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मानव सभ्यता के इतिहास की गवाह हैं ऐसी इमारतें जो हजारों साल से अपनी नींव पर खड़ी हैं।
वक्त के साथ इनकी शक्ल बदल चुकी है और वर्तमान में इनकी जरूरत भी लेकिन इनकी मौजूदगी एहसास दिलाती है हमारी जड़ों का, संस्कृति और सभ्यता का।
ऐसी ही धरोहरों को पहचान देती है UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट और भूले हुए कल को सराहने का मौका देती है।
यहां देखते हैं इस लिस्ट में शामिल ऐसी इमारतें जो 2000 BC से भी पहले की कहानी सुनाती हैं।
(c. 2630 BCE)
कहा जाता है कि मिस्र के सक्कारा में लाइमस्टोन से बने 62 मीटर के इस पिरामिड से ही गीजा के पिरामिडों की श्रृंखला शुरू हुई थी।
(c. 3100–2500 BCE)
साल 1850 में एक तूफान से खोजे गए इस ढांचे में पत्थर से बने 10 घर हैं। यहां पत्थर के बिस्तर भी हैं और पॉटरी भी पाई गई है।
(c. 3150–2500 BCE)
चार मंदिरों का ये समूह लाइमस्टोन से बना है। मंदिरों की दीवारों पर बनीं कलाकृतियां बताती हैं कि इससे लोगों का कितना जुड़ाव रहा होगा।
(c. 3200 BCE)
इस गोलाकार टीले की खास बात ये है कि इसका दरवाजा कुछ यूं बना है कि विंटर सॉल्सटिस पर सूरज की किरणें सीधे गर्भग्रह में गिरती हैं।
(c. 3700–3500 BCE)
स्कॉटलैंज के ऑर्कनी टापू पर मिले इस ढांचे में दीवारें और दरवाजे आज भी मौजूद हैं। यहां एक हिस्सा घर और दूसरा हिस्सा वर्कशॉप रहा होगा।
(c. 3600–3200 BCE)
माना जाता है कि 5 मीटर लंबे पत्थरों से बने मिस्र के पिरामिड से भी पुराने इस मंदिर में फर्टिलिटी के लिए किसी तरह की रस्म की जाती रही होगी।
(c. 9600–7000 BCE)
साल 1994 में खोजा गया 16 फीट के पिलर्स का ये कॉम्प्लेक्स लोगों के मिलने-जुलने की जगह रहा होगा।
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