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बजट 2025 में नई कर व्यवस्था के तहत वेतनप्राप्त कर्मचारियों को ₹12.75 लाख तक की टैक्सेबल सैलरी पर टैक्स से छूट दे दी गई।
बजट में पुरानी कर व्यवस्था के तहत कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसमें छूट के लिए डिडक्शन काम आते हैं।
यहां समझते हैं कि नई और पुरानी कर व्यवस्था के तहत अधिकतम कितनी सैलरी पर टैक्स में छूट मिल सकती है।
(CA सुरेश सुराना से बातचीत के आधार पर)
नई कर व्यवस्था में सेक्शन 87ए के तहत ₹12 लाख तक की टैक्सेबल आमदनी पर रिबेट को ₹60,000 कर दिया गया है यानी टैक्स जीरो।
वेतनप्राप्त कर्मचारियों के लिए ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन है जिससे उनके लिए ₹12.75 लाख तक आमदनी टैक्स-फ्री हो जाती है।
जिनकी टैक्सेबल आमदनी ₹12 लाख से ₹12.75 लाख के बीच है, उन्हें मार्जिनल रिलीफ के आधार पर टैक्स में राहत मिल जाती है।
नई कर व्यवस्था में इन बदलावों से मध्यमवर्गीय करदाता के ऊपर से टैक्स का बोझ कम होता है।
पुरानी कर व्यवस्था के तहत टैक्स में राहत डिडक्शन और छूट पर निर्भर करती है।
ये सेक्शन 80सी (₹1.5 लाख), सेक्शन 80डी (मेडीक्लेम प्रीमियम), HRA, के तहत क्लेम की जा सकती है।
अगर कोई डिडक्शन क्लेम ना किया जाए तो भी सेक्शन 87ए के तहत ₹12,500 की रिबेट के चलते ₹5 लाख तक की टैक्सेबल आमदनी पर टैक्स नहीं पड़ता।
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