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4 min read | अपडेटेड January 12, 2026, 15:39 IST
सारांश
भारत में बजट पेश होने से पहले हलवा रस्म निभाई जाती है। इसके तुरंत बाद बजट बनाने वाले अधिकारी और कर्मचारी वित्त मंत्रालय के नॉर्थ ब्लॉक में नजरबंद हो जाते हैं। बजट पेश होने तक वे बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट जाते हैं। यह सब बजट की गोपनीयता बनाए रखने के लिए किया जाता है।

हलवा रस्म के बाद वित्त मंत्रालय के अधिकारी और कर्मचारी बजट पेश होने तक नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में ही रहते हैं।
भारतीय लोकतंत्र में बजट केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि इसके साथ कई पुरानी और दिलचस्प परंपराएं भी जुड़ी हुई हैं। हर साल बजट पेश होने से कुछ दिन पहले वित्त मंत्रालय में 'हलवा रस्म' निभाई जाती है। इस रस्म में वित्त मंत्री खुद अधिकारियों और कर्मचारियों को हलवा खिलाते हैं। लेकिन इस मीठी शुरुआत के तुरंत बाद वित्त मंत्रालय के नॉर्थ ब्लॉक के गलियारों में एक सख्त अनुशासन लागू हो जाता है। जैसे ही हलवा रस्म पूरी होती है, बजट तैयार करने वाली पूरी टीम के लिए बाहरी दुनिया के दरवाजे बंद हो जाते हैं। यह अधिकारी अगले कई दिनों तक वित्त मंत्रालय के अंदर एक तरह से 'कैद' या 'नजरबंद' हो जाते हैं और तब तक बाहर नहीं आते जब तक कि वित्त मंत्री संसद में बजट भाषण पूरा नहीं कर लेते।
बजट बनाने की प्रक्रिया के दौरान गोपनीयता को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है। हलवा रस्म के बाद बजट की छपाई का काम शुरू होता है। इस काम में जुटे करीब 100 अधिकारियों और छपाई कर्मचारियों को नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में स्थित प्रिंटिंग प्रेस वाले क्षेत्र में भेज दिया जाता है। अगले करीब 10 दिनों तक यह लोग वहीं रहते हैं। उन्हें अपने घर जाने, रिश्तेदारों से मिलने या किसी भी बाहरी व्यक्ति से बात करने की इजाजत नहीं होती है। यहां तक कि वे अपने परिवार के सदस्यों से भी संपर्क नहीं कर सकते। यह प्रक्रिया इसलिए अपनाई जाती है ताकि बजट के किसी भी प्रावधान या टैक्स संबंधी बदलावों की जानकारी सदन में पेश होने से पहले लीक न हो जाए।
बजट में सरकार की आर्थिक नीतियों और टैक्स प्रस्तावों का जिक्र होता है। अगर बजट की कोई भी छोटी सी जानकारी समय से पहले बाहर आ जाए, तो इसका सीधा असर शेयर बाजार और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। कोई भी व्यक्ति या संस्था इस जानकारी का गलत फायदा उठाकर बाजार में बड़ी उथल-पुथल मचा सकती है। इसी खतरे को टालने के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की निगरानी में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए जाते हैं। इस दौरान अधिकारियों के मोबाइल फोन जमा कर लिए जाते हैं और वहां इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी जाती है। आपात स्थिति के लिए केवल एक लैंडलाइन फोन उपलब्ध होता है, लेकिन उस पर होने वाली हर बातचीत को सुरक्षा एजेंसियां सुनती हैं।
इन अधिकारियों के रहने और खाने-पीने का पूरा इंतजाम वित्त मंत्रालय के अंदर ही किया जाता है। वहां उनके सोने के लिए बिस्तर, नहाने की व्यवस्था और खाने के लिए एक कैंटीन होती है। इसके अलावा अधिकारियों के स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए एक अस्थायी मेडिकल टीम भी वहां तैनात रहती है। यह अधिकारी और कर्मचारी दिन-रात कड़ी मेहनत करते हैं ताकि बजट के आंकड़े और सरकारी नीतियां बिल्कुल सही तरीके से छप सकें। उनकी दुनिया बस उन कंप्यूटरों और मशीनों तक सीमित रह जाती है। यह एक बहुत ही कठिन समय होता है, जहां वे पूरी तरह एकांत में रहकर देश का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार करते हैं। उनकी यह तपस्या तब सफल मानी जाती है जब बजट बिना किसी बाधा के संसद में पेश हो जाता है।
बजट को लेकर इतनी सख्ती के पीछे एक ऐतिहासिक घटना है। साल 1950 तक बजट की छपाई राष्ट्रपति भवन में होती थी। उस साल बजट का एक हिस्सा लीक हो गया था, जिसकी वजह से तत्कालीन वित्त मंत्री जॉन मथाई को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। इस बड़ी सुरक्षा चूक के बाद बजट छपाई का काम राष्ट्रपति भवन से हटाकर दिल्ली के मिंटो रोड स्थित एक प्रेस में भेजा गया। बाद में साल 1980 से बजट की छपाई का स्थाई ठिकाना वित्त मंत्रालय के नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट को बना दिया गया। तब से लेकर आज तक हर साल यह गोपनीयता का नियम और भी कड़ा होता गया है।
हालांकि यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि साल 2021 में सरकार ने पहली बार डिजिटल बजट पेश किया था। लेकिन इस बजट को भी तैयार करने के लिए पूरी तरह से वही प्रक्रिया अपनाई गई थी जो उससे पहले अपनाई जाती रही है। फिर उसके बाद से डिजिटल बजट पेश करने की परंपरा अपना ली गई, और इस साल भी डिजिटल बजट ही पेश किया जाना है।
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