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मिडिल ईस्ट में मचे बवाल के बीच निर्यातकों के लिए बीमा समर्थन योजना लाने का प्लान बना रही सरकार

Upstox

3 min read | अपडेटेड March 10, 2026, 14:19 IST

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सारांश

मिडिल ईस्ट संकट के कारण समुद्री मालभाड़ा, हवाई परिवहन लागत और बीमा प्रीमियम में भी बढ़ोतरी हुई है। यह संकट भारतीय निर्यातकों के लिए इस लिहाज से अहम है कि भारत के लिए पश्चिम एशिया का प्रमुख निर्यात बाजारों में से एक है।

मिडिल ईस्ट टेंशन

पश्चिम एशिया संकट के बीच निर्यातकों के लिए बीमा समर्थन योजना लाने पर विचारः गोयल

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बीच निर्यातकों को मदद देने के लिए सरकार बीमा समर्थन जैसी नई योजनाएं शुरू करने की संभावना तलाश रही है। गोयल ने कहा कि इस बारे में निर्यात ऋण गारंटी देने वाली यूनिट ईसीजीसी और अन्य विभागों के साथ परामर्श किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘हम निर्यातकों की मदद के लिए बीमा समर्थन जैसी कुछ नई योजनाएं विकसित करने पर भी विचार कर रहे हैं... इस बारे में ईसीजीसी और अन्य विभागों से चर्चा की जा रही है।’ उन्होंने कहा कि एक अंतर-मंत्रालयी समूह पश्चिम एशिया संकट से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है और निर्यातकों के साथ लगातार संपर्क में है।

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गोयल ने कहा कि सरकार उन निर्यातकों की मदद के उपाय तलाश रही है जिनका माल भेजा जा चुका है लेकिन मौजूदा हालात के कारण उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच, सीमा-शुल्क विभाग ने पश्चिम एशिया संकट के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने और समुद्री मार्गों में व्यवधान के चलते भारतीय बंदरगाहों पर वापस आने वाले निर्यात माल से निपटने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ईरान पर अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले और फिर ईरान के जवाबी हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है, जिससे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है।

इस संकट के कारण समुद्री मालभाड़ा, हवाई परिवहन लागत और बीमा प्रीमियम में भी बढ़ोतरी हुई है। यह संकट भारतीय निर्यातकों के लिए इस लिहाज से अहम है कि भारत के लिए पश्चिम एशिया का प्रमुख निर्यात बाजारों में से एक है।

LPG उत्पादन, CNG, पाइप वाली रसोई गैस को अलॉटमेंट में मिली टॉप प्राथमिकता

पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण आयातित गैस आपूर्ति बाधित होने के बीच केंद्र सरकार ने घरेलू स्तर पर उत्पादित प्राकृतिक गैस के अलॉटमेंट की प्राथमिकता लिस्ट संशोधित कर दी है। नई व्यवस्था में एलपीजी उत्पादन को सीएनजी और पाइप से मिलने वाली रसोई गैस के साथ टॉप प्राथमिकता दी गई है। सरकार की तरफ से जारी गजट अधिसूचना के मुताबिक, इन क्षेत्रों की जरूरतें पहले पूरी की जाएंगी और उसके बाद ही अन्य क्षेत्रों को गैस उपलब्ध कराई जाएगी।

संशोधित व्यवस्था के तहत पाइप के जरिए घरेलू रसोई गैस (पीएनजी), वाहनों के लिए संपीडित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) और एलपीजी उत्पादन को प्राथमिकता कैटेगरी में सबसे ऊपर रखा गया है। इन क्षेत्रों को पिछले छह महीने की औसत खपत के आधार पर 100% गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। उर्वरक क्षेत्र को दूसरी प्राथमिकता दी गई है और उसकी पिछले छह महीने की औसत मांग का कम-से-कम 70% पूरा किया जाएगा।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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