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3 min read | अपडेटेड February 17, 2026, 15:20 IST
सारांश
केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' में घोषणा की है कि भारत अगले दो वर्षों में एआई के पांचों लेयर्स में $200 बिलियन से अधिक का निवेश आकर्षित करेगा। सरकार जल्द ही 'एआई मिशन 2.0' लॉन्च करेगी, जिसमें 20,000 नए जीपीयू (GPUs) जोड़कर कंप्यूटिंग क्षमता को बढ़ाया जाएगा।

आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव
भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए एक बड़ी योजना का खाका पेश कर दिया है। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' के दौरान एक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि भारत अगले दो वर्षों में एआई स्टैक की पांचों परतों में $200 बिलियन (लगभग ₹16.6 लाख करोड़) से अधिक का निवेश आकर्षित करने के लिए तैयार है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि दुनिया भर की रुचि न केवल भारत में एआई की बढ़त को लेकर है, बल्कि इसके जिम्मेदार और सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करने में भी है। यह निवेश एआई इकोसिस्टम के हर हिस्से में आ रहा है, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर एनर्जी लेयर तक शामिल हैं।
अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि सरकार जल्द ही 'एआई मिशन 2.0' (AI Mission 2.0) पेश करेगी, जिसका मुख्य फोकस रिसर्च, इनोवेशन और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर होगा। उन्होंने बताया कि भारत की रणनीति अन्य देशों से अलग है। जहां कई देशों में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर मुट्ठी भर कंपनियों के नियंत्रण में है, वहीं भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुसार तकनीक का लोकतांत्रिकरण किया गया है। भारत पहले से ही अपनी आबादी के एक बड़े हिस्से को एआई कंप्यूटिंग की सुविधा दे रहा है। देश की कंप्यूटिंग क्षमता को और बढ़ाने के लिए मौजूदा 38,000 जीपीयू (GPUs) के बेस में 20,000 से अधिक नए जीपीयू जोड़े जाएंगे।
मंत्री ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदु की ओर इशारा किया कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है और भारत यहां बढ़त में है। भारत की कुल बिजली उत्पादन क्षमता का लगभग 51 प्रतिशत हिस्सा 'क्लीन सोर्स' यानी स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से आता है। यह स्वच्छ ऊर्जा क्षमता भारत के लिए एक बड़ा एडवांटेज है, जो ग्लोबल टेक कंपनियों को भारत की ओर आकर्षित कर रही है। यह बढ़ता हुआ निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर आने वाले वर्षों में भारत को एआई विकास और तैनाती के लिए एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।
एआई के खतरों को लेकर दुनिया भर में चिंताएं हैं और भारत इस पर वैश्विक सहमति बनाने की अगुवाई कर रहा है। वैष्णव ने कहा कि एआई को समाज के प्रति जवाबदेह बनाने और इसके लाभों को प्राप्त करते हुए इससे होने वाले नुकसानों को रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर आम सहमति बन रही है। भारत वैश्विक नेताओं के बीच एआई के सही और उचित उपयोग के बारे में सहमति बनाने का प्रयास करेगा, ताकि इस तकनीक का उपयोग मानवता के लाभ के लिए हो सके और इसके गलत इस्तेमाल से बचा जा सके।
किसी भी बड़े तकनीकी बदलाव को संभालने के लिए कुशल कार्यबल की जरूरत होती है। आईटी मंत्री ने कहा कि आईटी उद्योग भारत की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है और इस बदलाव को उद्योग, शिक्षा जगत (Academia) और सरकार को मिलकर मैनेज करना होगा। सरकार वर्तमान में तीन मोर्चों पर काम कर रही है: पहला, मौजूदा टैलेंट की रिस्किलिंग और अपस्किलिंग करना; दूसरा, टैलेंट की एक नई पाइपलाइन तैयार करना; और तीसरा, यह सुनिश्चित करना कि आने वाली पीढ़ियां इस नई तकनीक के लिए पूरी तरह तैयार हों। सरकार का 'फ्यूचर स्किल्स प्रोग्राम', जो तीन साल पहले शुरू किया गया था, अब जमीनी स्तर पर लागू किया जा रहा है।
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