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  1. मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच सरकार का निर्यातकों को गिफ्ट, RoDTEP स्कीम सितंबर तक के लिए बढ़ाई

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मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच सरकार का निर्यातकों को गिफ्ट, RoDTEP स्कीम सितंबर तक के लिए बढ़ाई

Upstox

3 min read | अपडेटेड April 01, 2026, 12:49 IST

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सारांश

Remission of Duties and Taxes on Exported Products, RoDTEP: इस स्कीम के लिए 2025-26 बजट में 18,232 करोड़ रुपये अलॉट किया गया था। इसे 2026-27 में बढ़ाकर 21,709 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव था लेकिन अलॉटेड बजट 10,000 करोड़ रुपये रहा।

आरओडीटीईपी योजना

सरकार ने निर्यातकों के लिए आरओडीटीईपी योजना का लाभ 30 सितंबर तक बढ़ाया

सरकार ने मिडिल ईस्ट टेंशन के चलते ग्लोबल ट्रेड में पैदा हुई मुश्किलों के मद्देनजर निर्यातकों के लिए आरओडीटीईपी (Remission of Duties and Taxes on Exported Products, RoDTEP) स्कीम के तहत वित्तीय लाभ को छह महीने के लिए बढ़ाकर 30 सितंबर तक कर दिया है। आरओडीटीईपी स्कीम 2021 में शुरू की गई थी। इसके तहत निर्यातकों पर वस्तुओं की मैनुफैक्चरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन के प्रोसेस में लगने वाले उन करों, शुल्कों और उपकरों को वापस किया जाता है जिनकी भरपाई केंद्र, राज्य या स्थानीय स्तर की किसी अन्य व्यवस्था के तहत नहीं होती। इस योजना के तहत वापसी 0.3% से 3.9% के बीच होती है। यह स्कीम इस साल 31 मार्च तक मान्य थी। विदेश व्यापार महानिदेशालय (Directorate General of Foreign Trade, DGFT) ने अधिसूचना में कहा, ‘1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के दौरान किए जाने वाले पात्र निर्यात को 31 मार्च को लागू दरों और मूल्य सीमा के मुताबिक आरओडीटीईपी बेनिफिट मिलता रहेगा, बशर्ते स्कीम की मौजूदा शर्तें लागू हों।’

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कितना है इस स्कीम का बजट?

इस स्कीम के लिए 2025-26 बजट में 18,232 करोड़ रुपये अलॉट किया गया था। इसे 2026-27 में बढ़ाकर 21,709 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव था लेकिन अलॉटेड बजट 10,000 करोड़ रुपये रहा। निर्यातक समुदाय पहले अमेरिका के हाई टैरिफ से जूझ रहा था और अब पिछले महीने अमेरिका और इजराइल के ईरान पर संयुक्त हमले से पैदा हुई मिडिल ईस्ट टेंशन से नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। इस संघर्ष के कारण समुद्री और हवाई मालभाड़ा दरें बढ़ गई हैं जबकि इंश्योरेंस प्रीमियम भी बढ़ रहा है। देश का माल निर्यात फरवरी में सालाना आधार पर 0.81% घटकर 36.61 अरब डॉलर रह गया जबकि व्यापार घाटा पिछले महीने की तुलना में घटकर 27.1 अरब डॉलर रह गया।

कब आएंगे मार्च के आंकड़े?

मिडिल ईस्ट टेंशन का प्रभाव मार्च के आंकड़ों में दिखाई देगा क्योंकि युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था। ये आंकड़े मई के मध्य तक जारी किए जाएंगे। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य बढ़े हुए मालभाड़ा खर्च और युद्ध से जुड़े व्यापारिक जोखिमों का सामना कर रहे भारतीय निर्यातकों को समय पर सहायता देना है, जो खाड़ी और व्यापक पश्चिम एशिया समुद्री गलियारे में व्यवधान से उत्पन्न हुए हैं।

क्या है रिलीफ स्कीम?

सरकार ने पिछले सप्ताह निर्यातकों को राहत देने के लिए 487 करोड़ रुपये की ‘रिलीफ’ (निर्यात सुविधा के लिए मजबूती और लॉजिस्टिक पहल) स्कीम भी शुरू की थी। डीजीएफटी ने एक अलग अधिसूचना में कहा कि तूर और उड़द के ‘मुक्त’ आयात की नीति को एक और साल बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक कर दिया गया है। इसके अलावा पीली मटर के आयात को भी न्यूनतम आयात नीति शर्त और बंदरगाह प्रतिबंध के बिना ‘मुक्त’ रखा गया है। बशर्ते कि सभी आयात खेपों के लिए ऑनलाइन आयात निगरानी प्रणाली में रजिस्टर किया गया हो और ‘बिल ऑफ लैडिंग’ (शिप्ड ऑन बोर्ड) 31 मार्च 2027 या उससे पहले जारी किया गया हो। ‘बिल ऑफ लैडिंग’ एक प्रमुख कानूनी दस्तावेज है जो शिपिंग कंपनी द्वारा माल प्राप्त करने के बाद जारी किया जाता है। अधिसूचना में यह भी कहा गया कि ‘वर्जिन मल्टी-लेयर पेपर बोर्ड’ पर लागत, बीमा एवं मालभाड़ा मूल्य के आधार पर 67,220 रुपये प्रति टन का न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) एक महीने के लिए बढ़ाकर 30 अप्रैल तक कर दिया गया है।

भाषा इनपुट के साथ

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