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  1. क्या है इकोनॉमिक सर्वे, कितना पुराना है इतिहास, पिछले कुछ सालों में कितना सटीक रहा है अनुमान? जानें सब

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क्या है इकोनॉमिक सर्वे, कितना पुराना है इतिहास, पिछले कुछ सालों में कितना सटीक रहा है अनुमान? जानें सब

Upstox

3 min read | अपडेटेड January 28, 2026, 09:11 IST

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सारांश

Economic Survey क्या है, इसका इतिहास कितना पुराना है, साथ ही पिछले कुछ सालों में इसका अनुमान कितना सटीक रहा है। चलिए आपके इन सारे सवालों के जवाब जानने की कोशिश करते हैं।

इकोनॉमिक सर्वे

क्या है इकोनॉमिक सर्वे, क्यों यह इतना अहम है?

भारत की आर्थिक वृद्धि दर अक्सर आर्थिक समीक्षा (Economic Survey) में लगाए गए अनुमानों से अधिक रहती है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में 7.4% की वृद्धि दर्ज होने की उम्मीद है, जबकि बजट-पूर्व इस दस्तावेज में इसके 6.3-6.8% रहने का अनुमान लगाया गया था। फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में जीडीपी वृद्धि दर 9.2% रही थी, जबकि समीक्षा का अनुमान 6-6.8% था। हालांकि, 2024-25 में आर्थिक वृद्धि 6.5% रही, जो समीक्षा में दिए गए 6.5-7% के अनुमान के अनुरूप थी। एनालिसिस से संकेत मिलता है कि 2022-23 में वृद्धि का लक्ष्य चूक गया था। तब वास्तविक आर्थिक वृद्धि 7.6% रही थी, जबकि आर्थिक समीक्षा का अनुमान 8-8.5% था।

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साल 2021-22 में कोविड महामारी के कारण आर्थिक समीक्षा में कोई अनुमान नहीं लगाया गया था। इस साल मुख्य रूप से आधार प्रभाव की वजह से वृद्धि दर 9.7% रही थी। कोविड महामारी और उसके बाद लगे लॉकडाउन के कारण 2020-21 में वृद्धि दर नेगेटिव 5.8% थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करेंगी, उससे पहले 29 जनवरी को इकोनॉमिक सर्वे की रिपोर्ट सामने आएगी।

बजट से ठीक पहले पेश की जाने वाला यह सर्वे सरकार की आर्थिक सोच को बताता है और नई नीतिगत निर्णयों की घोषणा से पहले देश की वित्तीय स्थिति का विस्तृत ब्योरा देता है।

क्या है इकोनॉमिक सर्वे का इतिहास?

बजट से एक दिन पहले इकोनॉमिक सर्वे पेश किया जाता है, यह नियम 60 के दशक में बना था, लेकिन पहला इकोनॉमिक सर्वे 1950-51 में पेश किया था, इसका मतलब इसका इतिहास करीब 75 साल पुराना है। 1964 से इकोनॉमिक सर्वे बजट से एक दिन पहले पेश किया जाता है।

क्या है इकोनॉमिक सर्वे?

दरअसल इकोनॉमिक सर्वे में देश की पूरी वित्तीय स्थिति का लेखा-जोखा होता है। पहले यह सर्वे बजट का हिस्सा हुआ करता था, लेकिन बाद में इसे अलग डॉक्यूमेंट के तौर पर पेश किया जाने लगा। यह देश के लिए बहुत अहम डॉक्यूमेंट होता है। इसे पेश करने से पहले वित्त मंत्री की मंजूरी लेनी पड़ती है। आसान भाषा में अगर समझना है, तो ऐसे मान लीजिए कि आर्थिक सर्वे देश की अर्थव्यवस्था की हेल्थ रिपोर्ट के तौर पर काम करता है। इसे वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग द्वारा तैयार किया जाता है। सामान्य तौर पर बजट से एक दिन पहले आने वाला आर्थिक सर्वे इस बार तीन दिन पहले पेश किया जा रहा है। दरअसल इस बार 1 फरवरी को रविवार पड़ रहा है और यह एक बड़ा कारण है कि आर्थिक सर्वे तीन दिन पहले पेश किया जा रहा है।

PTI इनपुट के साथ
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लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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