return to news
  1. किसकी सलाह पर सरकार ने रेल बजट को आम बजट में मिला दिया? 1924 से पेश होता आया था रेल बजट, दिलचस्प है कहानी

बिजनेस न्यूज़

किसकी सलाह पर सरकार ने रेल बजट को आम बजट में मिला दिया? 1924 से पेश होता आया था रेल बजट, दिलचस्प है कहानी

विकास तिवारी

4 min read | अपडेटेड January 08, 2026, 07:46 IST

Twitter Page
Linkedin Page
Whatsapp Page

सारांश

भारत में साल 2017 से पहले रेल बजट अलग से पेश किया जाता था। 1924 में शुरू हुई इस 92 साल पुरानी परंपरा को मोदी सरकार ने विवेक देबरॉय समिति की सिफारिश पर खत्म कर दिया। चलिए आज इतिहास के पन्ने को पलटते हैं।

budget-2026-railway-budget-merger-with-union-budget

रेल बजट के आम बजट में विलय की अनकही कहानी

भारतीय लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था के इतिहास में साल 2017 एक बहुत बड़े बदलाव का गवाह बना था। इसी साल केंद्र सरकार ने करीब नौ दशक पुरानी उस परंपरा को हमेशा के लिए खत्म कर दिया था जिसके तहत रेल बजट को आम बजट से अलग पेश किया जाता था। अब रेल बजट आम बजट का ही एक हिस्सा होता है और वित्त मंत्री ही रेलवे के लिए आवंटन की घोषणा करते हैं। इस बड़े बदलाव के पीछे एक लंबी कहानी और गहरी आर्थिक सोच छिपी हुई है। भारत में रेल बजट को आम बजट में मिलाने का फैसला रातों-रात नहीं लिया गया था बल्कि इसके लिए बाकायदा एक उच्च स्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इस ऐतिहासिक फैसले की नींव नीति आयोग के सदस्य विवेक देबरॉय की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों पर रखी गई थी।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

किसकी सलाह पर हुआ यह बड़ा बदलाव?

साल 2015 में केंद्र सरकार ने रेलवे के कायाकल्प और उसके ढांचे में सुधार के लिए विवेक देबरॉय की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। इस समिति का मुख्य काम यह पता लगाना था कि रेलवे को कैसे ज्यादा आधुनिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है। विवेक देबरॉय समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा कि रेल बजट को अलग से पेश करने का अब कोई ठोस आधार नहीं बचा है। समिति का मानना था कि अलग बजट होने की वजह से रेलवे पर राजनीतिक दबाव ज्यादा रहता है और लोकलुभावन घोषणाओं के चक्कर में रेलवे की आर्थिक सेहत बिगड़ती जा रही है। इसी सलाह को मानते हुए तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साल 2017 में पहली बार संयुक्त बजट पेश किया था।

1924 में क्यों शुरू हुई थी अलग बजट की परंपराय़

रेल बजट के अलग होने का इतिहास गुलामी के दौर से जुड़ा हुआ है। साल 1920-21 के दौरान ब्रिटिश सरकार ने विलियम एकवर्थ की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी जिसे एकवर्थ कमेटी कहा जाता है। उस समय भारत के कुल बजट का एक बहुत बड़ा हिस्सा केवल रेलवे पर खर्च होता था। एकवर्थ कमेटी ने सुझाव दिया था कि रेलवे के पास अपनी कमाई और खर्च का अलग हिसाब होना चाहिए ताकि इसका तेजी से विस्तार किया जा सके। इसी सिफारिश के आधार पर साल 1924 में पहली बार भारत में अलग रेल बजट पेश किया गया था। तब से लेकर साल 2016 तक यह परंपरा लगातार चलती रही और हर साल देश के रेल मंत्री संसद में अपना अलग बजट पेश करते थे।

विलय के पीछे की असली वजहें क्या हैं?

सरकार ने जब रेल बजट को आम बजट में मिलाया तो उसके पीछे कई महत्वपूर्ण तर्क दिए गए थे। सबसे बड़ी वजह यह थी कि अलग बजट होने के कारण रेलवे को हर साल सरकार को लाभांश यानी डिविडेंड देना पड़ता था। विलय के बाद रेलवे को इस बोझ से मुक्ति मिल गई। इसके अलावा अलग बजट होने की वजह से रेलवे की योजनाओं को लागू करने में बहुत समय लगता था क्योंकि वित्त मंत्रालय और रेल मंत्रालय के बीच तालमेल बिठाने में लंबी प्रक्रिया का पालन करना पड़ता था। अब एक ही बजट होने से फंड का आवंटन और परियोजनाओं की मंजूरी पहले के मुकाबले ज्यादा आसान और तेज हो गई है।

इतिहास के पन्नों में दर्ज हुआ आखिरी रेल बजट

भारत के संसदीय इतिहास में आखिरी अलग रेल बजट पेश करने का रिकॉर्ड सुरेश प्रभु के नाम दर्ज है। उन्होंने 25 फरवरी 2016 को संसद में अंतिम बार रेल बजट पेश किया था। उसके बाद से यह सिलसिला खत्म हो गया। रेल बजट के विलय ने न केवल प्रशासनिक काम को आसान बनाया बल्कि संसद के कीमती समय की भी बचत की। हालांकि कई जानकारों का मानना है कि अलग बजट होने से रेलवे की छोटी-छोटी समस्याओं पर ज्यादा चर्चा होती थी जो अब आम बजट की बड़ी फाइलों में कहीं दब कर रह जाती है।

मार्केट में हलचल?
स्मार्ट टूल्स के साथ आगे बढ़ें
promotion image

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

अगला लेख