Images: UNESCO Website
दक्षिण कोरिया में आयोजित यूनेस्को बैठक के 48वें सत्र में इसे आधिकारिक रूप से धरोहर घोषित किया गया।
यह ऐतिहासिक स्थल पिछले 28 वर्षों से यूनेस्को की संभावित यानी टेंटेटिव सूची में शामिल रहा था।
सारनाथ उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित है और यह भारत का 45वां यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल बना है।
भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश इसी पवित्र भूमि पर अपने पांच शिष्यों को दिया था।
बुद्ध द्वारा दिए गए इस प्रथम धर्मोपदेश की ऐतिहासिक घटना को बौद्ध धर्म में धर्मचक्र प्रवर्तन कहा जाता है।
सम्राट अशोक ने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में यहां आकर महान बौद्ध स्तूपों और अशोक स्तंभ का निर्माण करवाया था।
सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष ही भारत का राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न चुना गया है।
चौखंडी स्तूप उस पवित्र स्थल की याद दिलाता है जहां बुद्ध अपने पहले पाँच शिष्यों से मिले थे।
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