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4 min read | अपडेटेड June 30, 2026, 14:37 IST
सारांश
भारत में इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने का सीजन चल रहा है। देश के लाखों पेंशनभोगियों को भी अपनी पेंशन इनकम पर टैक्स रिटर्न दाखिल करना होता है। पेंशनर्स के लिए सबसे सही और आसान फॉर्म ITR-1 माना जाता है, लेकिन कुछ खास हालातों में उन्हें दूसरे फॉर्म चुनने पड़ते हैं।

पेंशनभोगियों को अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते समय सही फॉर्म चुनना बेहद जरूरी है।
टैक्स रिटर्न फाइल करने का सीजन पूरे देश में चल रहा है और इस बार भी रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 तय की गई है। नौकरीपेशा लोगों की तरह ही देश के लाखों पेंशनभोगियों को भी अपनी पेंशन से होने वाली कमाई पर टैक्स रिटर्न भरना होता है। अक्सर वरिष्ठ नागरिकों और पेंशनर्स के मन में यह उलझन रहती है कि उनके लिए कौन सा फॉर्म सबसे सही रहेगा और वे किस तरह बिना किसी गलती के अपना टैक्स बचा सकते हैं। इनकम टैक्स नियमों के मुताबिक, पेंशन से मिलने वाली रकम को 'इनकम फ्रॉम सैलरी' यानी सैलरी के दायरे में ही रखा जाता है। इसलिए पेंशनर्स को भी टैक्स फाइलिंग के दौरान वही नियम फॉलो करने होते हैं जो एक सैलरी पाने वाले कर्मचारी को करने पड़ते हैं।
अगर आप एक साधारण पेंशनभोगी हैं और आपकी कमाई का जरिया बहुत सीधा है, तो आपके लिए ITR-1 फॉर्म जिसे सहज फॉर्म भी कहा जाता है, सबसे बेहतरीन और आसान विकल्प है। यह फॉर्म उन पेंशनर्स के लिए बनाया गया है जिनकी कुल सालाना कमाई पचास लाख रुपये तक होती है। अगर आपकी इनकम केवल पेंशन से आ रही है, रहने के लिए ज्यादा से ज्यादा दो घर हैं और बैंक या पोस्ट ऑफिस से मिलने वाला ब्याज या डिविडेंड आपकी कमाई का हिस्सा है, तो आप आंख मूंदकर ITR-1 चुन सकते हैं। भारत में ज्यादातर बुजुर्ग और पेंशनर्स इसी फॉर्म का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि इसे भरना बेहद आसान होता है और इसमें ज्यादा उलझाव वाले आंकड़े नहीं देने पड़ते हैं।
कई बार पेंशनभोगियों की कमाई सिर्फ पेंशन या ब्याज तक सीमित नहीं होती है। अगर आपने अपनी कोई पुरानी प्रॉपर्टी या जमीन बेची है, या फिर शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड से आपको कोई कैपिटल गेन्स यानी मुनाफा हुआ है, तो आप ITR-1 फॉर्म नहीं भर सकते हैं। ऐसी स्थिति में आपको ITR-2 फॉर्म का इस्तेमाल करना होगा। इसके अलावा, अगर आपकी कुल सालाना आमदनी पचास लाख रुपये से ज्यादा हो जाती है, या आपके पास दो से ज्यादा घर हैं जिनसे आपको किराए की कमाई हो रही है, तब भी आपको ITR-2 फॉर्म की तरफ ही जाना पड़ेगा। फॉर्म चुनते समय अपने फ्यूचर के ट्रांजैक्शन और कमाई के सभी सोर्सेज को अच्छी तरह समझना जरुरी होता है ताकि कोई डिफेक्टिव रिटर्न का नोटिस न आए।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट पेंशनभोगियों को टैक्स में बड़ी राहत देता है। सैलरी पाने वाले कर्मचारियों की तरह ही पेंशनर्स को भी न्यू टैक्स रेजिम के तहत पूरे 75,000 रुपये का सीधा स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है। वहीं अगर आप ओल्ड टैक्स रेजिम चुनते हैं, तो आपको 50,000 रुपये की छूट मिलती है। इसके लिए आपको किसी निवेश का प्रूफ देने की जरुरत नहीं होती है। इसके अलावा, साठ साल से ऊपर के वरिष्ठ नागरिकों को बैंक और पोस्ट ऑफिस के फिक्स डिपॉजिट या सेविंग्स अकाउंट से मिलने वाले ब्याज पर सेक्शन 80टीटीबी के तहत पचास हजार रुपये तक की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है। इस नियम का इंप्लीमेंटेशन टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत देता है और उनकी टैक्सेबल इनकम को काफी कम कर देता है।
सरकार ने बहुत ज्यादा उम्र के बुजुर्गों के लिए नियमों को काफी आसान बना दिया है। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 194पी के तहत अगर किसी निवासी बुजुर्ग की उम्र 75 साल या उससे ज्यादा है, और उनकी कमाई का जरिया सिर्फ पेंशन और उसी बैंक से मिलने वाला ब्याज है, तो उन्हें आईटीआर फाइल करने से पूरी तरह छूट दी गई है। इसके लिए उन्हें अपने बैंक में जाकर एक तय फॉर्म में डिक्लेरेशन यानी घोषणा पत्र जमा करना होता है। इसके बाद वह बैंक खुद उनकी पूरी इनकम का कैलकुलेशन करता है और अगर कोई टैक्स बनता है, तो एक निश्चित पर्सेंट के हिसाब से TDS काट लेता है। ऐसे सुपर सीनियर सिटीजन्स को खुद से कोई रिटर्न दाखिल करने की भागदौड़ नहीं करनी पड़ती है।
पेंशनभोगियों को अपना रिटर्न भरने से पहले कुछ जरूरी कागजात जरूर संभाल कर रखने चाहिए। जिस बैंक या संस्था से आपको पेंशन मिलती है, वहां से अपना फॉर्म 16 या फॉर्म 16A जरूर ले लें। इसके साथ ही इनकम टैक्स पोर्टल पर जाकर अपना एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट यानी AIS और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी यानी TIS जरूर डाउनलोड करें। इसमें आपके पूरे साल के वित्तीय लेन-देन का कंसोलिडेटेड ब्योरा होता है। अगर आपके बैंक स्टेटमेंट और AIS के आंकड़ों में कोई अंतर मिलता है, तो उसे पहले ही ठीक करा लें। अपने पैन और आधार को लिंक रखना और बैंक अकाउंट को प्री-वैलिडेट करना भी बेहद जरुरी है ताकि आपका रिफंड सीधे अकाउंट में आ सके।
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