हिंदी, उर्दू नहीं... ये हैं भारत की 11 शास्त्रीय भाषाएं

19 मार्च 2025

तस्वीरें: Shutterstock

भारत के सांस्कृतिक इतिहास की पहचान समझी जाने वाली कुछ भाषाओं को मिला है यह दर्जा। 

शास्त्रीय भाषा चुने जाने पर उसमें रिसर्च, आर्काइविंग, ट्रांसलेशन, पब्लिशिंग जैसे पहलुओं पर फोकस होता है। साल 2004 में पहली बार सरकार ने शास्त्रीय भाषाओं की कैटिगिरी बनाई थी। 

इससे सांस्कृति का संरक्षण तो होता ही है, इनके विकास के लिए अलग से बजट मिलने पर नौकरियां भी पैदा होती हैं। 

1500-2000 साल का लिखित इतिहास हो, प्राचीन साहित्य, पद्य, शिलालेखों के साथ-साथ गद्य हो। ये भाषाएं मौजूदा स्वरूप से अलग या पूरी तरह से कटी हुई भी हो सकती है।

किस आधार पर चुनी जाती हैं?

यहां देखते हैं कौन सी 11 भाषाओं को भारत में शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिला हुआ है…

साल: 2004

तमिल

साल: 2005

संस्कृत

साल: 2008

तेलुगू

साल: 2008

कन्नडा

साल: 2013

मलयालम

साल: 2014

ओड़िया

साल: 2024

मराठी

साल: 2024

पाली

साल: 2024

प्राकृत

साल: 2024

असमिया

साल: 2024

बांग्ला

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