स लगाया जाएगा। माल ढुलाई के तृतीय-पक्ष बीमा की सेवा की आपूर्ति पर इनपुट टैक्स क्रेडिट के साथ अब 12% के बजाय 5% टैक्स लगेगा।
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