IPO गाइड: कितनी तरह के होते हैं निवेशक?

बिजनेस का विस्तार करना हो, पुराने बकाये चुकाने हों या प्रमोटर्स को शेयर्स के बदले कैपिटल जुटाना हो, IPO या Initial Public Offering एक बेहतरीन तरीका होता है।

इसमें बड़े-छोटे निवेशक समानता से हिस्सा ले सकें, इसलिए IPO शेयर्स को खुदरा निवेशकों और संस्थागत निवेशकों में बांट दिया जाता है।

इससे बड़े निवेशकों को बाजार पर एकतरफा दबदबा कायम करने से रोका जा सकता है।

यहां समझते हैं निवेशकों की उन श्रेणियों को जो IPO में हिस्सा लेती हैं...

खुदरा निवेशक
इनमें ऐसे छोटे निवेशक आते हैं जो ₹2 लाख तक के शेयर्स के लिए अप्लाई कर सकते हैं। आमतौर पर इस श्रेणी के लिए 10-35% शेयर रिजर्व होते हैं।

गैर-संस्थागत निवेशक
ये ऐसे निवेशक या इकाइयां होती हैं जो ₹2 लाख से ज्यादा के शेयर्स पर बिना किसी छूट के बोली लगा सकते हैं। इनके लिए IPO में 15% तक शेयर्स रिजर्व किए जाते हैं।

छोटे गैर-संस्थागत निवेशक 
ये ₹2-₹10 लाख तक के शेयर्स पर बोली लगा सकते हैं। आमतौर पर इनके लिए एक तिहाई शेयर रिजर्व होते हैं।

बड़े गैर-संस्थागत निवेशक 
ये ₹10 लाख से ज्यादा के शेयर्स पर बोली लगाती हैं और इनके लिए दो तिहाई शेयर्स रिजर्व होते हैं। 

योग्य संस्थागत खरीददार
इस श्रेणी में आते हैं म्यूचुअल फंड्स, बीमा कंपनियां और बैंक जैसे संस्थान। इनके लिए आमतौर पर एक IPO में 50-90% शेयर रिजर्व होते हैं।

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