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4 min read | अपडेटेड February 12, 2026, 09:15 IST
सारांश
अमेरिका में रोजगार के मजबूत आंकड़ों के बाद आज 12 फरवरी को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम होने से निवेशकों का मूड बदल गया है। हाजिर सोना और चांदी दोनों ही अपने रिकॉर्ड हाई से काफी नीचे ट्रेड कर रहे हैं।

सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव से निवेशकों के बीच बढ़ी हलचल।
शेयर बाजार के साथ-साथ आज कमोडिटी मार्केट में भी हलचल तेज है। गुरुवार यानी 12 फरवरी को सोने और चांदी की चमक कुछ फीकी पड़ती नजर आ रही है। ग्लोबल मार्केट से मिल रहे संकेतों की वजह से इन कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिका से आए रोजगार के मजबूत आंकड़े हैं। इन आंकड़ों ने उन निवेशकों को निराश किया है जो उम्मीद कर रहे थे कि फेडरल रिजर्व जल्द ही ब्याज दरों में कटौती करेगा। सोने की कीमतों में मामूली कमी आई है, जबकि चांदी के दाम 2 परसेंट तक टूट गए हैं। हालांकि जानकार मान रहे हैं कि यह गिरावट कुछ समय के लिए ही है और आने वाले समय में सोना एक बार फिर नई ऊंचाई को छू सकता है।
12 फरवरी को सुबह 09:10 बजे के अपडेट के मुताबिक बुलियन बाजार में कमजोरी का रुख देखने को मिला। सोना 676 रुपये यानी 0.43% की गिरावट के साथ 1,58,079 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा है। वहीं चांदी में भी दबाव दिखा और यह 1,950 रुपये यानी 0.74% फिसलकर 2,61,068 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई।
सोने और चांदी की कीमतों में आई इस ताजा गिरावट के तार सीधे तौर पर अमेरिका से जुड़े हैं। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में पेरोल में उम्मीद से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही जनवरी के महीने में बेरोजगारी की दर में भी अप्रत्याशित कमी देखी गई है। यह इस बात का संकेत है कि साल 2026 की शुरुआत में अमेरिकी लेबर मार्केट काफी मजबूत बना हुआ है। जब अर्थव्यवस्था और रोजगार के आंकड़े इतने मजबूत होते हैं, तो सेंट्रल बैंक यानी फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों में कटौती करने की जल्दी नहीं होती। बाजार के एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब ब्याज दरों में कटौती जून की जगह जुलाई तक टल सकती है। आमतौर पर जब ब्याज दरें कम होती हैं, तो सोने जैसी धातुओं को फायदा होता है क्योंकि इनमें कोई अलग से यील्ड नहीं मिलती। लेकिन अब ब्याज दरों में देरी की संभावना ने फिलहाल इसकी कीमतों पर दबाव बना दिया है।
आज एशियाई कारोबार के दौरान हाजिर सोने की कीमत गिरकर 5,080 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गई है। अगर इसकी तुलना इसके अब तक के सबसे ऊंचे स्तर से करें, तो सोना अपने रिकॉर्ड हाई यानी 5,608.35 डॉलर से करीब 10.4 परसेंट नीचे ट्रेड कर रहा है। चांदी की स्थिति और भी ज्यादा खराब नजर आ रही है। स्पॉट सिल्वर की कीमतें 2 परसेंट गिरकर 82.2 डॉलर पर पहुंच गई हैं। चांदी अपने ऑल टाइम हाई 121.67 डॉलर से लगभग 48 परसेंट नीचे बनी हुई है। हालांकि महीने की शुरुआत में आई भारी बिकवाली के बाद सोने ने अपनी आधी रिकवरी कर ली थी और अभी भी यह 5,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर टिका हुआ है। निवेशकों के लिए यह स्तर काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से आगे की दिशा तय होगी।
भले ही आज बाजार में थोड़ी नरमी दिख रही हो, लेकिन कई बड़े ग्लोबल बैंक सोने को लेकर अभी भी काफी उत्साहित हैं। बीएनपी पारिबा जैसे बैंकों का मानना है कि इस साल के अंत तक सोना 6,000 डॉलर के स्तर तक जा सकता है। इसके अलावा गोल्डमैन सैक्स और डॉयचे बैंक ने भी सोने को लेकर पॉजिटिव आउटलुक दिया है। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं। दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे तनाव और फेडरल रिजर्व की नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण लोग पारंपरिक एसेट जैसे करेंसी और बॉन्ड से हटकर सोने में निवेश करना ज्यादा सुरक्षित समझ रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में जब भी ब्याज दरों को लेकर स्पष्ट जानकारी आएगी, तो सोने की कीमतों में एक बार फिर बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है। निवेशकों को फिलहाल बाजार की उठापटक पर नजर रखनी चाहिए क्योंकि लॉन्ग टर्म के लिए फंडामेंटल्स अभी भी मजबूत नजर आ रहे हैं।
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