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सोना सिर्फ अपनी चमक और दुर्लभता के लिए ही बहुमूल्य धातु नहीं है बल्कि इसकी केमिकल प्रॉपर्टीज इसे और भी खास बनाती हैं।
सोने का इस्तेमाल जेवरों के लिए होता ही है, इकॉनमी की सेहत का अंदाजा भी इससे लगाया जाता है।
दिलचस्प बात ये है कि सोना भविष्य में ऊर्जा के संकट से बचाने का तरीका भी बन सकता है।
न्यूक्लियर से लेकर हाइड्रोजन एनर्जी तक सोना ऊर्जा पैदा करने के प्रोसेस का अहम हिस्सा होता है।
सोने के नैनोपार्टिकल सोलर सेल्स की क्षमता को बढ़ाते हैं। ये सूरज की रोशनी को बेहतर तरीके से सोखते हैं। इनकी इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी भी काफी ज्यादा होती है।
विंड टर्बाइन के अलग-अलग हिस्सों में लगा सोना इसकी शेल्फ-लाइफ को बढ़ाता है। यहां भी बेहतरीन कंडक्टिविटी लंबी दूरी पर एनर्जी ट्रांसमिशन में मदद करती है।
सोना हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट्स के कंट्रोल बोर्ड्स, स्विच और सेंसर जैसे हिस्सों पर भी चढ़ा होता है। ये पानी के असर से खराब नहीं होता और लंबे वक्त तक चलता है।
हाइड्रोजन प्रोडक्शन और फ्यूल सेल में सोना कैटलिस्ट का काम करता है। सोने की कोटिंग वाले सेंसर हाइड्रोजन की लीक को डिटेक्ट करते हैं और सुरक्षा पुख्ता करते हैं।
सोने की डेंसिटी इसे रेडिएशन को बेहतर अब्जॉर्ब करने में मदद करती है। इससे न्यूक्लियर पावर प्लांट्स में उपकरणों और लोगों को प्रोटेक्शन मिलता है।
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