मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड June 24, 2025, 12:58 IST
सारांश
HDB Financial Services IPO: आईपीओ के तहत ₹2,500 करोड़ के नए शेयर जारी किए जाएंगे। वहीं, HDFC Bank द्वारा ₹10000 करोड़ के शेयरों की बिक्री ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए की जाएगी। HDFC Bank के पास कंपनी में 94.36% हिस्सेदारी है।

HDB Financial Services IPO: आईपीओ के लिए ₹700-₹740 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है।
आईपीओ के तहत ₹2,500 करोड़ के नए शेयर जारी किए जाएंगे। वहीं, HDFC Bank द्वारा ₹10000 करोड़ के शेयरों की बिक्री ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए की जाएगी। HDFC Bank के पास कंपनी में 94.36% हिस्सेदारी है।
अगर आप इस आईपीओ में निवेश का मन बना रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातें आपको जान लेनी चाहिए। यहां हमने कंपनी से जुड़े उन 10 जोखिमों के बारे में बताया है, जिनका जिक्र RHP में है।
एचडीबी फाइनेंशियल का कहना है कि अगर आरबीआई का 4 अक्टूबर 2024 को जारी ड्राफ्ट सर्कुलर लागू होता है, तो उसके प्रमोटर को कंपनी में अपनी हिस्सेदारी 20 फीसदी से नीचे लानी पड़ सकती है। इसका कंपनी के कामकाज, वित्तीय स्थिति और शेयर प्राइस पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
एचडीबी फाइनेंशियल ने कहा है कि 31 मार्च 2025 तक उसका ग्रॉस स्टेज 3 लोन, टोटल ग्रॉस लोन के 2.26% पर पहुंच गया, जो 31 मार्च 2024 तक 1.90% था। ग्रॉस स्टेज 3 लोन ऐसे लोन होते हैं जो 90 दिनों से अधिक समय से बकाया हों। अगर कस्टमर्स पेमेंट नहीं करते हैं या कंपनी पर्याप्त प्रोविजनिंग नहीं कर पाती तो इसका असर उसके मुनाफे पर पड़ सकता है।
31 मार्च 2025 तक अनसिक्योर्ड लोन कंपनी के टोटल ग्रॉस लोन का 26.99% था, जो 31 मार्च 2024 तक 28.66% से कम है। अनसिक्योर्ड लोन वे लोन होते हैं, जिसमें कुछ भी गिरवी नहीं रखा जाता। अगर कस्टमर्स पेमेंट नहीं करते हैं तो कंपनी को नुकसान हो सकता है।
एचडीबी फाइनेंशियल का कहना है कि 31 मार्च 2025 तक सिक्योर्ड लोन उसके टोटल ग्रॉस लोन का 73.01% था। कंपनी ने कहा कि अगर गिरवी रखी गई संपत्ति का मूल्य कम होता है या उसे बेचने में देरी होती है, तो उसे घाटा हो सकता है और उसकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ सकता है।
कंपनी ने चेतावनी दी है कि भविष्य में उसके पास एसेट-लायबिलिटी का असंतुलन हो सकता है। इससे लिक्विडिटी इश्यू और मुनाफे पर असर हो सकता है।
एचडीबी फाइनेंशियल के प्रमोटर और डायरेक्टर्स कुछ कानूनी मामलों में शामिल हैं। कुछ मामलों में रेगुलेटरी एजेंसियों ने जुर्माने भी लगाए हैं। अगर इन मामलों में कोई नकारात्मक फैसला आता है, तो इससे कंपनी की साख और आर्थिक स्थिति पर असर पड़ सकता है।
वित्त वर्ष 2023 में कंपनी ने अपने ऑपरेशंस, निवेश और फंडिंग गतिविधियों में नेगेटिव कैश फ्लो दिखाया है। आगे भी ऐसा हो सकता है क्योंकि कंपनी अपने नेटवर्क को देशभर में बढ़ाने के लिए पैसा खर्च कर रही है।
कंपनी के IPO का बड़ा हिस्सा "ऑफर फॉर सेल" है। इसका मतलब है कि इससे मिलने वाला पैसा कंपनी को नहीं मिलेगा, बल्कि मौजूदा शेयरधारक को मिलेगा।
कंपनी अपने प्रमोटर HDFC Bank को BPO सेवाएं (बैक ऑफिस, सेल्स सपोर्ट, कलेक्शन आदि) देती है। मार्च 2025 तक इन सेवाओं से कंपनी के कुल प्रॉफिट का 2.44% आया। अगर ये सेवाएं बंद हो गईं तो कंपनी के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।
कंपनी कहती है कि वह अपने प्रमोटर HDFC Bank की पहचान और सहयोग पर निर्भर है। हालांकि, कई बार प्रमोटर के अपने हित कंपनी या उसके अन्य निवेशकों के हितों से टकरा सकते हैं। HDB Financial, HDFC Bank और प्रमोटर ग्रुप की दूसरी कंपनियों (जैसे HDFC Sales और HDFC Securities) के साथ मिलती-जुलती सेवाएं देती है, जिससे प्रतिस्पर्धा और हितों का टकराव हो सकता है।
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