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Budget 2026: कहानी उस बजट की... जिसके लीक हो जाने के बाद वित्त मंत्री को देना पड़ा था इस्तीफा

विकास तिवारी

3 min read | अपडेटेड November 26, 2025, 13:53 IST

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सारांश

भारत के बजट इतिहास में साल 1950 की घटना बेहद अहम है। तब बजट पेश होने से कुछ ही देर पहले लीक हो गया था। इस घटना ने सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे। इसके बाद ही बजट की छपाई की जगह बदली गई और सुरक्षा के कड़े नियम बनाए गए।

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1950 में बजट लीक होने के बाद नॉर्थ ब्लॉक में शुरू हुई थी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था।

Budget 2026: भारत में हर साल बजट पेश करने से पहले हलवा सेरेमनी होती है और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों को दुनिया से काटकर एक तहखाने में बंद कर दिया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इतनी कड़ी सुरक्षा और जासूसी फिल्मों जैसी गोपनीयता क्यों बरती जाती है? इसके पीछे एक बहुत बड़ी वजह है। इतिहास में एक ऐसा दौर भी आया था जब देश का बजट पेश होने से पहले ही लीक हो गया था। इस घटना ने न केवल सरकार की नींद उड़ा दी थी, बल्कि इसके बाद तत्कालीन वित्त मंत्री को अपने पद से इस्तीफा तक देना पड़ गया था। बजट 2026 की तैयारियों के बीच यह किस्सा जानना हर भारतीय के लिए दिलचस्प है।
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साल 1950 का वो चर्चित बजट लीक

यह कहानी साल 1950 की है। भारत गणतंत्र बन चुका था और देश का पहला गणतंत्र बजट पेश किया जाना था। उस समय देश के वित्त मंत्री जॉन मथाई थे। उन दिनों बजट की छपाई आज की तरह नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में नहीं होती थी। 1950 तक बजट के दस्तावेज राष्ट्रपति भवन के अंदर ही छापे जाते थे। सुरक्षा के इंतजाम तब भी थे, लेकिन आज जैसे हाईटेक नहीं थे। बजट पेश होने वाला था, तैयारियां पूरी थीं। तभी खबर आई कि बजट के कुछ अहम हिस्से लीक हो गए हैं। यह खबर जंगल में आग की तरह फैल गई।

लीक के बाद मच गया था बवाल

बजट लीक होने की खबर से संसद से लेकर सड़क तक हड़कंप मच गया। विपक्ष और आम जनता ने सरकार की गोपनीयता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। यह एक बहुत बड़ी चूक मानी गई क्योंकि बजट में टैक्स से जुड़े बड़े फैसले होते हैं, जिनके लीक होने से कुछ व्यापारियों को गलत फायदा मिल सकता था। इस घटना ने सरकार को बैकफुट पर ला खड़ा किया। उस समय यह माना गया कि राष्ट्रपति भवन में छपाई होने की वजह से सुरक्षा में सेंध लगी थी। इस घटना के बाद तुरंत बड़ा फैसला लिया गया और बजट की छपाई का काम राष्ट्रपति भवन से हटाकर मिंटो रोड स्थित सरकारी प्रेस में शिफ्ट कर दिया गया।

वित्त मंत्री का इस्तीफा और बदला इतिहास

इस बजट लीक कांड का असर यह हुआ कि तत्कालीन वित्त मंत्री जॉन मथाई को भारी दबाव का सामना करना पड़ा। हालांकि उनके इस्तीफे के पीछे योजना आयोग के साथ मतभेद भी एक बड़ी वजह थी, लेकिन बजट लीक की घटना ने उनके कार्यकाल पर एक बड़ा दाग लगा दिया था। आखिरकार, 1950 का बजट पेश करने के कुछ ही समय बाद उन्होंने वित्त मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। इस घटना ने भारतीय बजट के इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया।

आज की सुरक्षा व्यवस्था की नींव

साल 1950 की उस गलती से सबक लेते हुए सरकार ने सुरक्षा चक्र को अभेद्य बनाने की ठानी। साल 1980 में नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में ही प्रिंटिंग प्रेस लगाई गई ताकि परिंदा भी पर न मार सके। आज जिस लॉक-इन प्रक्रिया को हम देखते हैं, जहां अधिकारियों को फोन तक इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं होती, उसकी नींव 1950 के उसी लीक कांड के बाद पड़ी थी। अब बजट पेश होने तक कोई भी अधिकारी बाहर की दुनिया से संपर्क नहीं कर सकता। यह सब इसलिए किया जाता है ताकि फिर कभी किसी वित्त मंत्री या सरकार को उस शर्मिंदगी का सामना न करना पड़े जो 1950 में झेलनी पड़ी थी।

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लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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